नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
महाराष्ट्र सरकार ने सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े मुस्लिमों को दिए जाने वाले 5 फीसदी आरक्षण से जुड़ा पुराना फैसला रद्द कर दिया है। गौरतलब है कि साल 2014 में कांग्रेस एनसीपी की सरकार ने एक अध्यादेश के जरिए मुस्लिम समाज को विशेष पिछड़ा प्रवर्ग-ए (SBC-A) के तहत सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 5 फीसदी आरक्षण दिया गया था। इसके आधार पर जाति प्रमाणपत्र और जाति वैधता प्रमाणपत्र भी जारी किए जा रहे थे।
इस अध्यादेश को मुंबई हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी। जिसके बाद कोर्ट ने 4 नवंबर 2014 को हाईकोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। बाद में यह अध्यादेश स्वतः निरस्त हो गया। अब सरकार ने साफ किया है कि उस अध्यादेश के आधार पर जारी किए गए अब तक के सभी शासन निर्णय, दस्तावेज और परिपत्र भी रद्द माने जाएंगे।
75 विद्यालयों से अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा वापस
वहीं सोमवार को महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस ने उन 75 स्कूलों को दिए गए अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थान के दर्जे पर रोक लगाने का आदेश दिया है, जिनके बारे में खबरें थीं कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के तुरंत बाद इन विद्यालयों को मंजूरी दी गई थी। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री और अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार ने अधिकारियों को अल्पसंख्यक प्रमाण पत्र जारी करने में कथित अनियमितता की विस्तृत जांच करने और किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया।
अल्पसंख्यक विकास विभाग सुनेत्रा पवार के पास
अधिकारियों के अनुसार, 28 जनवरी से दो फरवरी के बीच 75 संस्थानों को अल्पसंख्यक दर्जा दिया गया। बताया जाता है कि पहला प्रमाण पत्र 28 जनवरी को दोपहर तीन बजकर नौ मिनट पर जारी किया गया था, उसी दिन अजित पवार की विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। उस दिन सात संस्थानों को स्वीकृति मिली और अगले तीन दिनों में यह संख्या बढ़कर 75 हो गई। उस समय अजित पवार अल्पसंख्यक विकास विभाग का कार्यभार संभाल रहे थे। यह विभाग अब सुनेत्रा पवार के अधीन है, जिन्होंने हाल ही में उपमुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली है.








