नई दिल्ली। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान लोकसभा में 3 फरवरी मंगलवार को भी गतिरोध जारी रहा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चीन की घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से उठाना चाहा, लेकिन सत्ता पक्ष की आपत्तियों और हंगामे के बाद सदन स्थगित कर दिया गया। विपक्षी इंडिया गठबंधन इस मुद्दे पर पूरी तरह एकजुट नजर आया, जिसमें कांग्रेस से लेकर समाजवादी पार्टी तक ने राहुल गांधी का समर्थन किया।
नेता विपक्ष राहुल गांधी को स्पीकर कृष्णा प्रसाद तेन्नेटी ने बोलने का मौका दिया। राहुल गांधी राष्ट्रीय सुरक्षा और चीनी घुसपैठ पर जैसे ही बोलना शुरू किया सत्ता पक्ष की ओर से आपत्ति दर्ज कराई गई। बार कहने के बाद भी राहुल गांधी अपनी बात पर अड़े रहे।
स्पीकर ने विपक्ष के सांसद नरेश उत्तम पटेल और शताब्दी राय को बोलने का मौका दिया, लेकिन इन दोनों ने भी सदन में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से मना कर दिया। जिसके बाद सत्ता पक्ष से जीएम हरिश बालयोगी को बोलने के लिए स्पीकर ने बुलाया, उन्होंने बोलना शुरू किया लेकिन विपक्ष खासकर इंडिया गठबंधन की ओर हंगामा होता रहा, जिसके बाद सदन की कार्रवाई तीन बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।
इससे पहले 2 फरवरी यानी सोमवार को भी लोकसभा में राहुल गांधी ने पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरावणे (रिटायर्ड) की अप्रकाशित पुस्तक “Four Stars of Destiny” के अंशों का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि 2020 में चीन की सेना ने टैंकों के साथ भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी और सरकार इस पर पारदर्शिता नहीं बरत रही।
सत्ता पक्ष ने तुरंत आपत्ति जताई, कहा कि अप्रकाशित किताब या पत्रिका के अंश सदन में उद्धृत नहीं किए जा सकते (नियम 349 के तहत)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने इसे “गुमराह करने वाला” बताया।
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने तुरंत खड़े होकर राहुल गांधी का समर्थन किया था। उन्होंने कहा, “चीन का मुद्दा बहुत संवेदनशील है। राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है, इसलिए नेता प्रतिपक्ष को बोलने दिया जाए।”
कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने वरिष्ठ मंत्रियों को उतारकर राहुल को चुप कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी ने सरकार की अक्षमता उजागर की, इसलिए हंगामा किया गया।” कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह ने कहा, “राहुल सही थे। चीन ने जमीन हथियाई है, सरकार जवाब नहीं दे रही। यह लोकतंत्र पर शर्मनाक अध्याय है।” बीएम संदीप ने जोड़ा, “राष्ट्रीय सुरक्षा पर सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है।”











