लेंस डेस्क। भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान को एक नई उपलब्धि मिली है। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL), अहमदाबाद की प्रोफेसर डॉ. कुलजीत कौर मरहास को विश्व की प्रतिष्ठित Meteoritical Society का फेलो चुना गया है। वे इस 93 वर्ष पुरानी संस्था की पहली भारतीय महिला फेलो बन गई हैं। 9 मई 2026 को हुई घोषणा के अनुसार, डॉ. मरहास केवल तीसरी भारतीय वैज्ञानिक हैं जिन्हें यह सम्मान मिला है। उनसे पहले यह सम्मान देवेंद्र लाल और जे.एन. गोस्वामी को प्राप्त हो चुका है।
कौन हैं डॉ. कुलजीत कौर मरहास?
डॉ. कुलजीत कौर मरहास PRL की प्लैनेटरी साइंस डिवीजन में प्रोफेसर और प्लैनेटरी लेबोरेटरी एनालिसिस सेक्शन की हेड हैं। PRL भारत की प्रमुख स्पेस साइंस संस्था है, जो ISRO के साथ मिलकर काम करती है। उनका मुख्य शोध क्षेत्र है – सौर मंडल की उत्पत्ति। वे meteorites (उल्कापिंडों) और presolar grains (सूर्य से पहले के कणों) का अध्ययन करती हैं। ये छोटे-छोटे कण 4.6 अरब साल पहले के हैं और सौर मंडल बनने के रहस्य छुपाए हुए हैं। वे nanoSIMS (नैनो सेकेंडरी आयन मास स्पेक्ट्रोमीटर) जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करती हैं, जिससे nanoscale पर आइसोटोपिक सिग्नेचर पढ़ा जा सकता है।
कितना महत्वपूर्ण है यह सम्मान ?
मेटियोरीटिकल सोसाइटी की स्थापना 1933 में हुई थी। फेलो का चुनाव दुनिया भर के चुनिंदा वैज्ञानिकों के लिए होता है, जिन्होंने meteorites, planetary materials और सौर मंडल की उत्पत्ति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया हो। डॉ. मरहास Meteoritical Society की काउंसिल सदस्य रह चुकी हैं और NASA की रिव्यू पैनल्स में भी शामिल रही हैं।
शोध का महत्व
डॉ. मरहास short-lived radionuclides, meteorites की आइसोटोपिक संरचना और presolar grains का अध्ययन करती हैं। उनका काम हमें बताता है कि सूर्य और ग्रह कैसे बने, asteroids और दूसरे celestial bodies की कहानी क्या है। उन्होंने NASA और JAXA के सैंपल रिटर्न मिशनों के सैंपल्स भी एनालाइज किए हैं। फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी और ISRO से जुड़े वैज्ञानिकों ने इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है।











