नई दिल्ली। बिहार, गुजरात और मध्य प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों के उपचुनावों के लिए आज शांतिपूर्ण (Voting) संपन्न हुआ। बिहार की बांकीपुर, गुजरात की मंजलपुर और मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीटों पर मत प्रतिशत पहले की तुलना में घटा है। बिहार और गुजरात में शाम पांच बजे तक 40 फीसदी से कम मतदान दर्ज किया गया।
चुनाव आयोग के अनुसार, बांकीपुर विधानसभा में 34 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ। बांकीपुर में कई चुनावों से कम मतदान हो रहा है।मंजलपुर में 37 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया, जबकि दतिया विधानसभा में 71 प्रतिशत से अधिक मतदान हुआ।
हाल दतिया विधानसभा का
दतिया उपचुनाव के मैदान में कई उम्मीदवार उतरे हैं। मगर सबसे अधिक चर्चा तीन उम्मीदवारों की है। बीजेपी ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की ओर घनश्याम सिंह उम्मीदवार हैं। वहीं, आजाद समाज पार्टी की ओर दामोदर यादव उम्मीदवार हैं। तीनों ने दतिया फतह करने के लिए वोटिंग से पहले जोर लगाया था।
दतिया में पिछली बार 80 फीसदी मतदान
2023 में हुए दतिया विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने 80.20 फीसदी वोट डाले थे। इसके बाद दतिया में परिवर्तन हो गया था और बीजेपी के कद्दावर नेता नरोत्तम मिश्रा चुनाव हार गए थे। उपचुनाव के हिसाब दतिया में इस बार भी वैसी ही वोटिंग हो रही है। पिछले चुनाव की तुलना में आंकड़ा कुछ कम हो सकता है। शाम पांच बजे तक 68.78 फीसदी वोटिंग हुई थी। वोटिंग का समय शाम छह बजे तक है। ऐसे में आंकड़ा 70 फीसदी के पार जा सकता है।
नरोत्तम का टिकट कटने से बदला हुआ है दतिया
वहीं, दतिया विधानसभा उपचुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में इस बार सीन बदला हुआ है। बीजेपी ने अपने धाकड़ नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काट दिया है। वहीं, कांग्रेस ने राजेंद्र भारती के परिवार को टिकट नहीं दिया। अन्य दावेदारों को दरकिनार कर पूर्व विधायक घनश्याम सिंह को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में दोनों दलों में भीतरघात की आशंका भी है।
बीजेपी ने किया डैमेज कंट्रोल
नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने जमकर उत्पात मचाया था। इसके बाद बीजेपी डैमेज कंट्रोल करने में जुटी। पार्टी नरोत्तम मिश्रा को मनाने में कामयाब रही और आशुतोष तिवारी के नामांकन में ले गई। लेकिन मंच पर नरोत्तम मिश्रा के आंसू निकल आए। सियासी गलियारों में चर्चा है कि नरोत्तम मिश्रा के आंसूओं की कीमत बीजेपी चुका सकती है। हालांकि नरोत्तम मिश्रा पार्टी उम्मीदवार आशुतोष तिवारी के लिए प्रचार करते रहे हैं। उनका दावा है कि बीजेपी की जीत होगी।
बांकीपुर बीजेपी का गढ़
बांकीपुर विधानसभा या इसके पहले पटना पश्चिम से जाने वाला यह क्षेत्र लगभग 45 वर्षों से बीजेपी का गढ़ साबित होता रहा है। तकरीबन पांच बार नितिन नवीन और इसके पहले चार बार इनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा चुनाव जीतते रहे हैं। इनकी जीत के पीछे सुशासन और विकास का नारा तो था ही पर साथ इसके एक जातीय समीकरण भी था।
राजद को एमवाई पर भरोसा
वर्ष 2025 में बांकीपुर विधानसभा का उपचुनावमें राजद एक बार फिर चुनावी चुनौती की राह पर उतरा है। वर्ष 2015 और 2020 के विधानसभा चुनाव में महागठबंधन की तरफ से कांग्रेस ने उम्मीदवार दिए थे। पर महागठबंधन इन तीनों विधानसभा चुनाव में कुल वोट पोल का औसतन 40 पर वोट ही हासिल कर सका।
पिछले तीन चुनावों में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव का वोट प्रतिशत भी काफी कम यानि 39 से 42 रहा। राजद अपने आधार MY के समीकरण के साथ वैश्य को उम्मीदवार बना कर जंग जीतने की रणनीति पर एक बार फिर एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
पीके को भरोसा नए प्रयोग पर
जनसुराज के नायक प्रशांत किशोर चुनावी रणनीतिकार रहे हैं। देश में तरह तरह के प्रयोग भी कर चुके। बांकीपुर विधानसभा में भी प्रशांत किशोर कुछ नया करने की उम्मीद पर चुनावी समर में उतरे हैं। प्रशांत किशोर बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत बिहार सरकार की असफलता को बता कर हासिल करना चाहते हैं।










