नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बुधवार को कहा कि उसके आंतरिक नोट्स, टिप्पणियां और अलग-अलग विचार उसके मानक निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा हैं और पिछले एक वर्ष में उसके अंतिम निर्णय सर्वसम्मत रहे हैं। यह बयान द इंडियन एक्सप्रेस की उस जांच रिपोर्ट के बाद आया जिसमें दावा किया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने चुनावी सूचियों से जुड़े प्रमुख कदमों पर बार-बार आपत्ति जताई थी।
एक प्रेस नोट में ECI ने कहा, ‘मतदाता अधिकारों की रक्षा करने को लेकर अलग अलग मत आ सकते हैं। आयुक्तों द्वारा दिए गए सुझाव चुनावी प्रक्रियाओं को और बेहतर बनाने के लिए थे।’ आयोग ने यह भी कहा कि सभी आधिकारिक आदेश, निर्णय और प्रशासनिक निर्देश कानूनी मंजूरी के साथ जारी किए गए और मुख्य चुनाव आयुक्त तथा अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम, 2023 के तहत स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

अलग-अलग विचार विचार-विमर्श का हिस्सा
ECI ने कहा कि अलग-अलग विचार और टिप्पणियां अंतिम निर्णय लेने से पहले विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं।
‘ न केवल तीन आयुक्त, बल्कि आयोग का प्रत्येक अधिकारी चुनावी प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए आयोग को अपने सुझाव देने के लिए पूरी तरह अधिकृत है,’ आयोग ने कहा।
यह बयान द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के बाद आया जिसमें बुधवार को दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर मतदाता पंजीकरण, नामों को हटाने और बहाल करने तथा चुनावी सूची प्रणालियों के प्रबंधन से जुड़े निर्णयों और आदेशों पर औपचारिक आपत्तियां दर्ज की थीं।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने नए मतदाताओं के नामांकन के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किए गए बदलावों पर भी सवाल उठाए थे। जोशी ने कथित तौर पर दर्ज किया था कि वैधानिक फॉर्म को निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 में संशोधन के बिना बदला नहीं जा सकता, जबकि संधू ने बाद में इस बदलाव को ‘अनधिकृत और अवैध’ बताया था।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि आयुक्तों ने चुनावी सूची डेटाबेस तक पहुंच के बढ़ते केंद्रीकरण और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों की शक्तियों पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई थी ।
पिछले एक वर्ष के निर्णय सर्वसम्मत
विशिष्ट आंतरिक टिप्पणियों को उजागर करने वाली रिपोर्टों का जवाब देते हुए ECI ने कहा कि 10 महीने की अवधि में फैले नोट्स पर ध्यान केंद्रित करना और अनुमोदनों, निर्णयों तथा पहलों के बड़े हिस्से को नजरअंदाज करना केवल “तस्वीर का एक हिस्सा” पेश करता है। ECI ने कहा कि उसने अनेक निर्णय लिए, निर्देश जारी किए, लगभग 40 पहलें शुरू कीं और चुनावी सुधार किए, जिनमें चुनावी सूची संशोधन और देशभर में विशेष गहन संशोधन (SIR) शामिल हैं।
‘ये सभी निर्णय पिछले एक वर्ष में पूर्ण आयोग के सर्वसम्मत निर्णयों का परिणाम हैं,’ ECI ने कहा। आयोग ने यह भी बताया कि उसने हाल ही में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में चुनाव कराए तथा चुनाव संबंधी अभ्यास किए, जिनमें कई प्रशासनिक और परिचालन अनुमोदनों की आवश्यकता थी।
डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुरक्षा का बचाव
ECI ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म, जिसमें ECINet शामिल है, को नियंत्रित करने वाले सुरक्षा ढांचे का भी बचाव किया।
आयोग ने कहा कि ये प्लेटफॉर्म अनधिकृत छेड़छाड़ या हेरफेर को रोकने के उद्देश्य से सख्त डेटा-सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत काम करते हैं, जबकि आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट नियंत्रण राष्ट्रीय डेटाबेस में इस्तेमाल किए जाने वाले मानक साइबर सुरक्षा उपाय हैं। ECI ने कहा कि निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी और जिला चुनाव अधिकारी कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने पर अपनी वैधानिक शक्तियों का प्रयोग करते रहेंगे।











