नई दिल्ली। वह 1993-94 का समय था, जब केंद्र में पी वी नरसिंह राव की सरकार थी। वहीं गुजरात में भी कांग्रेस के समर्थन से चिमन भाई पटेल मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे थे। यह बात सार्वजनिक तौर पर कम कही जाती है, लेकिन यह सच है कि कांग्रेस की सरकार ने 1993-94 में गुजरात के Mundra Port के लिए अडानी को मात्र 10 पैसे प्रति वर्ग मीटर के रेट में जमीन सौंप दी।
1998 में गुजरात अडानी पोर्ट लिमिटेड का गठन हुआ और अक्टूबर 1998 में पहला जहाज MT Alpha-2 ने मुंद्रा पोर्ट पर लंगर डाला। 2001 में नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने से ठीक पहले मुंद्रा पोर्ट के विकास, रखरखाव के लिए गुजरात सरकार और अडानी के बीच एग्रीमेंट हुआ और सरकार ने इसे SEZ का दर्जा दे दिया। फिर जैसे ही सात महीने बाद नरेंद्र मोदी मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे मुंद्रा पोर्ट के भाग्य खुल गए।
अडानी ग्रुप ने मुंद्रा को भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट बना दिया। राज्य की भूमि, समुद्र और इंफ्रास्ट्रक्चर एक निजी कंपनी को सौंप दिया गया। भाजपा शासन में पोर्ट का विस्तार हुआ, लेकिन मूल जमीन कांग्रेस काल में दी गई थी। मोदी और अडानी की दोस्ती रंग लाई और इस पोर्ट को राष्ट्रीय संपत्ति जैसा बना दिया गया था, जिसका लाभ सरकार को मिलना चाहिए था, वह लाभ अडानी के खाते में जाने लगा।
7 देश, 23 बंदरगाह, 196 दिन और 1100 करोड़ की कोकीन

इसी गुरुवार को समुद्री मार्ग से मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ गुजरात एटीएस (ATS) और भारतीय तटरक्षक बल अपने संयुक्त अभियान के दौरान उस वक्त हैरान हैरान रह गए जब मुंद्रा बंदरगाह के बाहर लंगर डाले एक मालवाहक जहाज में मादर पदार्थों की बड़ी खेप मिली।
इस जहाज से 115 किलोग्राम कोकीन का एक बड़ा कन्साइनमेंट बरामद हुआ। इसकी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कीमत तकरीबन 11 सौ करोड़ रुपयों के आसपास बताई जा रही है। तस्करों ने यह कोकीन मालवाहक जहाज के मोटर रूम में छिपा रखा था।
‘एमवी यूरोप’ नाम का यह मालवाहक जहाज ब्राजील से रवाना होकर अर्जेंटीना, अमेरिका और पाकिस्तान समेत 7 देशों के 23 बंदरगाहों से गुजरते हुए 196 दिनों के सफर के बाद भारत पहुंचा था। हैरानी की बात यह है कि इस लंबी यात्रा के दौरान किसी भी देश की सुरक्षा एजेंसी को जहाज के मोटर रूम में छिपाई गई इस भारी-भरकम खेप की भनक तक नहीं लगी।
यह पहली घटना नहीं थी। इसी महीने नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मुंद्रा पोर्ट से 196 किलो कैप्टागन बरामद की थी। कुल 182 करोड़ रुपयों की यह दवा सीरिया से, ऊन के धागों में छिपाकर भेजी गई थी।
कुख्यात पोर्ट में तब्दील हो रहा मुंद्रा
दरअसल हाल के वर्षों में अडानी का यह पोर्ट ड्रग तस्करी, निषिद्ध सामानों, समुद्री अपराधों के साथ-साथ बेशुमार सरकार रियायतों का हॉटस्पॉट बन गया है।
इस बंदरगाह के समर्थन में दावा किया जाता है कि यह देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि यहां के कारोबार से अडानी को अरबों का फायदा पहुंचाया जा रहा है, जबकि ना केवल भारत बल्कि दुनिया भर की सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक कुख्यात पोर्ट में तब्दील हो गया है।
जब कभी ड्रग पकड़ा जाता है, तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान और ईरान से आने वाले जहाजों पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है, लेकिन फिर वही ढाक के तीन पात। अब जबकि तेल-गैस की किल्लत है, यहां पर गोल्डन क्रिसेंट से होकर आने वाले जहाजों का तांता लगा हुआ है।
इतिहास का सबसे बड़ा ड्रग का जखीरा हुआ था बरामद
मुंद्रा पोर्ट से तस्करी और समुद्री अपराध का नाता बेहद गहरा रहा है। भौगोलिक रूप से गोल्डन क्रेसेंट मार्ग यानि पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के नजदीक होने के कारण यह अंतरराष्ट्रीय ड्रग कार्टेल्स के निशाने पर रहा है।
साल 2021 में यहां से लगभग 3,000 किलोग्राम हेरोइन जब्त की गई थी, जिसे दुनिया की सबसे बड़ी हेरोइन बरामदगी में से एक माना जाता है। अगर इस पोर्ट के कमर्शियल पोर्ट बनने के बाद के इससे जुड़े आपराधिक इतिहास को देखें, तो हैरानी होती है।
यह भी साफ नजर आता है कि यहां पर तस्करी के मामले 2019 के बाद अचानक बहुत बढ़ गए। आंकड़े बताते हैं कि 2020-2024 के बीच देश के पोर्ट्स पर कुल 19 बड़े ड्रग केस पकड़े गए, जिनमें से आठ केस मुंद्रा के थे। कुछ बड़ी बरामदगी को देखें तो आँखे चौंधिया जाती हैं।
कब कब क्या क्या हुआ बरामद?
2021 (सितंबर 17-19): DRI यानि डिपार्टमेंट ऑफ़ रिवेन्यू इंटेलिजेंस ने दो कंटेनरों से 2,988 किलो हेरोइन जब्त की। एक कंटेनर में 1,999.58 किलो और दूसरे में 988.64 किलो हेरोइन था।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिसकी कीमत ₹21,000 करोड़ तक बताई गई। पता चला कि यह ड्रग अफगानिस्तान से ईरान होते हुए आया। एनआईए ने केस दर्ज कर लिया। आतंकी फंडिंग लिंक का आरोप भी लगाया गया।
कई अफगान और भारतीय आरोपी गिरफ्तार हुए। यह भारत ही नहीं दुनिया में हेरोइन जब्ती के गिने-चुने मामलों में से एक साबित हुआ।
2022 (मई): DRI ने मुंद्रा के पास कंटेनर से 56 किलो कोकीन जब्त की। जिसका मूल्य ₹500-550 करोड़ था ।यह कंटेनर दुबई से आया था।
2024 सितंबर : गुजरात स्थित मुंद्रा पोर्ट के कंटेनर फ्रेट स्टेशन से लगभग 94 लाख ट्रामाडोल (Tramadol) टैबलेट और इंजेक्शन की यह बड़ी खेप कस्टम्स (Customs) और डायरेक्टरेट ऑफ रेवेन्यू इंटेलिजेंस (DRI) द्वारा जुलाई से सितंबर 2024 के बीच कई चरणों में पकड़ी गई थी।
जिनकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत ₹150 करोड़ से भी अधिक थी। ये खेपें राजकोट स्थित एक निर्यातक द्वारा पश्चिमी अफ्रीकी देशों (सिएरा लियोन और नाइजर) में अवैध रूप से भेजी जा रही थी।
शिपिंग दस्तावेजों में इन्हें सामान्य दर्द निवारक दवाएं (जैसे डिक्लोफेनाक) घोषित किया गया था, लेकिन कंटेनर के अंदर अवैध ‘ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड 225mg’ जिसे ‘फाइटर ड्रग’ भी कहा जाता है छिपाकर रखा गया था।
अडानी की जवाबदेही से बचती है सरकार
सवाल खड़ा होता है कि गौतम अडानी के मुद्रा पोर्ट में ही इतनी घटनाएं क्यों घट रही हैं? दरअसल पोर्ट का विशाल आकार और प्राइवेट मैनेजमेंट जांच को मुश्किल बनाता है। DRI, ATS, NIA बार बार कन्साइनमेंट पकड़ती है, लेकिन अडानी पोर्ट अथॉरिटी से कोई जवाबदेही नहीं ली जाती।
इतने बड़े पोर्ट पर सुरक्षा फेल होने की वजहों को लेकर सरकार खामोश है। यह बात ख़ुद सरकार मानती है कि ड्रग के पैसे से आतंकवाद को बढ़ावा दिया जाता है, लेकिन फिर भी तस्करी को रोकने के लिए कोई कड़े उपाय नहीं किए जाते हैं। यह सच है कि अडानी को मुंद्रा से अरबों का फायदा मिलता है।
गुजरात सरकार 30 साल के पब्लिक प्प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को 75 साल तक बढ़ाने की कोशिश कर रही है, जो नियमों के मुताबिक 50 साल की सीमा से ज्यादा नहीं बढ़ाया जा सकता है।
अगर यह अनुबंध नहीं बढ़ाया गया तो अड़ानी को 2031 में यह पोर्ट सरकार को वापस करना पड़ेगा। जब तक अवधि पूरी नहीं हो जाती अदानी इस पोर्ट का प्रबंधन करता रहेगा।
CAG और PAC रिपोर्ट्स में गुजरात सरकार पर इस बंदरगाह को लेकर अनुचित फ़ायदा पहुंचाने का आरोप बार बार लगता है। मगर सरकार खामोश है।
भारत के सबसे बड़े पोर्ट पर सरकारी एजेंसियां बैन
मुंद्रा अब भारत का सबसे बड़ा कमर्शियल पोर्ट है। सालाना 150 मिलियन टन कार्गो, 7-8 मिलियन TEU कंटेनर यहां से गुजरते हैं । देश का 10 फ़ीसदी मैरीटाइम कार्गो यानी मालवाहक जहाज, 35 फीसदी कंटेनर ट्रैफिक यहीं से जाता है। यहां मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी मौजूद है।
प्राइवेट पोर्ट पर सुरक्षा एजेंसियों की पहुंच सीमित होने का आरोप बार-बार लगता है। समुद्री अपराध बढ़ने की एक बड़ी वजह यह है कि पहला जोर प्रॉफिट पर होता है सुरक्षा बाद में आती। अडानी पोर्ट्स पर पुलिस एंट्री बैन किए जाने के आरोप बार-बार लगते हैं। जब कभी बड़ी बरामदगी होती है सरकार खामोश हो जाती है।
यह भी पढ़ें: LPG सिलेंडर हुए महंगे! कमर्शियल गैस पर 42-53 रुपये का झटका, छोटू सिलेंडर के दाम भी बढ़े











