एलपीजी संकट: सवाल आत्मनिर्भरता का भी है 

March 14, 2026 10:16 PM
LPG crisis

सरकार बार-बार आश्वासन दे रही है कि देश में एलपीजी सिलेंडर की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सुचारू है। लेकिन गैस एजेंसियों के बाहर लंबी कतारें, पैनिक बुकिंग और कई राज्यों में डिलीवरी में देरी की खबरें बता रही हैं कि तस्वीर बिल्कुल अलग है। जनता सरकार के आश्वासन को मानने को तैयार नहीं है और सिलेंडर लिए सड़क पर खड़ी है। 

सिलेंडर संकट का ठीकरा अमेरिका-इजरायल-ईरान तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने पर फोड़ना आसान है, लेकिन असली जड़ें घरेलू नीतियों में छिपी हैं।

यहां एक बात गौर करने वाली है कि ईरान से भारत तक गैस पाइप लाइन की एक योजना करीब ढाई दशक पुरानी है, जो अभी तक बातचीत से आगे नहीं बढ़ पाई है।

दरअसल, ताजा संकट की नींव और भी ताजा है, जो प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के साथ पड़ी। योजना ने 10 करोड़ से अधिक नए उपभोक्ता जोड़े। 2014 में एलपीजी कनेक्शन 14.5 करोड़ थे, जो अब 33 करोड़ के पार पहुंच गए। ऐसे में दूरगामी नीति बनाने से सरकार चूक गई कि जब एलपीजी उपभोक्ता बढ़ेंगे तो उनके लिए घरेलू स्तर पर गैस उत्पादन बढ़ाना भी जनहित में होगा।

2024 में देश की कुल एलपीजी खपत रिकॉर्ड 31 मिलियन टन पर पहुंच गई, जो पिछले साल से 7 प्रतिशत ज्यादा थी। लेकिन घरेलू उत्पादन महज 12.8 मिलियन टन रहा। बाकी आयात होता रहा। इस दौरान करीब एक दशक में आयात भी 47 से बढ़कर 67 प्रतिशत हो गया।

देश की रिफाइनरियां पेट्रोल और डीजल पर फोकस करती हैं, इन्हें एलपीजी का ज्यादा उत्पादन करने के लिए डिजाइन ही नहीं किया गया। खपत बढ़ी, लेकिन घरेलू उत्पादन स्थिर रहा। और सबसे खतरनाक बात हमारा 90 प्रतिशत एलपीजी आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के संकरे रास्ते से आता है। और अमेरिका इजरायल पर ईरान के जवाबी हमलों के बाद यह मार्ग बंद हो गया।

कच्चे तेल और गैस के लिए खाड़ी देशों तक कोई पाइपलाइन नहीं, सब कुछ टैंकरों पर निर्भर है। जबकि चीन ने इसके उलट घरेलू स्तर पर एलपीजी उत्पादन बढ़ाया, इसलिए वह इस संकट से अछूता है।

यह स्थिति आत्मनिर्भर भारत के नारे पर भी सीधा सवालिया निशान है। उपभोक्ता दोगुने से ज्यादा हो गए, लेकिन हम एलपीजी का घरेलू उत्पादन क्यों नहीं बढ़ा पाए? रिफाइनरियों की क्षमता 258 मिलियन टन है, वे 100 प्रतिशत से ज्यादा चल रही हैं, फिर भी एलपीजी यील्ड नहीं बढ़ाया गया।

इस बीच मोदी सरकार के फौरी आदेश के तहत एलपीजी और पीएनजी उत्पादन को 25 प्रतिशत बढ़ाया गया और सारा घरेलू उपयोग के लिए मोड़ दिया गया। लेकिन यह अस्थायी उपाय है। लंबे समय तक आयात पर निर्भर रहना,  आत्मनिर्भरता नहीं, सिर्फ निर्भरता है।

समस्या सिर्फ संकटजनित नहीं , संरचना की है। जनता की आंखों में डर और लंबी कतारें हैं। नीति निर्माताओं के लिए यह संकट सीख भी है कि दावों से आगे बढ़कर जमीन पर स्थायी समाधान खोजें, ताकि भविष्य में किसी का चूल्हा ठंडा न पड़े।

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