एक मेडिकल कॉलेज के बंद होने से खुश ये कौन बीमार लोग हैं!

January 10, 2026 8:05 PM
Jammu and Kashmir Medical College controversy

जम्मू-कश्मीर के राजौरी में स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस की मान्यता भले ही मानकों में खामियां बताकर रद्द की गई है, लेकिन इसके बंद होने के बाद आरएसएस-भाजपा से जुड़े हिंदू संगठनों ने जिस तरह से जश्न मनाया है, वह दिखा रहा है कि नफरत का कारोबार कैसे शैक्षणिक परिसरों तक फैल गया है।

ये संगठन पिछले साल खुले पचास सीटों वाले मेडिकल कॉलेज में 42 मुस्लिम छात्रों के दाखिले का विरोध कर रहे थे। उन्हें यह नागवार गुजर रहा था कि श्री माता वैष्णो देवी के नाम से संचालित मेडिकल कॉलेज में मुस्लिम छात्र कैसे दाखिला ले सकते हैं।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला बता चुके हैं कि ये छात्र-छात्राएं मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए होने वाली प्रतियोगी परीक्षा नीट के जरिये चयनित होकर वहां आए थे।

इस कॉलेज को बंद करने के बाद इन विद्यार्थियों को राज्य के दूसरे मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिया जाएगा। दरअसल

यह सिर्फ एक संस्थान का बंद हो जाना भर नहीं है, सवाल उस नफरत का है, जिसने उस देश में एक मेडिकल कॉलेज को बंद करवा दिया जहां स्वास्थ्य सेवाएं आज भी सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक हैं।

यह बताने की जरूरत नहीं की कट्टरता के निशाने पर सबसे पहले शैक्षणिक संस्थान और ज्ञान के केंद्र तथा प्रतीक ही होते हैं। इतिहास ऐसी घटनाओं से अटा पड़ा है।

आजाद भारत में संभवतः यह पहला ऐसा मामला है, जब उच्च शिक्षा के एक संस्थान के बंद होने पर नफरत में डूबे कुछ लोग जश्न मना रहे हैं। यह शर्मनाक है और अस्वीकार्य है। आखिर इस तरह का कदम उठाकर हम दुनिया को किस तरह का संदेश दे रहे हैं?

राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद ने (एनएमएसी) ने महज साल भर पहले खुले इस मेडिकल कॉलेज में गंभीर अनियमितताओं की शिकायतों की जांच इसी महीने की थी और आनन-फानन में इसे बंद करने का फैसला भी ले लिया।

सवाल है कि एनएमसी का ध्यान इन खामियों पर सालभर पहले इस मेडिकल कॉलेज को मान्यता देते समय क्यों नहीं गया? यह जवाबदेही तय होनी ही चाहिए कि महज एक साल में इस मेडिकल कॉलेज को बंद करने की नौबत क्यों आई?

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