रायपुर। भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) में कथित लोहा चोरी के मामले में भाजपा नेता की गिरफ्तारी के बाद छत्तीसगढ़ की राजनीति गरमा गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भाजपा और राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए मामले की व्यापक और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
डॉ. महंत ने कहा कि बीएसपी लोहा चोरी मामले में अब तक 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। उनका कहना है कि यह मामला किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं हो सकता और पूरे नेटवर्क की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता को पार्टी से छह साल के लिए निष्कासित करना पर्याप्त नहीं है। असली सवाल यह है कि इस कथित नेटवर्क को संरक्षण किसका मिला और यह इतने लंबे समय तक कैसे चलता रहा।
नेता प्रतिपक्ष ने सवाल उठाया कि देश के बड़े सार्वजनिक उपक्रमों में शामिल भिलाई इस्पात संयंत्र से यदि लगातार लोहा चोरी हो रही थी, तो सुरक्षा व्यवस्था, निगरानी तंत्र और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि चोरी के लिए वाहन संयंत्र परिसर तक पहुंच रहे थे, तो यह जानना जरूरी है कि इस पूरे घटनाक्रम में किन-किन लोगों की भूमिका रही।
डॉ. महंत ने कहा कि भाजपा विधायक रिकेश सेन पहले भी बीएसपी में बड़े पैमाने पर कथित लोहा चोरी और आर्थिक नुकसान का मुद्दा उठा चुके हैं। उनका कहना है कि यदि विधायक ने पहले ही गंभीर आरोप लगाए थे, तो जांच एजेंसियों को उनसे भी जानकारी लेकर मामले की जांच का हिस्सा बनाना चाहिए।
मुख्यमंत्री से मांगा जवाब
नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब मीडिया ने पहले इस मामले पर सवाल किए थे, तब सरकार की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया था। अब जब इस मामले में भाजपा से जुड़े नेता की गिरफ्तारी हुई है, तो सरकार को पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
डॉ. महंत ने कहा कि जांच केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उनके अनुसार, यदि इस मामले में कोई राजनीतिक, प्रशासनिक या कारोबारी नेटवर्क शामिल है तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि कार्रवाई तभी प्रभावी मानी जाएगी, जब पूरे नेटवर्क और कथित संरक्षण देने वाले लोगों की भूमिका भी सामने आए।
अपने बयान में डॉ. महंत ने केंद्र सरकार पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक उपक्रमों की सुरक्षा और संपत्ति की जिम्मेदारी वर्तमान सरकार की है। उन्होंने कहा कि बीएसपी जैसी राष्ट्रीय संपत्ति में यदि लंबे समय तक कथित चोरी होती रही है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बीएसपी लोहा चोरी मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बीच अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष जहां पूरे नेटवर्क की जांच की मांग कर रहा है, वहीं इस मामले में जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।









