Sonam Wangchuk Released : लद्दाख के प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक को जोधपुर सेंट्रल जेल से रिहा कर दिया गया। केंद्र सरकार ने उनके खिलाफ लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) को तुरंत प्रभाव से हटा दिया। गृह मंत्रालय के अनुसार, सोनम ने हिरासत की निर्धारित अवधि का लगभग आधा हिस्सा पूरा कर लिया था।
दरअसल सोनम को 26 सितंबर 2025 को लेह में हुई हिंसा के बाद NSA के तहत हिरासत में लिया गया था। यह हिंसा लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए। सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
शनिवार सुबह करीब 10 बजे उनकी पत्नी गीतांजलि एंगमो जोधपुर जेल पहुंचीं। कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद दोपहर सवा एक बजे वे पत्नी के साथ निजी गाड़ी से जेल से निकले। घर पहुंचकर गीतांजलि ने सोशल मीडिया पर लिखा कि लंबे समय बाद उन्होंने बिना समय की सीमा के खुलकर बात की, जैसे जेल की 60 मिनट की मुलाकात की घड़ी से आजाद हो गए हों। परिवार के डॉक्टर की सलाह पर सोनम को हेल्थ चेकअप के लिए अस्पताल ले जाया जा रहा है, जहां उन्हें 36 घंटे मेडिकल निगरानी में रखा जाएगा।
गृह मंत्रालय ने कहा कि यह फैसला लद्दाख में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास बहाल करने के लिए लिया गया है। क्षेत्र में हड़ताल और विरोध प्रदर्शनों से छात्रों, नौकरी चाहने वालों, व्यापार, पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ रहा था। सरकार विभिन्न समुदायों और नेताओं से लगातार बातचीत कर रही है। हाई-पावर्ड कमिटी के जरिए क्षेत्र की चिंताओं को दूर करने की कोशिश जारी रहेगी।
यह फैसला सुप्रीम कोर्ट में सोनम की पत्नी की याचिका पर 17 मार्च को होने वाली सुनवाई से ठीक दो दिन पहले आया। कोर्ट वीडियो और फोटो देखने वाली थी, जिनके आधार पर NSA लगाया गया था।
पिछले 5 महीने में यह केस 24 बार कोर्ट में लिस्ट किया गया, जबकि पिछले एक महीने में केंद्र सरकार के अनुरोध पर दो बार सुनवाई टाली गई। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के दस्तावेज पर असंतोष जताते हुए सही ट्रांसक्रिप्ट की मांग की। कोर्ट ने कहा कि अनुवाद की सटीकता सुनिश्चित करने की आवश्यकता है। इस विवाद के चलते सुनवाई के तारीखों में बार-बार बदलाव हुआ।
सोनम वांगचुक का जन्म 1966 में लद्दाख के अल्ची गांव में हुआ। 9 साल की उम्र तक स्कूल नहीं गए, मां ने घर पर पढ़ाया। बाद में श्रीनगर और दिल्ली में पढ़ाई की, NIT श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की।1988 में उन्होंने SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) शुरू किया, जिसका मकसद लद्दाख के सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारना था। ‘ऑपरेशन न्यू होप’ के तहत लोकल किताबें, टीचर ट्रेनिंग और गांव स्तर पर समितियां बनाई गईं। वे पर्यावरण संरक्षण और लद्दाख की जलवायु चुनौतियों के खिलाफ भी सक्रिय रहे हैं।
रिहाई के बाद सोनम ने X पर लिखा कि वे एक्टिविज्म से दूर नहीं हुए हैं। लद्दाख के लिए ईमानदार संवाद जरूरी है और उनकी प्रतिबद्धता पहले जैसी है। यह फैसला लद्दाख के लोगों और समर्थकों के लिए बड़ी राहत है। अब देखना है कि आगे बातचीत से क्षेत्र की मांगें कैसे पूरी होती हैं।
रिहाई के बाद कांग्रेस X पर लिखा “सोनम वांगचुक जी की गिरफ्तारी पहले दिन से ही गलत थी और मोदी सरकार साजिशन ऐसा कर रही थी, क्योंकि वे लद्दाख से किए वादों की याद दिला रहे थे।””कायर सरकार ने लद्दाख की जनता की आवाज को सलाखों के पीछे डाल दिया, लेकिन अब यू-टर्न से फर्जी गिरफ्तारी साबित हुई।””नरेंद्र मोदी को इस कायराना फैसले के लिए सोनम वांगचुक जी और लद्दाख की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”











