नई दिल्ली। नोएडा में मजदूरों द्वारा पिछले दिनों किए गए प्रदर्शन के दौरान भड़की हिंसा के मामले (Noida violence case) में वरिष्ठ पत्रकार एवं ‘भगत सिंह और उनके साथियों के दस्तावेज़’ के संपादक सत्यम वर्मा को नोएडा पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। उन्हें कहां ले जाया गया है इसकी जानकारी नहीं मिल पाई है।
पूरे मामले के संबंध के बताया जाता है कि शुक्रवार को पुलिस के रूप में पहचाने जाने वाले पुलिसकर्मियों के एक दल ने लखनऊ के जनचेतना बुकस्टोर पर छापा मारा और वहां मौजूद प्रख्यात कवयित्री कात्यायनी लखनऊ, जाने-माने पत्रकार और बुद्धिजीवी सत्यम वर्मा, कलाकार राम बाबू और कुछ अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया।
पुलिसकर्मियों का यह दल इन वरिष्ठ बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं पर नोएडा मजदूर आंदोलन के दौरान हिंसा भड़काने का आरोप लगा रहा है, जबकि वे सभी इस पूरी अवधि के दौरान न तो नोएडा के आसपास थे और न ही पुलिस द्वारा आरोपी ठहराए गए लोगों से उनका कोई संपर्क था।
जनचेतना का कहना है कि पुलिसकर्मियों के इस दल ने स्टोर से कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव, मोबाइल फोन और कुछ दस्तावेज़ जब्त कर लिए। उन्होंने कुछ किताबें भी जब्त कीं। इसके बाद, वहां मौजूद लोगों को इस दल ने घंटों तक हिरासत में रखा और उन्हें कुछ खाने या आवश्यक दवा लेने का मौका तक नहीं दिया।
गौरतलब है कि कात्यायनी और सत्यम दोनों मधुमेह और थायरॉइड के मरीज हैं। इसके बाद, कात्यायनी और उनके अन्य साथियों को जनचेतना में ही हिरासत में रखने के बाद, कथित पुलिसकर्मियों के इस समूह के कुछ लोग रात करीब 8 बजे सत्यम को एक कार में बिठाकर ले गए, जिसके बाद तीन घंटे तक उनका कोई पता नहीं चला।
इस दौरान सत्यम के कमरे की तलाशी शुरू कर दी। उन्होंने सत्यम की कुछ डायरी और नोटबुक जब्त कर लीं और उन्हें वहां से ले गए। जब कात्यायनी ने पूछा कि वे सत्यम को कहां ले जा रहे हैं, तो उन्होंने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया और जबरदस्ती सत्यम को अपने साथ ले गए। सत्यम वर्मा का अब तक पता नहीं चला है।
मजदूरों के हक में खड़े पत्रकारों, संस्कृतकर्मियों , कवियों पर नोएडा की घटना के बाद लगातार कार्रवाई हो रही हैं। इसके पहले बीएचयू से दिशा के छात्र तनुज को गिरफ्तार कर लिया गया था









