रायपुर। छत्तीसगढ़ में कक्षा 6वीं की परीक्षा के लिए जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय से तैयार किए गए हिंदी के प्रश्नपत्र को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रश्नपत्र में सिर्फ सवालों की पुनरावृत्ति ही नहीं, बल्कि प्रश्नों की संख्या और अंक विभाजन को लेकर भी विसंगति सामने आई है।
द लेंस के पास उपलब्ध प्रश्नपत्र के अनुसार, यह प्रश्नपत्र DEO कार्यालय से तैयार कर सभी स्कूलों को PDF के जरिए भेजा गया था। यानी प्रश्नपत्र में दिखाई दे रही विसंगतियां किसी एक स्कूल या शिक्षक द्वारा तैयार किए गए स्थानीय प्रश्नपत्र की नहीं, बल्कि सभी संबंधित स्कूलों में भेजे गए प्रश्नपत्र की हैं।
प्रश्नपत्र की सबसे ज्यादा चर्चा वाली गड़बड़ी मेजर ध्यानचंद (Major Dhyan Chand) से जुड़े सवाल को लेकर है। लघु उत्तरीय प्रश्न में प्रश्न क्रमांक 9 पूछा गया है कि ‘मेजर ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य है?’
यही सवाल दीर्घ उत्तरीय प्रश्न में प्रश्न क्रमांक 16 के रूप में दोबारा दिया गया है, ’मेजर ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य है?’
मामला सिर्फ दोहराने तक नहीं रुका। इसके बाद अतिदीर्घ उत्तरीय प्रश्न के विकल्प में भी लगभग यही सवाल मौजूद है, ’मेजर ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?’
यानी एक ही परीक्षा में एक ही विषय से जुड़ा लगभग समान सवाल लघु उत्तरीय, दीर्घ उत्तरीय और अतिदीर्घ उत्तरीय तीनों कैटेगरी में पहुंच गया।
परीक्षा में लघु, दीर्घ और अतिदीर्घ उत्तरीय प्रश्नों की अलग-अलग कैटेगरी का उद्देश्य विद्यार्थियों की समझ को अलग-अलग स्तर पर परखना होता है।
लेकिन यहां मेजर ध्यानचंद की सफलता के रहस्य वाला सवाल तीनों कैटेगरी में दिखाई दे रहा है।
इससे यह भी सवाल उठता है कि क्या प्रश्नपत्र का अंतिम प्रूफ चेक किया गया था या PDF सीधे स्कूलों को भेज दी गई?
प्रश्नों की संख्या और नंबर में भी उलटफेर
प्रश्नपत्र में लघु उत्तरीय प्रश्न के लिए अंक विभाजन 3×5=15 दिया गया है। इसका सीधा अर्थ है कि इस खंड में 3 अंक के 5 प्रश्न होने चाहिए थे। लेकिन प्रश्नपत्र में प्रश्न क्रमांक 8 से 13 तक कुल 6 प्रश्न दिखाई दे रहे हैं। यानी शीर्षक में 5 प्रश्नों के लिए 15 अंक निर्धारित हैं, जबकि प्रश्नपत्र में एक अतिरिक्त प्रश्न मौजूद है।
यह स्थिति विद्यार्थियों और परीक्षा लेने वाले शिक्षकों दोनों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर सकती है कि आखिर कितने प्रश्न हल करने हैं और मूल्यांकन किस आधार पर किया जाएगा।
इसी तरह दीर्घ उत्तरीय प्रश्न खंड में 4×4=16 लिखा है। इसका मतलब 4 अंक के 4 प्रश्न होने चाहिए थे। लेकिन प्रश्नपत्र में प्रश्न क्रमांक 14, 15 और 16—कुल तीन प्रश्न ही दिखाई देते हैं। यानी कि जहां अंक विभाजन चार प्रश्नों के हिसाब से किया गया है, वहां प्रश्नपत्र में तीन ही प्रश्न दिए गए हैं।
इससे प्रश्नपत्र के ब्लूप्रिंट, प्रश्नों की संख्या और अंक विभाजन के बीच तालमेल पर सवाल उठ रहा है।
सवाल यह कि PDF जारी होने से पहले जांच किसने की?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रश्नपत्र DEO कार्यालय से तैयार होकर PDF के रूप में स्कूलों को भेजा गया था।
ऐसे में सवाल किसी एक स्कूल के शिक्षक द्वारा प्रश्नपत्र तैयार करने का नहीं है। प्रश्नपत्र का अंतिम प्रारूप ही सभी स्कूलों को भेजा गया था। इसलिए प्रश्नपत्र जारी होने से पहले उसकी प्रश्नों की संख्या, अंक विभाजन, प्रश्नों की पुनरावृत्ति और पाठ्यक्रम के संतुलन के लिहाज से जांच की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।
प्रश्नपत्र में यदि 3 अंक के 5 प्रश्न निर्धारित हैं लेकिन 6 प्रश्न दिए गए हैं, तो विद्यार्थियों को यह स्पष्ट होना जरूरी है कि उन्हें कितने प्रश्न हल करने हैं। वहीं 4 अंक के 4 प्रश्न निर्धारित होने के बावजूद केवल 3 प्रश्न दिए जाने पर कुल अंक और प्रश्नों के बीच भी अंतर दिखाई देता है।










