टाटा पॉवर को पैरलल बिजली वितरण लाइसेंस देने के खिलाफ विकास उपाध्याय ने आयोग में लगाई याचिका

रायपुर। छत्तीसगढ़ की चार तहसीलों रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में टाटा पावर (Tata Power)को पैरलल बिजली वितरण लाइसेंस देने के प्रस्ताव को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। पूर्व संसदीय सचिव और पूर्व विधायक विकास उपाध्याय ने इस प्रस्ताव के खिलाफ छत्तीसगढ़ विद्युत नियामक आयोग (CSERC) की कोर्ट में याचिका लगाई है। यहां अगर लाइसेंस देने से मना नहीं किया जाता तो हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की जाएगी।

विकास उपाध्याय ने भाजपा सरकार पर बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में सौंपने की दिशा में आगे बढ़ने का आरोप लगाया है।

दरअसल, टाटा पॉवर ने CSERC में रायपुर, धरसीवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसीलों के भौगोलिक क्षेत्र के लिए वितरण लाइसेंस मांगा है। याचिका में 16 जुलाई 2026 को सुनवाई हो चुकी है। आयोग ने इस मामले में 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 11.30 बजे जनसुनवाई निर्धारित की है।

विकास उपाध्याय का कहना है कि वह टाटा पावर के इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने CSERC के समक्ष आपत्ति दर्ज कराने के साथ न्यायालय का रुख किया है। उनका आरोप है कि निजी कंपनी के प्रवेश से सरकारी वितरण कंपनी CSPDCL के सामने आर्थिक और संचालन संबंधी चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

435 करोड़ के निवेश पर उठाए सवाल

पूर्व विधायक ने टाटा पावर की प्रस्तावित निवेश योजना पर सवाल उठाते हुए दावा किया कि कंपनी ने आवेदन में शुरुआती पांच वर्षों में करीब 435 करोड़ रुपये निवेश कर नेटवर्क विकसित करने की बात कही है। उनका तर्क है कि इतने निवेश से चारों तहसीलों में स्वतंत्र वितरण नेटवर्क तैयार करना चुनौतीपूर्ण होगा।

उन्होंने आशंका जताई कि भविष्य में टाटा पावर को CSPDCL के नेटवर्क या ग्रिड के उपयोग की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि यह फिलहाल उनका आरोप और आशंका है; लाइसेंस आवेदन पर अंतिम निर्णय नियामक आयोग की प्रक्रिया के बाद ही होगा।

‘हाई रेवेन्यू वाले इलाके चुनने’ का आरोप

विकास उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया कि टाटा पावर ने रायपुर जिले के ऐसे क्षेत्रों का चयन किया है जहां औद्योगिक और वाणिज्यिक गतिविधियां अधिक हैं। उनके मुताबिक यदि निजी कंपनी मुख्य रूप से ज्यादा राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं को अपने साथ लेती है तो सरकारी वितरण कंपनी के पास अपेक्षाकृत कम राजस्व वाले ग्रामीण, कृषि और अन्य उपभोक्ता अधिक संख्या में रह सकते हैं।

उनका कहना है कि इससे CSPDCL की क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर असर पड़ सकता है और भविष्य में इसका भार आम उपभोक्ताओं पर पड़ने की आशंका है।

स्मार्ट मीटर को भी टाटा पावर के प्रस्ताव से जोड़ा

विकास उपाध्याय ने स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद आम उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है। उनका आरोप है कि स्मार्ट मीटर व्यवस्था का फायदा उपभोक्ताओं के बजाय निजी कंपनियों को पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है।

हालांकि बिजली बिल में किसी विशेष प्रतिशत की वृद्धि को केवल स्मार्ट मीटर से जोड़ने के लिए अलग से उपभोक्ता-वार बिलिंग और टैरिफ संबंधी आंकड़ों की जरूरत होगी।

‘निजी वितरण से बिजली महंगी होने का खतरा’

विकास उपाध्याय ने दावा किया कि निजी वितरण कंपनी के आने के बाद भविष्य में बिजली दरों पर दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने व्हीलिंग चार्ज और दूसरे शुल्कों का हवाला देते हुए आशंका जताई कि निजी वितरण व्यवस्था का असर उपभोक्ताओं के बिजली खर्च पर पड़ सकता है।

उन्होंने महाराष्ट्र और ओडिशा सहित दूसरे राज्यों में निजी वितरण कंपनियों के अनुभवों का भी हवाला दिया और कहा कि छत्तीसगढ़ में ऐसी व्यवस्था लागू करने से पहले उसके प्रभाव का विस्तृत अध्ययन होना चाहिए।

PM सूर्य घर योजना पर भी सरकार को घेरा

विकास उपाध्याय ने केंद्र सरकार की PM सूर्य घर योजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने इसे ‘मुफ्त बिजली के नाम पर जनता को गुमराह करने’ वाली योजना बताया और दावा किया कि योजना के जरिए उपभोक्ताओं को वास्तविक लाभ के बजाय भ्रमित किया जा रहा है।

विकास उपाध्याय ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार के दौरान तत्कालीन छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत मंडल को अलग-अलग कंपनियों में बांटा गया और इससे बिजली क्षेत्र की सार्वजनिक व्यवस्था कमजोर हुई।

वहीं उन्होंने कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए दावा किया कि बिजली कंपनियों के विलय और वित्तीय प्रबंधन के जरिए घाटे को कम करने का प्रयास किया गया था।

‘सार्वजनिक बिजली व्यवस्था को निजी हाथों में नहीं जाने देंगे’

विकास उपाध्याय ने कहा कि छत्तीसगढ़ जैसे बिजली उत्पादन वाले राज्य में आम उपभोक्ताओं को महंगी बिजली और निजीकरण की स्थिति का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने सरकार से टाटा पावर की याचिका को खारिज करने की मांग की।

उन्होंने कहा कि यदि आयोग की प्रक्रिया के बाद उनकी आपत्तियों पर सुनवाई नहीं होती है तो वह हाईकोर्ट और जरूरत पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। उपाध्याय के मुताबिक याचिका अधिवक्ता शशांक मिश्रा, शुभेंद्रु प्रकाश राय और संतोष कुमार के माध्यम से दायर की गई है।

फिलहाल टाटा पावर के वितरण लाइसेंस का मामला नियामक प्रक्रिया में है। CSERC ने 21 सितंबर तक इस प्रस्ताव पर टिप्पणियां और सुझाव मांगे थे और 1 अक्टूबर को जनसुनवाई रखी है।

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