नई दिल्ली। विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल (West Bengal) के मतदाता सूची में लगभग सात लाख नए मतदाताओं को जोड़ा गया है। चुनाव आयोग (EC) ने इस अतिरिक्त मतदाताओं की आयु या लिंग के आधार पर ब्रेक-अप अभी तक जारी नहीं किया है।
इन नए मतदाताओं में से लगभग 3.22 लाख पहले चरण में वोट डालेंगे, जबकि बाकी करीब 3.88 लाख मतदाता दूसरे चरण में अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। चुनाव आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने शनिवार को यह बात कही।
हालांकि, आयोग ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि इन नए शामिल हुए मतदाताओं में से कितने पहली बार वोट करने वाले हैं, जिनकी उम्र हाल ही में 18 वर्ष पूरी हुई है। साथ ही इन मतदाताओं का लिंग-आधारित विस्तृत ब्रेक-अप भी नहीं दिया गया है।आयोग ने मतदाता सूची में शामिल होने के लिए प्राप्त फॉर्म-6 आवेदनों की संख्या भी नहीं बताई है और न ही यह बताया है कि उनमें से कितनों को अस्वीकार किया गया।
एक वरिष्ठ EC अधिकारी ने द टेलीग्राफ से कहा कि समग्र आंकड़े नियमों के अनुसार जारी किए गए हैं। विस्तृत डेटा अलग से रखा जाता है और यदि जरूरी हुआ तो बाद में साझा किया जा सकता है।
राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या अब 6,82,51,008 हो गई है, जो ट्रिब्यूनल के आदेशों के बाद नाम जोड़े जाने पर और बढ़ सकती है।
चुनाव आयोग ने बताया कि मतदाता सूची के विशेष जांच और संशोधन (SIR) की अंतिम चरण में न्यायिक फैसले के बाद 27 लाख से अधिक लोगों को मतदाता सूची से बाहर कर दिया गया था। यह प्रक्रिया नवंबर 2025 में शुरू हुई थी।सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि पहले चरण में मतदान होने वाले क्षेत्रों से हटाए गए मतदाता, अगर 21 अप्रैल तक उनकी अपील स्वीकार हो जाती है, तो आगामी चुनाव में वोट डाल सकते हैं। दूसरे चरण (29 अप्रैल) के लिए डेडलाइन 27 अप्रैल है।
पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा — 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को। मतगणना 4 मई को निर्धारित है।पिछले सप्ताह सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में अपीलीय ट्रिब्यूनल द्वारा नाम हटाने के खिलाफ अपील स्वीकार होने वाले मतदाताओं को शामिल करते हुए पूरक संशोधित मतदाता सूची जारी की जाए।
इस प्रक्रिया को संभालने के लिए कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने 19 ट्रिब्यूनल गठित किए हैं, जिनका नेतृत्व पूर्व हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और जजों द्वारा किया जा रहा है। ये ट्रिब्यूनल मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ अपीलों पर फैसला करेंगे। इसके अलावा, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड से लगभग 700 न्यायिक अधिकारी मतदाता सूची से बाहर किए गए लोगों द्वारा लगाई गई 60 लाख से अधिक आपत्तियों पर विचार कर रहे हैं।











