MP NEWS : मध्य प्रदेश के सतना जिले में थैलेसीमिया से पीड़ित पांच बच्चों को नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन के दौरान HIV संक्रमण हो गया। स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट में ब्लड बैंक की कई गंभीर कमियों का खुलासा हुआ है जिसमें एक्सपायर्ड ब्लड जारी करना, डोनरों के फर्जी रिकॉर्ड रखना और उचित टेस्टिंग न करना शामिल है। ये बच्चे (उम्र 3 से 15 वर्ष के बीच) सतना के सरदार वल्लभभाई पटेल जिला अस्पताल में हर महीने ब्लड चढ़वाते थे। संक्रमण मार्च-अप्रैल 2025 में पता चला लेकिन मामला दिसंबर 2025 में मीडिया रिपोर्ट्स के बाद सुर्खियों में आया। कुछ रिपोर्ट्स में प्रभावित बच्चों की संख्या छह बताई गई है।
जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे
मध्य प्रदेश स्वास्थ्य विभाग और पब्लिक हेल्थ डायरेक्टरेट की जांच में सामने आया कि ब्लड डोनरों के सही रिकॉर्ड नहीं रखे गए। डोनरों का पता, व्यवसाय और हीमोग्लोबिन स्तर संबंधी प्रश्नावली अधूरी पाई गईं। डोनरों का स्वास्थ्य जांच या हीमोग्लोबिन टेस्ट बिना किए ब्लड लिया गया लेकिन रिकॉर्ड में सभी डोनरों का हीमोग्लोबिन 12g/dl से ज्यादा दिखाया गया। काउंसलर की पोस्ट खाली होने के कारण डोनरों को कोई काउंसलिंग या स्क्रीनिंग नहीं की गई। रोजाना 40-50 डोनर आने वाले रूम में केवल एक व्यक्ति ड्यूटी पर रहता था और अनधिकृत लोगों के आने-जाने की शिकायतें मिलीं। मइहर सिविल अस्पताल से लिया गया ब्लड बिना सही प्रक्रिया के सतना के रिकॉर्ड में दर्ज करके जारी किया जाता था जो राष्ट्रीय दिशा-निर्देशों का उल्लंघन था।
टेस्टिंग में बड़ी अनियमितता
ट्रांसफ्यूजन से होने वाले संक्रमण (TTI) की जांच के लिए सभी ब्लड यूनिट्स को HIV, हेपेटाइटिस B, C, मलेरिया और सिफिलिस के लिए टेस्ट करना अनिवार्य है। उन्नत 4th Generation ELISA या CLIA टेस्ट का इस्तेमाल होना चाहिए था लेकिन जांच में पाया गया कि संक्रमित बच्चों को दिए गए 204 ब्लड यूनिट्स में से 35 यूनिट्स केवल सस्ते और कम संवेदनशील रैपिड कार्ड टेस्ट से जांचे गए। ब्लड बैंक प्रभारी ने इसके लिए CLIA रिएजेंट्स की अनुपलब्धता का हवाला दिया।
प्राइवेट ब्लड सेंटर की भूमिका
जांच एक प्राइवेट बिरला ब्लड सेंटर तक पहुंची, जिसका लाइसेंस अगस्त 2024 में ही समाप्त हो चुका था। यहां से एक्सपायर्ड ब्लड यूनिट्स जारी की गईं। एक थैलेसीमिया प्रभावित बच्ची को एक्सपायर्ड ब्लड दिया गया। कुछ बच्चों को इस सेंटर से 2020 और 2024 में भी ब्लड मिला था। HIV पॉजिटिव पाए गए डोनरों को ICTC सेंटर पर रेफर नहीं किया गया और कोई रिकॉर्ड भी नहीं रखा गया। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में 14 TTI-रिएक्टिव डोनर पाए गए लेकिन उनमें से केवल पांच का ही ART सेंटर में रिकॉर्ड था। बाकी नौ डोनर लापता हैं।
कार्रवाई और प्रतिक्रिया
प्रारंभिक जांच के आधार पर ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. देवेंद्र पटेल और दो लैब टेक्नीशियन राम भाई त्रिपाठी तथा नंदलाल पांडे को सस्पेंड कर दिया गया। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. मनोज शुक्ला को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का संज्ञान लिया और पूरे देश के राज्यों से ब्लड सेफ्टी पर रिपोर्ट मांगी है। स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने सख्त जांच के आदेश दिए थे। मइहर सिविल अस्पताल के प्रभारी ने बताया कि अब वे सतना को ब्लड सप्लाई नहीं कर रहे हैं।
थैलेसीमिया मरीजों के लिए खतरा
थैलेसीमिया एक आनुवंशिक रोग है जिसमें मरीजों को जीवनभर नियमित ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ती है। ऐसे में ब्लड बैंक की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना ब्लड बैंक व्यवस्था में गहरी खामियों को उजागर करती है। राज्य सरकार ने सभी ब्लड बैंकों की ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। प्रभावित बच्चों को HIV प्रोटोकॉल के तहत इलाज मुहैया कराया जा रहा है।









