रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग (CGHRC) ने अपनी स्थापना से अब तक 74 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया है। आयोग के कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक ने सोमवार को रायपुर में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि राज्य गठन के बाद 16 अप्रैल 2001 को छत्तीसगढ़ राज्य मानव अधिकार आयोग का गठन हुआ था। आयोग अर्धन्यायिक प्रकृति का है। पीड़ित व्यक्ति लिखित आवेदन, स्वयं उपस्थित होकर अथवा डाक और ई-मेल के माध्यम से अपनी शिकायत आयोग तक पहुंचा सकते हैं।
आयोग के मुताबिक, 16 अप्रैल 2001 से 15 मार्च 2026 तक 74 हजार से अधिक आवेदनों का निराकरण किया जा चुका है। वर्तमान में आयोग के पास 853 प्रकरण प्रक्रियाधीन हैं, जबकि हर साल औसतन 2500 से अधिक मामले आयोग के सामने आते हैं।
कार्यवाहक अध्यक्ष गिरिधारी नायक ने बताया कि आयोग की अनुशंसा पर शासन की ओर से कई मामलों में पीड़ितों को मुआवजा भी दिया गया है।
पिछले वर्ष दुर्ग में विचाराधीन बंदी दुर्गेश यादव और बुद्ध पल्लव की जेल में मौत के मामले में 5-5 लाख रुपये मुआवजे का आदेश जारी किया गया। वहीं चिकित्सकीय लापरवाही के मामले में राखी बोरकर और उनके नवजात की मौत पर 5 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का आदेश हुआ।
एक अन्य मामले में वेतन नहीं मिलने की शिकायत पर आयोग की पहल से एक शिक्षिका को 3 लाख 29 हजार 80 रुपये का भुगतान कराया गया।
सफाई कर्मियों के सर्वे में सामने आई कई समस्याएं
मानव अधिकार आयोग ने रायपुर और बिलासपुर में करीब 8 हजार सफाई कर्मियों का सर्वे कराया। आयोग के मुताबिक रायपुर जिले के सभी 10 जोन और बिलासपुर जिले के 8 जोन में यह सर्वे कराया गया।
सर्वे में सामने आई समस्याओं में 336 सफाई कर्मियों के घरों में शौचालय की व्यवस्था नहीं मिली। वहीं, 319 कर्मचारियों के माता-पिता की वृद्धावस्था या विधवा पेंशन से जुड़ी समस्या सामने आई। इसके अलावा 1907 कर्मचारियों के आधार, वोटर कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और हेल्थ कार्ड से जुड़ी समस्याएं मिलीं। 749 कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी सफाई किट नहीं मिलने की शिकायत सामने आई।
इसके अलावा 165 कर्मचारियों के बच्चों से जुड़ी नशे की समस्या के मामले मिले, जिनके निराकरण के लिए नशामुक्ति कार्यक्रम के तहत कार्रवाई की गई। 1076 मामलों में ठेकेदारों द्वारा एटीएम/पासबुक रखने, कम वेतन या वेतन में देरी की शिकायत मिली। करीब 2387 सफाई कर्मियों को प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना का लाभ नहीं मिलने की जानकारी सामने आई।
आयोग ने बताया कि इन समस्याओं के निराकरण के लिए संबंधित विभागों और कार्यालयों को रिपोर्ट भेजी जा चुकी है।
इस सर्वे में विभिन्न विश्वविद्यालयों और विधि महाविद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भी हिस्सा लिया। इनमें छत्तीसगढ़ कॉलेज, एमिटी यूनिवर्सिटी, हिदायतुल्लाह नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, कुसुम दाई डपके विधि महाविद्यालय, कलिंगा यूनिवर्सिटी, गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय और पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय के विद्यार्थी शामिल रहे।
कुष्ठ रोग के 1500 नए मरीज मिले
आयोग ने बताया कि कुष्ठ रोग को लेकर संबंधित जिलों के स्वास्थ्य अधिकारियों के माध्यम से परीक्षण कराया गया। इस दौरान करीब 1500 नए मरीज मिलने की जानकारी सामने आई। आयोग के अनुसार इन मरीजों का उपचार शुरू कराया गया है।
आयोग की ओर से वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को लेकर वृद्धाश्रमों और संबंधित सरकारी योजनाओं की जानकारी सभी जिलों से जुटाई जा रही है।
वहीं ट्रक चालकों के अधिकारों को लेकर 25 जून 2025 को परिवहन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की गई थी। इसमें ट्रक चालकों के नेत्र परीक्षण, स्वास्थ्य परीक्षण और बीमा कराने पर चर्चा हुई। 10 या उससे अधिक वाहन रखने वाले वाहन मालिकों से अपने चालकों का ग्रुप इंश्योरेंस कराने तथा लंबे समय से दुर्घटना-मुक्त सेवा दे रहे अनुभवी चालकों को प्रोत्साहन और सम्मान देने की दिशा में भी निर्देश दिए गए।
जेल, थाने और छात्रावासों का निरीक्षण
मानव अधिकार आयोग की ओर से समय-समय पर जेल, अस्पताल, थाने, बाल संप्रेक्षण गृह, आदिवासी छात्रावास, सरकारी स्कूल, वृद्धाश्रम और नारी निकेतन का निरीक्षण किया जाता है।
आयोग के अनुसार निरीक्षण के दौरान लंबित पेंशन मामलों को लेकर संबंधित ट्रेजरी अधिकारियों को निर्देश दिए गए, जिसके बाद 120 पेंशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।
हाल के वर्षों में आयोग की ओर से राजनांदगांव, दुर्ग, कोरबा, बिलासपुर, कांकेर, जगदलपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर, कोंडागांव और रायगढ़ सहित कई जिलों का निरीक्षण किया गया है।
मानव अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए आयोग विश्वविद्यालयों में कार्यक्रम आयोजित करता है। आयोग के मुताबिक देशभर से विद्यार्थी यहां इंटर्नशिप के लिए आते हैं।
पिछले पांच वर्षों में 631 विद्यार्थी आयोग की इंटर्नशिप से लाभान्वित हुए हैं। इनमें 2025-26 में 168 विद्यार्थी शामिल रहे, जो इन पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है।







