नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के नेता और पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री पद के मजबूत दावेदार शुभेंदु अधिकारी (Suvendu Adhikari) के निजी सहायक और करीबी सहयोगी चंद्रनाथ रथ की हत्या से हड़कंप मच गया है। रथ को छह मई को उत्तरी 24 परगना जिले के मध्यग्राम में कुछ अज्ञात लोगों ने उस वक्त गोली मार दी थी जब वह अपनी कार पर सवार थे।
इस घटना ने अतीत में शुभेंदु अधिकारी के एक अन्य पीए की 2013 और एक बॉडीगार्ड की 2018 में संदिग्थ हालात में हुई मौत की घटनाओं की याद दिला दी है।
विधानसभा चुनावों के नतीजे आने के बाद से बंगाल में हिंसा जारी है। शुभेंदु अधिकारी सहित समूची भाजपा इसे गहरी साजिश बता रही है, तो तृणमूल कांग्रेस ने इस हत्या की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
चंद्रनाथ रथ की हत्या के बाद मीडिया रिपोर्ट्स से पता चल रहा है कि 13 साल पहले 3 अगस्त, 2013 को शुभेंदु अधिकारी के एक अन्य पीए प्रदीप झा कोलकाता के स्ट्रैंग रोड पर फुटपाथ पर संदिग्ध हालात में मृत पाए गए थे।
उल्लेखनीय है कि 2013 में शुभेंदु अधिकारी तामलुक से तृणमूल कांग्रेस के सांसद थे और उन्हें ममता बनर्जी का बेहद करीबी माना जाता था।
टाइम्स ऑफ इंडिया की 2013 की एक रिपोर्ट के मुताबिक जब झा मृत पाए गए तब उनकी उम्र 42 वर्ष थी। वह बारासा के चरकडांगा के निवासी थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि 3 अगस्त, 2013 की सुबह कोलकाता पुलिस के नियंत्रण कक्ष को सूचना मिली कि एक व्यक्ति सड़क पर बेहोश पड़ा है और जब वे मौके पर पहुंचे तो वहां झा मौजूद थे। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।
प्रदीप झा उस समय शुभेंदु अधिकारी के चुनाव संबंधी कार्यों में शामिल थे। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में तृणमूल कार्यकर्ता के हवाले से लिखा था कि प्रदीप झा शुभेंदु अधिकारी के कार्यालय और उनके “सांसद निधि खातों और अधिकारी के सभी राजनीतिक कार्यक्रमों” के प्रभारी थे।
चंद्रनाथ रथ और प्रदीप झा के अलावा शुभेंदू अधिकारी के एक अन्य करीबी सहयोगी और उनके बॉडीगार्ड रहे शुभ्रत चक्रबर्ती की 2018 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। बताया गया था कि उसने कथित तौर पर ईस्ट मिदनापुर जिले के पुलिस बैरक में अपनी सर्विस रिवाल्वर से खुद को गोली मार ली थी।
2018 में शुभ्रत चक्रबर्ती की मौत के समय भी शुभेंदु अधिकारी तृणमूल कांग्रेस में ही थे और ममता सरकार में प्रभावशाली मंत्री के रूप में काम कर रहे थे। उल्लेखनीय है कि शुभेंदु अधिकारी ने दिसंबर, 2020 में तृणमूल से इस्तीफा दे दिया था और भाजपा में शामिल हो गए थे।











