इम्फाल। मणिपुर के उखरुल जिले में शुक्रवार को कुकी और नागा समुदायों (Kuki-Naga clash) के बीच हुई झड़प में तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। दोनों समुदायों ने एक-दूसरे पर हमला शुरू करने का आरोप लगाया है। मृतकों में दो कुकी समुदाय के थे जबकि एक तंगखुल नागा था। तंगखुल नागा उखरुल जिले की प्रमुख जनजाति है।
कुकी मानवाधिकार संगठन के अनुसार शुक्रवार तड़के करीब 5:30 बजे हथियारबंद तंगखुल नागा पुरुषों ने मुल्लम और शोंगफल नामक कुकी गांवों पर हमला कर दिया। उस समय गांव के लोग सो रहे थे। संगठन का आरोप है कि हमलावरों ने दो ग्राम स्वयंसेवकों को गोली मारकर मार डाला, कई महिलाओं और बच्चों समेत अन्य लोगों को घायल किया और एक दर्जन से ज्यादा घरों को आग लगा दी। दोनों मृतकों की पहचान एल सिटलहो और पी हाओलाई के रूप में हुई है। उनके शरीर पर गोली के निशान थे।
नागा पक्ष का दावा है कि सिराखोंग और सिनाकेइथेई गांवों के बीच गश्त कर रहे उनके ग्राम रक्षक दल के सदस्यों पर सशस्त्र कुकी चरमपंथियों ने गोलीबारी की। इस हमले में तीसरे व्यक्ति होर्शोकमी जमंग की मौत हुई, जो नागा समुदाय का था और वह भी ग्राम स्वयंसेवक था। कुकी संगठन ने कहा कि ग्रामीणों ने आत्मरक्षा में लाइसेंस प्राप्त शिकार हथियारों का इस्तेमाल किया और एक हमलावर को भी निष्क्रिय कर दिया।
उखरुल में कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव 7 फरवरी से बढ़ना शुरू हुआ था। एक छोटी-सी कहासुनी के बाद झड़पें भड़क उठीं, जिसके बाद लिटान और आसपास के गांवों में कई दिनों तक आगजनी और गोलीबारी होती रही। दोनों पक्षों के बीच सुलह के प्रयास नाकाम रहे और रुक-रुक कर हिंसा जारी रही।यह हिंसा मणिपुर के जातीय संघर्ष के स्वरूप में बदलाव का संकेत दे रही है। पहले हिंसा मुख्य रूप से मैतेई-बहुल मैदानी इलाकों में केंद्रित थी, अब यह पहाड़ी इलाकों में भी फैल रही है।
राज्य में जारी जातीय तनाव
मणिपुर में मई 2023 से मैतेई और कुकी-ज़ो समुदायों के बीच हिंसक संघर्ष चल रहा है। इस दौरान अब तक कम से कम 260 लोगों की जान जा चुकी है और 59,000 से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। 2024 और 2025 में भी हिंसा में कई बार बढ़ोतरी देखी गई है। वर्तमान घटना में दोनों पक्ष ‘ग्राम स्वयंसेवक’ की भूमिका का जिक्र कर रहे हैं। कुकी पक्ष ने हमले का आरोप नागाओं पर लगाया है, जबकि नागा पक्ष ने कुकी चरमपंथियों पर आरोप लगाया है। स्थानीय प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं लेकिन दोनों समुदायों के बीच गहरे अविश्वास के कारण शांति बहाल करना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।









