रायगढ़ से अंक पांडे की रिपोर्ट
रायगढ़ रेलवे सुरक्षा बल (RPF) पोस्ट में बुधवार तड़के एक सनसनीखेज वारदात सामने आई है, जहां एक राजनीतिक बहस इतना बढ़ गया कि एक प्रधान आरक्षक ने अपने ही साथी प्रधान आरक्षक को चार गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया। इस घटना से पूरे पुलिस और सुरक्षा तंत्र में हड़कंप मच गया है।
सुबह करीब 4 बजे RPF पोस्ट के भीतर अचानक गोलियों की आवाज सुनाई दी। GRP जवानों ने पहले इसे पटाखे की आवाज समझकर ध्यान नहीं दिया, लेकिन कुछ ही देर में एक जवान दौड़ते हुए आया और बताया कि प्रधान आरक्षक लदेर ने प्रधान आरक्षक पीके मिश्रा को गोली मार दी है।
तुरंत ही RPF और GRP के अधिकारी मौके पर पहुंचे, पोस्ट को सील कर दिया और हथियार समेत सभी दस्तावेज़ जब्त कर लिए गए। मृतक के शव को पोस्ट से बाहर निकालकर अस्पताल ले जाया गया।
बहस से हत्या तक
RPF सूत्रों के अनुसार, घटना के समय पोस्ट में केवल दो ही कर्मचारी मौजूद थे— पीके मिश्रा और लदेर। दोनों के बीच संविधान, आरक्षण, डॉ. भीमराव अंबेडकर और मौजूदा राजनीति पर चर्चा शुरू हुई, जो आगे चलकर बहस में बदल गई।
बताया जाता है कि अचानक आरोपी लदेर ने पोस्ट में रखी 9 MM सर्विस पिस्टल उठाई और कुर्सी पर बैठे मिश्रा पर करीब से लगातार चार गोलियां दाग दीं।
प्रत्यक्ष जानकारी के अनुसार, पहली गोली कनपटी में लगी। दूसरी गोली नाक के पास हड्डियों को चीरते हुए निकल गई। मौके पर ही पीके मिश्रा की मौत हो गई। हमला इतना तेज और अचानक था कि मृतक को बचने का मौका तक नहीं मिला।
कौन हैं मृतक और आरोपी
मृतक प्रधान आरक्षक पीके मिश्रा मूलत: मध्यप्रदेश के रीवा के रहने वाले हैं। उनका एक बेटा हैदराबाद में रहता है। वहीं, आरोपी प्रधान आरक्षक लदेर छत्तीसगढ़ के ही जांजगीर–चांपा का है। आरोपी प्रधान आरक्षक का परिवार जांजगीर के छत्तीसगढ़ परिवार भाटापारा मोहल्ला में रहता है। उसके तीन बच्चे हैं। दोनों ही RPF के 2001 बैच से हैं।
RPF सूत्रों के अनुसार दोनों के बीच कभी किसी प्रकार का विवाद नहीं दिखा, बल्कि उनके संबंध हमेशा मित्रवत रहे थे।
घटना के बाद आरोपी को हिरासत में ले लिया गया है और पूछताछ जारी है। GRP तथा RPF के वरिष्ठ अधिकारी जांच में जुटे हैं।
मृतक के परिजनों के रायगढ़ पहुंचने के बाद पोस्टमार्टम कराया जाएगा। इस बीच GRP एसपी रायगढ़ के लिए रवाना हो चुकी हैं, जिनके आने के बाद जांच में और तथ्य सामने आ सकते हैं।
यह घटना एक गंभीर सवाल छोड़ जाती है कि क्या राजनीतिक बहस इतनी खतरनाक और हिंसक हो सकती है कि एक साथी दुसरे की जान ले ले? जांच टीम इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि आरोपी मानसिक तनाव में था या फिर इस वारदात के पीछे कोई छिपा कारण है?
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