रायपुर। नीट काउंसलिंग (NEET) में सीट अलॉटमेंट से पहले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का गहन पुनरीक्षण किए जाने की मांग उठी है। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) ने राज्य सरकार से विशेष रूप से छत्तीसगढ़ स्टेट कोटा की सीटों के लिए जाति प्रमाणपत्र, क्रीमी लेयर से संबंधित दस्तावेज और मूलनिवासी प्रमाणपत्रों की सघन जांच कराने की मांग की है।
SFI के रायपुर जिलाध्यक्ष गर्व गभने ने कहा कि छत्तीसगढ़ में कथित फर्जी जाति प्रमाणपत्र, फर्जी निवास प्रमाणपत्र और NRI कोटा से जुड़े अनियमितताओं के मामले सामने आते रहे हैं। ऐसे में सीटों के आवंटन से पहले दस्तावेजों की पूरी तरह जांच जरूरी है।
दूसरे राज्यों से पढ़ाई, छत्तीसगढ़ का मूलनिवासी प्रमाणपत्र?
SFI के जिलासचिव हर्ष संघाणी ने दावा किया है कि छत्तीसगढ़ में मूलनिवासी प्रमाणपत्र के लिए निर्धारित शैक्षणिक दस्तावेजों को लेकर भी जांच की जरूरत है। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थी हैं, जिनकी 10वीं और 12वीं की अंकसूची दूसरे राज्यों की है, लेकिन उनके पास छत्तीसगढ़ का मूलनिवासी प्रमाणपत्र मौजूद है।
संगठन ने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में दस्तावेजों की सत्यता की गहन जांच किए बिना यदि स्टेट कोटा की सीटें आवंटित की जाती हैं, तो छत्तीसगढ़ में पढ़ने वाले स्थानीय विद्यार्थियों के हित प्रभावित हो सकते हैं।
स्टेट कोटा में स्थानीय छात्रों को प्राथमिकता देने की मांग
SFI की उपाध्यक्ष अल्पिका कन्नौजे ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ स्टेट कोटा की मेडिकल सीटों के आवंटन में पात्रता और निवास संबंधी सभी दस्तावेजों का संबंधित विभागों से सत्यापन कराया जाए। संगठन ने यह भी मांग की है कि छत्तीसगढ़ के स्कूलों से 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पूरी करने वाले पात्र विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता दी जाए।
अल्पिका कन्नौजे ने कहा कि स्टेट कोटा की सीटें छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसलिए काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी अपात्र अभ्यर्थी को गलत दस्तावेजों के आधार पर सीट नहीं मिलनी चाहिए।
संगठन ने राज्य सरकार से मांग की है कि नीट काउंसलिंग के दौरान दस्तावेजों का सख्ती से पुनरीक्षण कराया जाए और पूरी ईमानदारी एवं पारदर्शिता के साथ सीटों का आवंटन किया जाए, ताकि छत्तीसगढ़ के पात्र छात्र-छात्राओं का हक सुरक्षित रह सके।










