नई दिल्ली। अरावली पर्वतमाला को लेकर राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर इस मुद्दे पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि सरकार अरावली की नई परिभाषा को क्यों आगे बढ़ा रही है, जबकि यह पर्यावरण के लिए खतरनाक साबित हो सकती है।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अरावली की इस नई परिभाषा का भारतीय वन सर्वेक्षण (एफएसआई), सुप्रीम कोर्ट की सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) और एमिकस क्यूरी ने विरोध किया है। फिर भी सरकार इसे लागू करने पर अड़ी हुई है। पार्टी का आरोप है कि विशेषज्ञों की राय को अनदेखा कर यह कदम उठाया जा रहा है, जो पारिस्थितिकी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

कांग्रेस ने सवाल उठाया कि अरावली को दोबारा परिभाषित करने का उद्देश्य क्या है और यह बदलाव किसके फायदे में है। पार्टी का मानना है कि अरावली भारत की अनमोल प्राकृतिक संपदा हैं। इनके संरक्षण से कोई समझौता देश के पर्यावरण और भविष्य के साथ छेड़छाड़ होगा।
केंद्र सरकार का पक्ष
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि अरावली पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लेकर गलत सूचनाएं फैलाई जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखला के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और पर्यावरण व विकास को संतुलित रखने की नीति पर चल रही है। मंत्री ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली, गुजरात, राजस्थान और हरियाणा में फैली अरावली का संरक्षण वैज्ञानिक आधार पर होना चाहिए।
सरकार का दावा है कि नई परिभाषा के तहत कुल क्षेत्र का 90 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा संरक्षित रहेगा और खनन पर कोई ढील नहीं दी जा रही है। नए खनन पट्टे जारी नहीं किए जाएंगे, जब तक स्थायी खनन योजना तैयार नहीं हो जाती।
राजस्थान में प्रदर्शन
राजस्थान में अरावली विवाद तेजी से बढ़ रहा है। यह मुद्दा अब हरियाणा और दिल्ली तक फैल गया है। उदयपुर, सिरोही जैसे जिलों में स्थानीय लोग अवैध खनन और निर्माण गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अरावली के जंगल और पहाड़ियां जल स्रोतों और मिट्टी संरक्षण के लिए जरूरी हैं। लोग सोशल मीडिया पर #AravaliProtection हैशटैग से अभियान चला रहे हैं। प्रशासन ने अवैध गतिविधियों पर कार्रवाई की है और सभी पक्षों से सहयोग मांगा है।
माउंट आबू से ‘अरावली बचाओ’ आंदोलन की नई शुरुआत हो रही है। सामाजिक कार्यकर्ता निर्मल चौधरी के नेतृत्व में पैदल मार्च शुरू होगा, जो करीब 1000 किलोमीटर लंबा होगा। यह यात्रा अरावली के आसपास के गांवों से गुजरेगी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगी। मार्च अर्बुदा देवी मंदिर से शुरू होकर नक्की झील की आरती के बाद रवाना होगा। यह सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के विरोध में है।










