विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ की एक और करतूत

CBSE

नीट के परचे लीक होने से उठा तूफान अभी थमा नहीं है और अब सीबीएसई की 12 वीं की परीक्षा को लेकर गंभीर गड़बड़ियां सामने आई है, जिसने समूचे शिक्षा तंत्र को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है।

हद तो यह है कि सब कुछ इतना बेलगाम हो चुका है कि जिन लोगों पर देश की शिक्षा तंत्र की जिम्मेदारी है, उनमें अपने किए का नैतिक बोझ उठाने का साहस भी नहीं बचा है। यह हाल उस देश का है, जहां प्रधानमंत्री परीक्षा से पहले बच्चों से चर्चा करते हैं और पूरे देश में उसका प्रसारण होता है और मीडिया में उसका खूब प्रचार किया जाता है।

दूसरी ओर हालत यह है कि 12 वीं के जिस बच्चे ने अपने साथ हुई गड़बड़ी का मामला उठाया, उसे देशद्रोही तक करार दिया गया!

वेदांत नामक इस होनहार छात्र का कसूर बस यह था कि उसे शक हुआ कि उसे फिजिक्स में कम नंबर मिले हैं। उसने पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन दिया और उसे जब उत्तर पुस्तिका की स्कैन कॉपी मिली तो पता चला यह किसी और की है! सीबीएसआई को अपनी गलती मानने में दो दिन लग गए, लेकिन एक्स पर वेदांत को दिए गए उसके जवाब में कोई अफसोस जैसा भाव भी नहीं है।

इस मामले के सामने आने के बाद देशभर से अनेक छात्र छात्राओं की ओर से सीबीएसई के पुनर्मूल्यांकन में मिली स्कैन कॉपी की गड़बड़ियों की जैसी शिकायतें सामने आई हैं, उससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि किस तरह से इस परीक्षा को मजाक बना दिया गया है। अनेक बच्चों की शिकायतें सामने आई हैं कि उन्हें जो स्कैन कॉपी भेजी गई है, उनमें किसी और की उत्तर पुस्तिकाएं हैं या उनकी उत्तर पुस्तिकाओं के पेज गायब हैं।

12 वीं की परीक्षा किसी भी बच्चे के जीवन का वह मोड़ होती है, जहां से उसके भविष्य का रास्ता तय होता है। ऐसी गड़बड़ियों का उनके मानसिक स्वास्थ्य पर कैसा असर डाल सकती है, जिसकी कल्पना की जा सकती है।

सवाल है कि आखिर ऐसी गड़बड़ियां क्यों हो रही हैं, और इसकी जवाबदेही तय कैसे होगी? यह घनघोर आपराधिक लापरवाही है, जिसमें शीर्ष स्तर से जवाबदेही तय होनी चाहिए।

ओसीएम लागू करते समय सीबीएसई की ओर से दावा किया गया था कि इससे मूल्यांकन में पारदर्शिता आएगी। सामने आई गड़बड़ियां बता रही हैं कि यह सिस्टम बिना पुख्ता जांच के लागू किया गया।

गजब यह है कि नीट के पर्चे लीक होने से एनटीए के डायरेक्टर ने पल्ला झाड़ लिया है। इधर सीबीएसई ने एक्स की एक पोस्ट के जरिये मुक्ति पा ली है। लाख टके का सवाल है कि क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान खुद कोई जिम्मेदारी लेंगे?

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