LENS EXCLUSIVE: देश में बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अयोध्या में भगवान राम का भव्य मंदिर बन गया अब अयोध्या से करीब 850 किलोमीटर दूर छत्तीसगढ़ के बालोद में भगवान राम की माता कौशल्या का एक भव्य मंदिर बन रहा है उथल-पुथल के बीच ही.. छत्तीसगढ़ की पिछली कांग्रेस सरकार ने राजधानी रायपुर से 25KM दूर माता कौशल्या के इकलौते मंदिर को सहेजा तो कहा गया कि भाजपा के पास भगवान राम है कांग्रेस के पास राम की माता कौशल्या.. अब ये कहा जा रहा है कि विवादों के बीच बन रहे माता कौशल्या के इस बड़े मंदिर को भाजपा और उसके नेतृत्व वाली सरकार को पूरा साथ है लेकिन इस निर्माणाधीन मंदिर को एक आदिवासी गांव की बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यह गांव डटा है लड़ रहा है कह रहा है कि यह उनकी आस्था उनके देवस्थल और उनकी संस्कृति को बचाने की लड़ाई है, इसी टकराव का जायजा लेने द लेंस टीम पहुंची बालोद के डौंडीलोहारा के तुएगोंदी गांव, आप यह पूरी रिपोर्ट द लेंस पर देखिये लेकिन अगर आपने अबतक हमारे चैनल को सब्सक्राइब नहीं किया है तो सब्सक्राइब कर लीजिये, इस रिपोर्ट को लाइक करें शेयर करें ताकि हम पत्रकारिता के मैदान में डटे रहे जहां सच साफ-साफ कहा जाता है दिखलाया जाता है देखें ये वीडियो रिपोर्ट
जून का महीना बारिश का, मानसून का और खुशहाली का होता है लेकिन छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में इस बार जून की शुरुआत आक्रोश की आग लेकर आई है। बालोद जिले के तुएगोंदी क्षेत्र के रिजर्व फॉरेस्ट में बाबा बालक दास जो अपना नाम बाबा बालयोगेश्वर भी लिखतें हैं करोड़ों रुपये खर्च करके मंदिर बना रहे हैं, लेकिन स्थानीय आदिवासी समाज इसका पुरजोर विरोध कर रहा है। आदिवासी कह रहे हैं कि यह उनकी देव भूमि है, उनका जंगल है, जिस पर गैर-कानूनी तरीके से कब्जा किया गया है और यह भी कहा जा रहा है कि वहां बीजेपी के बड़े नेता मंत्री मुख्यमंत्री से लेकर आरएसएस प्रमुख तक का आना-जाना यहां लगा रहता है।

1 जून 2026 को छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में आग की तरह आदिवासी गुस्सा भड़क उठा, सर्व आदिवासी समाज के हज़ारों आदिवासियों ने तुएगोंदी रिजर्व फॉरेस्ट क्षेत्र में हो रहे घोर अवैध अतिक्रमण के विरोध में बालोद कलेक्टरेट को घेर लिया, प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन की ट्रिपल लेयर बैरिकेडिंग तोड़ दी, मुख्य द्वार ध्वस्त कर दिया और कलेक्टरेट परिसर में घुसकर धरना देने बैठ गए, जब कलेक्टर के इंतज़ार में बैठे रहने के बाद भी कलेक्टर नहीं पहुंची तो परिसर के अंदर ही चूल्हा जलाकर खाना बनाना शुरू कर दिया, जब एक पुलिस निरीक्षक ने चूल्हे में पानी डाल दिया तो महिलाओं समेत आदिवासियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हो गई, लाठियां छीनी गईं और धक्का-मुक्की हुई, आदिवासी समाज ने आरोप लगाया कि बाबा बालक दास धार्मिक आयोजन के नाम पर करोड़ों रुपये की लागत से अवैध निर्माण करवा रहे हैं, जो ग्राम सभा, PESA कानून और वन कानून का खुला उल्लंघन है, फिर भी प्रशासन उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रहा, द लेंस ने इस घटना पर विस्तार से पहले भी रिपोर्ट बनाकर दिखाई थी, इस रिपोर्ट को भी आप इस वीडियो में देख सकतें हैं –
The LENS टीम जैसे ही कौशल्या धाम में पहुंची तो जो देखा वह हैरान करने वाला था, भरे जंगल के बीच पहाड़ों पेड़ों को काटकर भव्य मंदिर का निर्माण हो रहा था, निर्माण कार्य में लगे मजदूर कड़ी धूप में काम कर रहे थे, यही वह मंदिर है जिसको लेकर विवाद सुलग रहा है, एक तरफ है आदिवासी समुदाय और दूसरी तरफ है बाबा बालक दास और कुछ हिंदुत्व वादी संगठन, वहां काम करने वाले एक कार्यकर्ता ने हमें बाबा के निवास स्थल तक पहुंचाया, बाबा बालक दास ने सबसे पहले हमें यह बताया कि यहां 17 मई से 15 जून तक पुरुषोत्तम मास महोत्सव चल रहा है इसके अलावा महारुद्राभिषेक और शीर्वाचन कार्यक्रम भी आयोजित किया जा रहा है, यहां समय-समय पर रामायण का पाठ होता है, बाबा बालक दास ने यह भी कहा कि उनको ये जानकारी मिली है कि एक पक्ष यह कहता है यज्ञ हवन रुद्राभिषेक करके इस जंगल को दूषित कर दिया जा रहा है, और एक महीना पूरा होने पर हम बकरा काट कर इस जगह को शुद्धिकरण करेंगे, बाबा बालक दास ने कहा की मैं हिंदू हूं मैं सनातनी हिंदू हूं मेरा पक्ष वही है जो ऋषि मुनियों ने मुझे दिया है, हालांकि बातचीत का रास्ता खुला है, बाबा की इस बात से साफ़ अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि जब वो कथित शुद्धिकरण वाली बात कर रहे थे तो यह बात आदिवासियों की अपनी परंपराओं के खिलाफ ही थी।

2022 का मामला
दरअसल ये पूरा विवाद आज का नहीं बल्कि 4 बरस पुराना है. 1 मई 2022 को इस मंदिर निर्माण वाली जगह से जुड़े आदिवासी देवस्थल को लेकर विवाद हुआ,, दरअसल बाबा बालक दास के गुरु महंत रामजानकी दास त्यागी महाराज इसी जगह पर 1975 से रह रहे थे जिनका आदिवासी समुदाय से मेलजोल रहा है, एक विवाद बाबा बालक दास के गुरु महंत राम जानकी दास त्यागी के मृत्यु से भी जुड़ा है। स्थानीय आदिवासी समुदाय को शिकायत है की उनकी मृत्यु के बाद बाबा बालक दास ने स्थानीय आदिवासी परम्पराओं के मुताबिक़ संस्कार नहीं किये इसे लेकर आदिवासी समुदाय में आजकल नाराजगी है और इसी नाराजगी में आकर 1 मई 2022 को आदिवासी ग्रामीणों ने अपनी परंपरा के अनुसार बकरे और मुर्गे की बलि चढ़ाई, दूसरी तरफ बाबा ने भी दल्लीराजहरा से हिंदूवादी संगठनों को बुला लिया और दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट, लाठी-डंडे और पत्थरबाजी हुई, जिसमें कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और देर रात तक गांव में भारी पुलिस बल तैनात रखा। आज भी यही बलि प्रथा वाला विवाद दोनों समुदायों के बीच तनाव का बड़ा कारण बना हुआ है और न्यायलय में बाबा के विरुद्ध ये केस एट्रो सिटी एक्ट के तहत अभी भी चल रहा है फिलहाल अभी किसी भी पक्ष को ऊपर जाकर पूजा करने या बलि देने जैसे किसी भी क्रिया के लिए मनाही है। बाबा बालक दास का एक और परिचय यह भी है की वे वर्तमान में राज्य गौ सेवा आयोग के संरक्षक भी बताते हैं जबकि सरकार के गौ सेवा आयोग में संरक्षक जैसा कोई पद ही नहीं है, जबकि अध्यक्ष पद में कोई और है।

बाबा बालक दास के बताए अनुसार इस मंदिर का निर्माण 2005 से शुरू हुआ और 2015 से निर्माण कार्य चल रहा है लेकिन विगत 4 वर्षों से इसमें तेजी देखी गई है, कौशल्या धाम मंदिर में निर्माण कार्य जारी है, निचले तल पर शिव मंदिर का निर्माण किया जा रहा है और मूर्ति यहां पर पहले से भी स्थापित हो चुकी है और आसपास के स्थलों में नक्काशी दार पत्थरों को तराशा जा रहा है और इसका निर्माण जारी है जिसमें बाहर से कारीगर बुलाए गए हैं इस निर्माण कार्य के जरिए मूर्त रूप देने की तैयारी की जा रही है इसी के ऊपर दो और तल है जहां पर अलग-अलग मंदिरों का निर्माण किया जाना है बीच वाले तल पर जहां पर कौशल्या माता की मूर्ति स्थापित की जानी है जहां उनके हाथ में रामलाल राम भगवान की मूर्ति होगी उसे मूर्ति के स्वरूप को भी बाबा बालक दास ने हमें दिखाया कि कैसे उसका निर्माण होना है हमसे बातचीत के दौरान, तीसरे तल पर पंचमुखी हनुमान मंदिर बनाया जाना है, अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जैसे अयोध्या में रामलला मंदिर का निर्माण कराया गया है उसी तर्ज पर बालोद जिले में कौशल्या धाम का निर्माण कराया जा रहा है। दिसंबर 2026 के अंत तक इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हो जाएगा और इसमें बड़े-बड़े लोगों को आमंत्रित किया जाएगा जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा और भी बड़े लोग उसमें शामिल होंगे।

हमने रास्ते में देखा की पक्की सड़क धाम तक तो थी लेकिन गाँव पहुँचने के लिए कहीं कच्ची सड़क तो कहीं पक्की सड़क थी .जबकि गाँव वालों के घरों में कई स्लोगन्स लिखे दिखाई दिए जिसमें जंगल बचाओ से लेकर सरकारी योजनाओं का ज़िक्र था, मंदिर बनाये जाने के लिए जहाँ करोड़ों रुपयों खर्च हो रहे थे तो ग्रामीणों की आँखों से लेकर पहनावे तक सभी में गरीबी झलक रही थी, तेज बारिश से बचने के लिए पक्का मकान तक नहीं था, बाबा के आश्रम से महज 1 किमी के अंदर अधिकांश घर कच्चे थे झोपड़ी के बने थे।

गांववालों से बातचीत करने के बाद हमने प्रशासन का पक्ष जानने का प्रयास किया लेकिन कलेक्टर दिव्या मिश्रा और DFO अभिषेक अग्रवाल इस मामले में किसी भी तरह का बयान देने से बचती नज़र आये, कांग्रेस ज़िला अध्यक्ष चंद्रेश हिरवानी का कहना था की रिपोर्ट कलेक्टर के पास है उन्हें उचित कार्रवाई करनी चाहिए बालोद जैसे शांतिप्रिय क्षेत्र में आदिवासी समाज के परम्परा के हक़ के लिए प्रशासन को सहयोग करना चाहिए।


1 जून के घटनाक्रम के बाद भी अगर शासन नहीं जागा, अगर वह इस पर एक्शन नहीं लिया, उनकी मांगे नहीं पूरी गई तो यह जो आंदोलन है और भी उग्र रूप ले सकता है क्योंकि छत्तीसगढ़ के सर्व आदिवासी समाज के द्वारा ना केवल बालोद जिले के बल्कि अन्य जिलों के आदिवासी समुदाय का भी इन्हें समर्थन मिल गया है और अब वह आगामी 20 जून को बड़े आंदोलन की चेतावनी दे रहे हैं। अब देखना होगा इस पर सरकार क्या एक्शन लेती है। अधिकारी इस पर क्या कहते हैं? इस पूरे मामले पर आदिवासी संस्कृति की लड़ाई को लेकर आपका क्या कहना है? द लेंस के YouTube चैनल के ज़रिये हम तक अपनी प्रतक्रिया पहुंचाएं इससे हमारा उत्साह बढ़ता है।











