आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनाव में आधी रात को दो घंटे में पड़ गए थे 17 लाख वोट!

April 5, 2026 3:08 PM
Rigging in Andhra Pradesh Assembly Election

नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली

आंध्र प्रदेश में 2024 में हुए विधानसभा चुनाव में आधी रात के बाद करीब 17 लाख वोट 6 सेकंड में डाले गए। दिल्ली में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2024 आंध्र प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर चौंकाने वाले दावे किए गए। गौरतलब है कि उक्त चुनाव में चंद्रबाबू नायडू की TDP के नेतृत्व वाले NDA को निर्णायक जनादेश मिला था और उसने 175 में से 164 सीटें जीती थीं।

परकाला प्रभाकर का गंभीर आरोप

अर्थशास्त्री परकाला प्रभाकर ने आरोप लगाते हुए कहा कि करीब 3,500 बूथों पर मतदान रात 2 बजे तक जारी रहा। उन्होंने दावा किया कि डेटा एक चिंताजनक तस्वीर पेश करता है। कुल वोटों का करीब 4.16 फीसदी रात 11:45 बजे से 2 बजे के बीच डाला गया। उन्होंने कहा कि शाम 8 बजे से रात 2 बजे तक करीब 52 लाख वोट दर्ज किए गए। आधी रात के बाद अकेले 17 लाख से ज्यादा वोट डाले गए। सबसे चौंकाने वाली बात यह थी कि आधी रात के बाद हर 20 सेकंड में एक वोट डाला जा रहा था।

आधी रात का गजब का खेल

प्रभाकर ने कहा, ‘EVM को रीसेट होने में 14 सेकंड लगते हैं, तो फिर 6 सेकंड में वोट कैसे डाले जा रहे थे? क्या कोई मतदाता इतने कम समय में अंदर आकर वोट डालकर बाहर निकल सकता है?’ उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि शाम 8 बजे के बाद “कुछ असामान्य” हुआ।

नायडू की हुई थी बड़ी जीत

इन चुनावों में चंद्रबाबू नायडू चौथी बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। TDP ने 135 सीटें जीतीं, BJP ने 8 और पवन कल्याण की जनसेना ने 21 सीटें हासिल कीं।मतदान समाप्त होने के बाद भी विपक्ष और विशेषज्ञों ने वोटर टर्नआउट डेटा पर सवाल उठाए थे।

मतदान के बाद 64 फीसदी का आंकड़ा अगले दिन हुआ 81 फीसदी

13 मई 2024 को शाम 5 बजे मतदान समाप्त होने के बाद आंध्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने मीडिया को बताया कि 68.04 फीसदी वोट पड़े। ECI ने शाम 8 बजे जारी बयान में टर्नआउट 68.12 फीसदी बताया। रात 11:45 बजे ECI ने इसे संशोधित कर 76.50 फीसदी कर दिया। चार दिन बाद जारी अंतिम टर्नआउट 81.79 फीसदी रहा।

प्रशांत बोले पारदर्शिता की कमी

प्रेस कॉन्फ्रेंस में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि हर बूथ पर डाले गए वोटों की संख्या वाली Form 17C को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

उन्होंने कहा कि वोटर लिस्ट मशीन-रीडेबल फॉर्मेट में नहीं दी गई, जिससे स्वतंत्र सत्यापन मुश्किल हो जाता है।भूषण ने कहा, “पारदर्शिता का विरोध गहरी संस्थागत समस्या का संकेत देता है। लोकतंत्र अंधेरे में नहीं चल सकता।” विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने VVPAT पर्चियों की अनिवार्य गिनती की मांग की।

उन्होंने मतदान के बाद कतार में खड़े मतदाताओं का सार्वजनिक रिकॉर्ड न होने और बूथ-लेवल डेटा का रीयल-टाइम एक्सेस न मिलने की भी बात कही। इनके अभाव में बड़े पैमाने पर हेराफेरी बिना नोटिस के हो सकती है।

पूर्व सीईसी ने फॉर्म 17सी की ऑडिट की करी मांग

इन चिंताओं का समर्थन करते हुए पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त एसवाई कुरैशी ने चुनाव रिकॉर्ड्स, जिसमें Form 17C और Form 20 शामिल हैं, का ऑडिट कराने की मांग की। Form 20 मतगणना के बाद रिटर्निंग अधिकारी द्वारा तैयार की जाने वाली अंतिम परिणाम शीट है।

कुरैशी ने कहा, ‘अगर Form 17C बूथ लेवल पर साइन और सील की जाती है, तो फिर एग्रीगेटेड डेटा में बाद में विसंगतियां क्यों आती हैं?’

उन्होंने सुझाव दिया कि मतदान प्रतिशत का उसी दिन खुलासा किया जाए और बूथ-लेवल सारांश तुरंत जारी किए जाएं।

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