ECI ज्ञानेश कुमार को ममता ने पहुंचाया कोर्ट, अधिकारियों के तबादले पर एक्‍शन में TMC

March 20, 2026 8:39 PM
mamata banerjee vs Election Commission

कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों की घोषणा के तुरंत बाद निर्वाचन आयोग द्वारा किए गए वरिष्ठ आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के तबादलों को चुनौती देते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। पार्टी के सांसद और वरिष्ठ वकील कल्यान बनर्जी ने यह याचिका दायर की है, जिसमें मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिका में राज्य सरकार से परामर्श न लिए जाने का आरोप लगाया गया है।

कल्यान बनर्जी ने मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के सामने मामले का उल्लेख किया और जल्द सुनवाई की मांग की। याचिका में दलील दी गई है कि निर्वाचन आयोग का चुनाव कराने का अधिकार तो है, लेकिन पूरे विभागों में बड़े पैमाने पर तबादले करने का अधिकार नहीं है, क्योंकि इससे प्रशासनिक कार्य व्यवधानग्रस्त होता है।

गौरतलब है कि 15 मार्च को विधानसभा चुनाव की तारीखों की घोषणा होते ही निर्वाचन आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, पुलिस महानिदेशक समेत दर्जनों वरिष्ठ अधिकारियों के तबादले कर दिए थे। ये तबादले रात में किए गए, जिसे मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘अघोषित आपातकाल’ करार दिया था। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि यह कदम राज्य सरकार से बिना चर्चा किए उठाया गया, जो संघीय ढांचे का उल्लंघन है।

पश्चिम बंगाल की 294 सीटों वाले विधानसभा चुनाव दो चरणों में होंगे। पहले चरण का मतदान 23 अप्रैल को और दूसरे चरण का 29 अप्रैल को होगा। मतों की गिनती 4 मई को की जाएगी। तृणमूल कांग्रेस चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश कर रही है, जबकि भाजपा मजबूत चुनौती दे रही है।

बीजेपी का क्या कहना है?

दिलीप घोष

भाजपा ने इस याचिका और तृणमूल कांग्रेस के विरोध पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने कहा, “ममता बनर्जी को निर्वाचन आयोग को सलाह देने या उस पर सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश का निर्वाचन आयोग पर भरोसा है, जिसने बिहार में सफल चुनाव कराए हैं और बंगाल में भी निष्पक्ष व शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करेगा। घोष ने तृणमूल सरकार पर पिछले 15 सालों में अधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि हर कोई जानता है कि उन्होंने कैसी सरकार चलाई। भाजपा का मानना है कि ये तबादले निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी थे और तृणमूल कांग्रेस का कोर्ट जाना लोकतंत्र की प्रक्रिया में बाधा डालने की कोशिश है।

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