नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
दुनिया भर के नेताओं ने अमेरिका और इज़राइल द्वारा शनिवार को ईरान के खिलाफ शुरू किए गए बड़े सैन्य अभियान के बाद समर्थन, निंदा और संयम की अपील के मिश्रित स्वर में प्रतिक्रिया दी है। भारत ने सभी पक्षों से शांति की अपील की है। गौरतलब है कि इस अभियान के ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर खामेनेई की मौत की घोषणा की और इसे ईरानी लोगों के लिए अपनी देश वापस लेने का एकमात्र सबसे बड़ा मौका बताया है। महत्वपूर्ण है कि अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर हफ्तों की धमकियों के बाद शनिवार सुबह शुरुआती घंटों में हमले की घोषणा की।
प्रारंभिक हमलों के कुछ घंटों बाद रूस और चीन ने ईरान के समर्थन में बयान जारी किए, जबकि कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और यूक्रेन ने अमेरिका और इज़राइल का समर्थन किया। कई नेताओं ने दोनों पक्षों से संयम और डी-एस्केलेशन की अपील की।
यहां विभिन्न देशों के नेताओं के बयानों का सारांश है:
यूनाइटेड किंगडम: प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने आपातकालीन कोबरा समिति की बैठक की। यूके ने हमलों में भाग नहीं लिया, लेकिन क्षेत्र में सहयोगी ठिकानों की सुरक्षा के लिए RAF टाइफून तैनात किए। सरकार ने कहा कि वह “क्षेत्रीय संघर्ष में और विस्तार नहीं चाहती”। स्टार्मर ने फ्रांस और जर्मनी के नेताओं के साथ संयुक्त बयान में ईरान से जवाबी हमले रोकने की मांग की और बातचीत की बहाली की अपील की।
रूस: रूस ने हमले की कड़ी निंदा की और इसे “संप्रभु राष्ट्र के खिलाफ पूर्व-नियोजित और उकसावे रहित सशस्त्र आक्रमण” बताया। विदेश मंत्रालय ने कहा कि इससे मध्य पूर्व अनियंत्रित गहरी खाई में गिर सकता है और मानवीय, आर्थिक या रेडियोलॉजिकल आपदा हो सकती है।
चीन: चीन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि “ईरान की संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना चाहिए”। उन्होंने सैन्य कार्रवाई तुरंत रोकने, तनाव बढ़ाने से बचने, बातचीत बहाल करने और मध्य पूर्व में शांति बनाए रखने की अपील की।
फ्रांस: राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि यह वृद्धि “सभी के लिए खतरनाक है” और इसे रोकना चाहिए। उन्होंने ईरान से परमाणु और बैलिस्टिक कार्यक्रमों पर अच्छे विश्वास में बातचीत करने की मांग की और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की तत्काल बैठक की अपील की।
यूरोपीय संघ: उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि EU ने हमेशा कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा दिया है। उन्होंने सभी पक्षों से अधिकतम संयम, नागरिकों की सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने की अपील की।
कनाडा: प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका का समर्थन किया और कहा कि ईरान मध्य पूर्व में अस्थिरता और आतंक का मुख्य स्रोत है। ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।
ऑस्ट्रेलिया: प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ ने अमेरिका के अभियान का समर्थन किया और ईरान को परमाणु हथियार न बनाने देने की बात कही। लेबनान और इज़राइल के लिए यात्रा चेतावनी जारी कर दी।
पाकिस्तान : विदेश मंत्रालय ने ईरान पर “अनुचित हमलों” और उसके जवाबी हमलों की निंदा की। एक पाकिस्तानी नागरिक की मौत की पुष्टि की और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
भारत: विदेश मंत्रालय ने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई। सभी पक्षों से संयम, नागरिक सुरक्षा और बातचीत-कूटनीति की अपील की। सभी राज्यों की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही।
स्पेन: प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज़ ने तत्काल डी-एस्केलेशन और अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान की मांग की। अमेरिका-इज़राइल की एकतरफा कार्रवाई को खारिज किया।
सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, कतर: इन देशों ने ईरान के जवाबी हमलों की कड़ी निंदा की और अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया। जवाब देने का अधिकार सुरक्षित रखा।
ओमान: विदेश मंत्री बद्र अल बुसैदी ने मध्यस्थता प्रयासों के कमजोर होने पर निराशा जताई और निर्दोषों के लिए प्रार्थना की।
संयुक्त राष्ट्र: मानवाधिकार आयुक्त वोल्कर टर्क और महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी पक्षों से संयम और बातचीत की अपील की। गुटेरेस ने व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष का खतरा बताया।
यूक्रेन: राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने ईरान को “पुतिन का साथी” बताया और अमेरिका की निर्णायक कार्रवाई का समर्थन किया।










