स्पेसएक्स का स्टारशिप पहली बार ऑर्बिट में पहुंचा, 26 स्टारलिंक सैटेलाइट भी लॉन्च

लेंस डेस्क। इलॉन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के सबसे ताकतवर रॉकेट स्टारशिप ने अपनी 14वीं टेस्ट उड़ान में बड़ा पड़ाव हासिल किया है। भारतीय समयानुसार सोमवार शाम 6:16 बजे लॉन्च किया गया स्टारशिप पहली बार पृथ्वी की कक्षा यानी ऑर्बिट में पहुंचा। इस मिशन में 26 नए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी अंतरिक्ष में भेजे गए हैं। करीब 10 घंटे के इस मिशन में स्टारशिप को पृथ्वी के लगभग छह चक्कर लगाने हैं। इसके बाद इसकी प्रशांत महासागर में चिली के पास स्प्लैशडाउन की योजना है।

14वीं उड़ान में पहली बार ऑर्बिट तक पहुंचा

स्टारशिप की अब तक की टेस्ट उड़ानों में रॉकेट को मुख्य रूप से सब-ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी तक भेजा जाता था। यानी रॉकेट अंतरिक्ष की ऊंचाई तक पहुंचता था, लेकिन इतनी रफ्तार हासिल नहीं करता था कि पृथ्वी की कक्षा में लगातार चक्कर लगा सके। 14वीं उड़ान में पहली बार स्टारशिप को ऑर्बिटल मिशन पर भेजा गया है।

इस मिशन में स्टारशिप करीब 275 किलोमीटर की ऊंचाई पर उड़ान भरने की योजना के साथ आगे बढ़ रहा है। ऑर्बिटल उड़ान में रॉकेट को ऐसी गति और दिशा हासिल करनी होती है, जिससे पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण उसे सीधे नीचे खींचने के बजाय वह लगातार पृथ्वी की कक्षा में घूमता रहे।

स्टारशिप को ऊपर के स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट और नीचे के सुपर हैवी बूस्टर से मिलकर बनाया गया है। इसकी कुल ऊंचाई करीब 403 फीट है। स्पेसएक्स का लक्ष्य भविष्य में इसी सिस्टम का इस्तेमाल चंद्रमा और मंगल जैसे मिशनों के लिए करना है।

26 नए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी भेजे

14वीं उड़ान सिर्फ स्टारशिप की टेस्टिंग तक सीमित नहीं है। इस मिशन में पहली बार 26 नए स्टारलिंक V3 सैटेलाइट भी भेजे जा रहे हैं। इन सैटेलाइट का उद्देश्य पहले के मुकाबले ज्यादा डेटा क्षमता उपलब्ध कराना है।

बताया गया है कि एक V3 सैटेलाइट करीब 1 टेराबिट प्रति सेकंड यानी 1 Tbps तक की डेटा क्षमता जोड़ सकता है। इस हिसाब से 26 सैटेलाइट मिलकर बड़ी नेटवर्क क्षमता जोड़ सकते हैं। रॉकेट से अलग होने के बाद सैटेलाइट अपने सोलर पैनल और एंटीना खोलेंगे। इसके बाद वे अपनी तय कक्षा में पहुंचकर नेटवर्क का हिस्सा बनने की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

इस मिशन में तीन सैटेलाइट को खास तौर पर स्टारशिप की निगरानी के लिए बदला गया है। इनमें हाई-टेक कैमरे लगाए गए हैं, जो स्टारशिप की हीटशील्ड की तस्वीरें लेने का काम करेंगे। इन तस्वीरों से यह समझने में मदद मिलेगी कि पृथ्वी के वातावरण में वापस प्रवेश करते समय स्टारशिप की बाहरी सुरक्षा परत कितनी गर्मी और दबाव झेल पाती है।

13 टेस्ट में मिली असफलताओं से सीख

स्टारशिप की 14वीं उड़ान तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। अप्रैल 2023 में पहली टेस्ट उड़ान से शुरू हुआ यह अभियान कई विस्फोटों, तकनीकी खराबियों और लैंडिंग की कोशिशों से गुजर चुका है। हालांकि, स्पेसएक्स का दावा रहा है कि हर टेस्ट से मिले डेटा का इस्तेमाल अगली उड़ान को बेहतर बनाने में किया गया।

पहला टेस्ट: लॉन्च के चार मिनट बाद विस्फोट

स्टारशिप की पहली टेस्ट उड़ान 20 अप्रैल 2023 को हुई थी। इसमें सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट को एक साथ लॉन्च किया गया। उड़ान के करीब चार मिनट बाद रॉकेट में विस्फोट हो गया।

हालांकि, स्पेसएक्स ने इसे पूरी तरह असफल नहीं माना। कंपनी के लिए लॉन्चपैड से इतने बड़े रॉकेट को सफलतापूर्वक उड़ाना भी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी। इस उड़ान से मिले डेटा के आधार पर अगली टेस्ट उड़ान की तैयारी शुरू की गई।

दूसरा टेस्ट: हॉट स्टेजिंग का सफल प्रदर्शन

18 नवंबर 2023 को स्टारशिप की दूसरी टेस्ट उड़ान हुई। इस बार करीब 2.4 मिनट बाद सुपर हैवी बूस्टर और स्टारशिप अलग हुए। बूस्टर बाद में नष्ट हो गया, जबकि स्टारशिप आगे बढ़ता रहा।

करीब आठ मिनट बाद स्टारशिप में भी तकनीकी खराबी आई और उसे फ्लाइट टर्मिनेशन सिस्टम के जरिए नष्ट किया गया। हालांकि, इस मिशन में पहली बार हॉट स्टेजिंग प्रक्रिया का सफल प्रदर्शन हुआ। इस तकनीक में बूस्टर के इंजन बंद होने से पहले ही ऊपर का स्टेज अपने इंजन चालू कर देता है।

तीसरा टेस्ट: ऑर्बिट तक पहुंचा, लेकिन री-एंट्री में संपर्क टूटा

14 मार्च 2024 को तीसरी टेस्ट उड़ान हुई। इस बार स्टारशिप ने मिशन के कई महत्वपूर्ण चरण पूरे किए। उसने ऑर्बिटल ट्रैजेक्टरी में पहुंचने के बाद पेलोड डोर खोलने और बंद करने का परीक्षण किया। रॉकेट के भीतर तरल ऑक्सीजन को एक टैंक से दूसरे टैंक में ट्रांसफर करने का परीक्षण भी किया गया।

हालांकि, पृथ्वी के वातावरण में वापस प्रवेश के दौरान स्टारशिप से संपर्क टूट गया और वह मिशन पूरा नहीं कर सका।

चौथा टेस्ट: पानी में सफल लैंडिंग

6 जून 2024 की चौथी उड़ान में स्टारशिप ने एक और महत्वपूर्ण कदम आगे बढ़ाया। इस बार इसका मुख्य लक्ष्य पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान यान की क्षमता को परखना था।

स्टारशिप ने अंतरिक्ष तक उड़ान भरी और फिर पृथ्वी की ओर वापस आया। री-एंट्री के दौरान हीटशील्ड और फ्लैप को नुकसान के बावजूद स्टारशिप समुद्र में नियंत्रित तरीके से उतरने में कामयाब रहा।

पांचवां टेस्ट: बूस्टर को पहली बार लॉन्चपैड पर पकड़ा

13 अक्टूबर 2024 की पांचवीं उड़ान स्टारशिप कार्यक्रम के लिए खास रही। इस मिशन में सुपर हैवी बूस्टर को वापस लॉन्च साइट पर लाने की कोशिश सफल रही।

बूस्टर को लॉन्चपैड पर लगे विशाल मेटल आर्म्स ने हवा में ही पकड़ लिया। इन आर्म्स को ‘चॉपस्टिक्स’ कहा जाता है। वहीं स्टारशिप ने पृथ्वी के वातावरण में री-एंट्री की और हिंद महासागर में नियंत्रित लैंडिंग की।

छठा टेस्ट: पानी में लैंडिंग का फैसला

20 नवंबर 2024 को छठी टेस्ट उड़ान हुई। इस दौरान बूस्टर को लॉन्चपैड पर वापस लाने की योजना थी, लेकिन सभी जरूरी पैरामीटर सही नहीं मिलने के बाद इसे समुद्र में उतारने का फैसला किया गया।

इस मिशन में स्टारशिप के इंजन को अंतरिक्ष में दोबारा चालू करने का परीक्षण भी किया गया। इसके बाद स्टारशिप हिंद महासागर में लैंड हुआ।

सातवां टेस्ट: बूस्टर वापस आया, स्टारशिप में खराबी

17 जनवरी 2025 को हुई सातवीं उड़ान में सुपर हैवी बूस्टर को दोबारा सफलतापूर्वक वापस लाया गया। हालांकि, स्टारशिप के ऊपरी हिस्से में ऑक्सीजन लीक की समस्या आई और वह आसमान में ही नष्ट हो गया।

इस टेस्ट से भी स्पेसएक्स को स्टारशिप की तकनीकी कमियों के बारे में महत्वपूर्ण डेटा मिला।

आठवां टेस्ट: इंजन बंद हुए, शिप नष्ट

7 मार्च 2025 को आठवीं टेस्ट उड़ान हुई। लॉन्च के करीब सात मिनट बाद बूस्टर अलग हुआ और वापस लौटने में सफल रहा। लेकिन स्टारशिप के छह में से चार इंजन काम करना बंद कर गए।

इसके बाद स्टारशिप ने नियंत्रण खो दिया और ऑटोमेटेड अबॉर्ट सिस्टम के जरिए उसे नष्ट कर दिया गया। इसके मलबे के कारण अमेरिका के कुछ इलाकों में हवाई यातायात भी प्रभावित हुआ।

नौवां टेस्ट: बूस्टर की लैंडिंग, शिप ने खोया कंट्रोल

28 मई 2025 को नौवीं टेस्ट उड़ान में बूस्टर ने वापसी की कोशिश की, लेकिन स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट उड़ान के करीब 30 मिनट बाद नियंत्रण खो बैठा।

पृथ्वी के वातावरण में दोबारा प्रवेश के दौरान स्टारशिप नष्ट हो गया। यह लगातार तीसरी उड़ान थी जिसमें स्टारशिप ऊंचाई पर ही मिशन पूरा नहीं कर पाया।

10वां टेस्ट: डमी स्टारलिंक सैटेलाइट भेजे

27 अगस्त 2025 को 10वीं टेस्ट उड़ान हुई। इस बार मिशन में स्टारलिंक सैटेलाइट के डमी यानी सिम्युलेटर भेजे गए। इनका इस्तेमाल यह जांचने के लिए किया गया कि स्टारशिप भविष्य में वास्तविक सैटेलाइटों को किस तरह अंतरिक्ष में तैनात कर सकता है।

इस उड़ान में सैटेलाइट डिप्लॉयमेंट से जुड़े कई परीक्षण पूरे किए गए।

11वां टेस्ट: मिशन प्रोफाइल में सुधार

14 अक्टूबर 2025 को हुई 11वीं उड़ान में स्टारशिप और सुपर हैवी बूस्टर की समुद्री लैंडिंग का परीक्षण किया गया। मिशन का एक अहम उद्देश्य भविष्य में दोनों हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल करने की क्षमता को बेहतर बनाना था।

यह टेस्ट स्टारशिप को बार-बार उड़ाने और वापस लाने की स्पेसएक्स की योजना की दिशा में एक और कदम था।

12वां टेस्ट: इंजन में खराबी के बावजूद लैंडिंग

23 मई 2026 की 12वीं उड़ान में स्टारशिप के नए और बड़े V3 वर्जन का इस्तेमाल किया गया। उड़ान के दौरान इंजन से जुड़ी समस्या सामने आई और रॉकेट के मिशन पर असर पड़ा।

इसके बावजूद करीब एक घंटे बाद स्टारशिप स्पेसक्राफ्ट हिंद महासागर में सुरक्षित लैंड करने में कामयाब रहा। इस मिशन ने यह दिखाया कि तकनीकी समस्या आने के बाद भी स्टारशिप को सुरक्षित तरीके से मिशन के अगले चरण तक ले जाने की क्षमता विकसित की जा रही है।

13वां टेस्ट: पहली बार समुद्र में सुरक्षित तैरता दिखा

25 जुलाई 2026 को हुई 13वीं टेस्ट उड़ान में स्टारशिप के ऊपरी हिस्से ने हिंद महासागर में और सुपर हैवी बूस्टर ने मैक्सिको की खाड़ी में पानी पर लैंडिंग की।

स्टारशिप ने पहले ‘बेली-फ्लॉप’ स्थिति से खुद को सीधा किया और फिर पानी पर लगभग लंबवत उतरा। इसके बाद वह एक तरफ झुककर समुद्र में तैरता दिखाई दिया। यह मिशन स्टारशिप की नियंत्रित वापसी और समुद्री लैंडिंग के लिहाज से अहम माना गया।

अब 14वीं उड़ान पर नजर

13 टेस्ट उड़ानों में विस्फोट, इंजन फेलियर, संपर्क टूटने और लैंडिंग की कई चुनौतियों के बाद स्टारशिप अब पहली बार ऑर्बिटल मिशन पर है। 14वीं उड़ान में सिर्फ रॉकेट को कक्षा में पहुंचाना ही लक्ष्य नहीं है, बल्कि 26 स्टारलिंक V3 सैटेलाइट की तैनाती और हीटशील्ड की निगरानी भी अहम हिस्सा है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या स्टारशिप करीब 10 घंटे का मिशन पूरा कर पाएगा, पृथ्वी के छह चक्कर लगाएगा और फिर सुरक्षित तरीके से समुद्र में स्प्लैशडाउन करेगा? इस टेस्ट से मिलने वाला डेटा भविष्य के स्टारशिप मिशनों के लिए बेहद अहम होगा। स्पेसएक्स के लिए यह सिर्फ एक और टेस्ट फ्लाइट नहीं, बल्कि बार-बार इस्तेमाल होने वाले विशाल अंतरिक्ष यान के सपने को आगे बढ़ाने की एक और बड़ी परीक्षा है।

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