Rupee Crash: GDP बढ़ने पर सरकार ने थपथपाई पीठ, लेकिन रुपया औंधे मुंह गिरा, पहली बार 88 पार

August 29, 2025 10:19 PM
Rupee Crash

नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद भारतीय रुपये में ऐतिहासिक गिरावट देखी गई। डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया और पहली बार प्रति डॉलर 88 रुपये के रिकॉर्ड निचले स्तर को छू लिया। विशेषज्ञ भी इसके पीछे की वहज अमेरिकी टैरिफ को ही मान रहे हैं।

यह गिरवाट ऐसे समय में आई है जब केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के लिए सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के आंकड़े जारी किए हैं। जिसमें बताया गया है कि इस अवधि में अर्थव्यवस्था में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वहीं राजकोषीय घाटा बढ़कर 29.9 प्रतिशत हो गया है।

शुक्रवार को कारोबार के दौरान रुपये में डॉलर के मुकाबले लगभग 64 पैसे की कमी दर्ज की गई, जिससे यह 88.29 के निम्नतम स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, दोपहर 2:10 बजे तक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने हस्तक्षेप करते हुए डॉलर की बिक्री की, जिससे रुपया थोड़ा संभला और 88.12 पर कारोबार करने लगा। इससे पहले फरवरी 2025 में रुपया 87.95 के निचले स्तर पर था।

इस साल अब तक रुपया 3% कमजोर हो चुका है, जिसके चलते यह एशिया की सबसे खराब प्रदर्शन वाली मुद्रा बन गई है। साथ ही, चीनी युआन के मुकाबले भी रुपया रिकॉर्ड निम्न स्तर पर पहुंच गया।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाए जाने से भारत की आर्थिक वृद्धि और विदेशी व्यापार पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। इस टैरिफ के कारण भारत को कुल 50% टैरिफ का सामना करना पड़ रहा है।

अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि यदि यह टैरिफ एक वर्ष तक लागू रहा, तो भारत की जीडीपी वृद्धि दर में 0.6% से 0.8% की कमी आ सकती है। यह पहले से ही धीमी गति से बढ़ रही अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है। RBI ने चालू वित्त वर्ष (31 मार्च 2026 तक) के लिए 6.5% वृद्धि दर का अनुमान लगाया है।

यह भी देखें : GDP में 7.8 फीसदी का इजाफा, राजकोषीय घाटा बढ़कर 29.9%

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