नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी (Rahul Gandhi) शुक्रवार दोपहर से दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि जब तक पैलेट गन से घायल छात्र साहिल लोहबच की FIR दर्ज नहीं होती, वे वहां से नहीं हटेंगे। राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी, अधीर रंजन चौधरी, सलमान खुर्शीद और जयराम रमेश भी मौजूद हैं।
राहुल गांधी ने थाने के बाहर साहिल के शरीर से निकले छर्रे दिखाए। उन्होंने कहा कि ये छर्रे इस बात का सबूत हैं कि पैलेट गन चलाई गई। साहिल के शरीर में 200 से ज्यादा छर्रे हैं, जिनमें से तीन आंख में हैं। एम्स की रिपोर्ट के अनुसार एक आंख की रोशनी जाने की आशंका बहुत अधिक है। राहुल ने पूछा कि अगर पुलिस ने गन नहीं चलाई तो फिर किसने चलाई।
कांग्रेस का आरोप है कि 14 अगस्त को लिखित शिकायत दी गई थी, लेकिन उसकी कॉपी तक नहीं दी गई। 17 अगस्त को ईमेल और फोन से भी कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। जयराम रमेश ने कहा कि FIR नंबर और जांच अधिकारी का नाम दिए जाने तक धरना जारी रहेगा।
दिल्ली पुलिस के सूत्रों का कहना है कि शिकायत पीड़ित ने खुद दी है। 20 जुलाई की घटना से जुड़े सभी मामलों की जांच पहले से क्राइम ब्रांच कर रही है। शिकायत को भी क्राइम ब्रांच को भेज दिया जाएगा। पुलिस का रुख है कि नई FIR की जरूरत नहीं है क्योंकि जांच पहले से चल रही है।
बीजेपी ने राहुल गांधी के धरने की आलोचना की है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि यह प्रदर्शन छात्रों या न्याय के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक हताशा और मीडिया का ध्यान खींचने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने याद दिलाया कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही इस मामले में पांच सदस्यीय उच्चाधिकार प्राप्त समिति बना चुका है।
स्मृति ईरानी ने सवाल किया कि राहुल गांधी पुलिस पर हमले के मामलों में क्यों नहीं बोलते। रविशंकर प्रसाद ने धरने को वंदे मातरम मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि जब जांच चल रही है तो थाने के बाहर प्रदर्शन की जरूरत नहीं थी।
19 वर्षीय साहिल लोहबच दक्षिण-पश्चिम दिल्ली के नजफगढ़ का रहने वाला है और दिल्ली विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग का छात्र है। 20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान वह घायल हुआ था। परिवार के अनुसार डॉक्टरों ने एक आंख की रोशनी लौटने की संभावना मात्र एक प्रतिशत बताई है।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले की जांच के लिए पूर्व जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की है। समिति में पूर्व हाईकोर्ट जज, पूर्व सीबीआई डायरेक्टर और सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
पुलिस का पक्ष है कि 20 जुलाई का संसद मार्च बिना अनुमति का था। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से झड़प की, जिसके बाद बल प्रयोग करना पड़ा। पुलिस ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से इनकार किया है।
गौरतलब है कि भारत में पैलेट गन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं है। गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार इसे अंतिम विकल्प के रूप में हिंसक भीड़ को काबू करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके इस्तेमाल के लिए मानक प्रक्रिया और प्रशिक्षण का प्रावधान है।
धरने के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। राहुल गांधी ने साफ कहा कि FIR दर्ज होने और जांच अधिकारी का नाम बताए जाने तक वे थाने के बाहर बने रहेंगे। मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर गरमाया हुआ है।







