नई दिल्ली। सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद भारत चेनाब नदी पर जलविद्युत परियोजनाओं में तेजी ला रहा है। अब केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में चेनाब नदी पर 1,856 मेगावाट की सावलकोट जलविद्युत परियोजना Sawalkot Project को मंजूरी दे दी है। नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) ने 5 फरवरी को इस परियोजना के लिए कंपनियों से बोलियां (टेंडर) मांगी हैं। यह परियोजना सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद पहली नई बड़ी परियोजना है, जो ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक महत्व की है।
परियोजना की मुख्य बातें
सावलकोट परियोजना रामबन, रियासी और उधमपुर जिलों में चेनाब नदी पर बन रही है। यह 1984 में शुरू हुई थी, लेकिन कई सालों से अटकी हुई थी। अब इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा।
कुल क्षमता: 1,856 मेगावाट बिजली उत्पादन (पहला चरण: 1,406 MW, दूसरा चरण: 450 MW)।
मुख्य संरचना: 192.5 मीटर ऊंचा कंक्रीट बांध, भूमिगत पावर हाउस, जलमार्ग और पानी वापस लौटाने की व्यवस्था।
अनुमानित लागत: 31,380 करोड़ रुपये (कुछ पैकेज के लिए 5,129 करोड़ रुपये की बोलियां जारी)।
पूरा होने का समय: 9 साल (108 महीने)।
परियोजना को तेजी से पूरा करने के लिए निर्माण पद्धति और उपकरणों का चयन किया गया है। दस्तावेजों में कहा गया है कि क्षेत्र में काम के लिए साल भर 12 महीने उपलब्ध होंगे लेकिन मानसून में सतही काम 50% तक सीमित रहेंगे।
पर्यावरण पर असर: 2.22 लाख से ज्यादा पेड़ कटेंगे
परियोजना के लिए 847.17 हेक्टेयर वन भूमि का इस्तेमाल होगा। इसमें 2,22,000 से ज्यादा पेड़ काटने पड़ेंगे जिनमें से 1.26 लाख पेड़ सिर्फ रामबन जिले में हैं। पिछले साल अक्टूबर में पर्यावरण मंत्रालय की विशेषज्ञ समिति ने पर्यावरणीय मंजूरी दी थी। जून 2025 में वन सलाहकार समिति ने वन भूमि हस्तांतरण की सैद्धांतिक मंजूरी दी थी। पर्यावरणीय मंजूरी में कुछ शर्तें लगाई गई हैं, जैसे: ऑनलाइन इकोलॉजिकल फ्लो मॉनिटरिंग सिस्टम। प्रभावित परिवारों को मुआवजा। 5 साल बाद स्वतंत्र एजेंसी से प्रभाव का अध्ययन। मुआवजा वनरोपण 2,115 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में किया जाएगा। लेकिन इस परियोजना से रामबन जिले के 13 गांव और करीब 1,500 परिवार प्रभावित होंगे।
रणनीतिक महत्व और अन्य परियोजनाएं
सिंधु जल संधि रद्द होने के बाद भारत पश्चिमी नदियों (चेनाब सहित) पर अपना नियंत्रण मजबूत कर रहा है। सावलकोट चेनाब बेसिन की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक होगी। सरकार ने पाकल दुल और किरू परियोजनाओं को दिसंबर 2025 तक और क्वार परियोजना को मार्च 2028 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
पाकल दुल परियोजना (किश्तवार) चेनाब बेसिन की सबसे बड़ी है जिसका उद्घाटन 2018 में पीएम मोदी ने किया था। यह परियोजना न केवल बिजली उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि रोजगार पैदा करेगी और भारत की ऊर्जा स्वतंत्रता को मजबूत करेगी। हालांकि बड़े पैमाने पर पेड़ कटने और पारिस्थितिकी पर असर की निगरानी जरूरी है।





