रायपुर। छत्तीसगढ़ में मलेरिया जांच किट (Malaria Testing Kit) को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस पर पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि सरकार प्रदेश की जमीनी स्वास्थ्य व्यवस्था की वास्तविक स्थिति छिपा रही है।
डॉ. गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री कांकेर के आदिवासी छात्रावास में चार बच्चों और कबीरधाम जिले के बोड़ला ब्लॉक में मलेरिया से हुई तीन मौतों पर स्पष्ट जवाब देने से बचते रहे। उनका आरोप है कि सरकार इन घटनाओं की वास्तविक स्थिति बताने का नैतिक साहस नहीं दिखा रही।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान चलाए गए ‘मलेरिया मुक्त बस्तर अभियान’ के तहत मितानिनों, स्वास्थ्य कर्मियों, डॉक्टरों और नर्सों की घर-घर स्क्रीनिंग से प्रदेश में मलेरिया की पॉजिटिविटी दर एक प्रतिशत से भी कम हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार इस उपलब्धि को बनाए रखने में विफल रही है।
‘मलेरिया जांच किट ही नहीं, फिर जांच कैसे हो रही?’
डॉ. राकेश गुप्ता ने दावा किया कि 30 जुलाई तक छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन (CGMSC) में मलेरिया रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट (RDT) किट का स्टॉक शून्य है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जांच किट उपलब्ध ही नहीं है, तो मितानिन और मैदानी स्वास्थ्य कर्मचारी आखिर किस आधार पर मलेरिया की जांच कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्या बिना रैपिड टेस्ट किट के केवल ब्लड स्लाइड सैंपलिंग कराई जा रही है या फिर मैदानी स्तर पर स्क्रीनिंग पूरी तरह प्रभावित हो चुकी है।
‘स्वास्थ्य मंत्री जिम्मेदारी लें‘
डॉ. गुप्ता ने आरोप लगाया कि विभाग में कमीशनखोरी के कारण मेडिकेटेड मच्छरदानियों की खरीद और वितरण भी प्रभावित हुआ है, जिससे मलेरिया नियंत्रण अभियान कमजोर पड़ा है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को केवल प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के बजाय विभाग की वास्तविक स्थिति सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
कांग्रेस नेता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल को पद से हटाने की मांग करते हुए कहा कि यदि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में तत्काल सुधार नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में प्रदेश में मलेरिया की स्थिति और गंभीर हो सकती है।









