नई दिल्ली। यह छोटी सी बात नहीं है कि तमिलनाडु में नवगठित TVK सरकार को कांग्रेस पार्टी ने अपने लगभग 55 साल पुराने सहयोगी डीएमके का साथ छोड़कर समर्थन दिया है। यह भी छोटी बात नहीं है कि पश्चिम बंगाल के दूसरे चरण के मतदान के ठीक पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपने वीडियो संदेश में पूर्व सीएम ममता बनर्जी की नीतियों को बंगाल में भाजपा के उभार की वजह बताया था।
आज यह खबर सोशल मीडिया पर चर्चा में है कि कांग्रेस के सांसद इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव को नसीहत देते हुए कहा कि ममता बनर्जी का हस्र देखकर भी अखिलेश यादव को समझ नहीं आ रहा है, बीजेपी कई छोटे दलों को खा गई है। वहीं अखिलेश यादव ने स्टालिन को गले लगाते हुए और ममता दी के साथ फोटो लगाई और कहा कि हम वो नहीं जो मौक़े पर धोखा दे दें।
डीएमके ने भी कांग्रेस को पीठ में छुरा भोंकने वाला करार देते हुए संसद में अलग बैठने की माँग कर दी है। यह सारे घटनाक्रम देखकर एक बारगी किसी को भी लग सकता है कि पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद इंडिया गठबन्धन India alliance अब बिखरने वाला है और आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बीजेपी की लड़ाई आसान होगी। लेकिन जो नज़र आ रहा है क्या बस उतना ही सच है? क्या वह इतना ही ब्लैक एंड व्हाइट है?
स्टालिन की दरियादिली और TVK की सरकार
विजय के शपथग्रहण से 16 घंटे पहले तक उनके पास स्पष्ट बहुमत नहीं था राज्यपाल उन्हें तीन बार बहुमत प्राप्ति के लिए समर्थन पत्र लाने को कहकर लौटा चुके थे। छोटे दल साम कह रहे थे कि अगर डीएमके कहेगी तभी हम सहयोग करेंगे। संवैधानिक संकट टालने के लिए स्टालिन ने अपने सहयोगी दलों VCK और IUML को TVK को बाहरी समर्थन देने के लिए मनाया।
DMK प्रवक्ता ए. सरवनन ने स्पष्ट दावा किया कि ‘हमारे नेता MK स्टालिन ने सहयोगी दलों को TVK के साथ हाथ मिलाने के लिए राजी किया’। स्टालिन ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह कदम उठाया क्योंकि वे नए चुनाव नहीं चाहते थे। स्टालिन ने TVK चीफ विजय को बधाई दी और नए सरकार से DMK की योजनाओं को जारी रखने की अपील की।
चुनाव से पहले कांग्रेस से तल्ख हुए रिश्ते
यह याद रखा जाना चाहिए कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 38-41 सीटों की मांग डीएमके से की थी जबकि DMK ने शुरुआत में 25 सीटें ऑफर कीं। कई दौर के बाद मार्च 2026 में 28 सीटें + 1 राज्यसभा सीट पर समझौता हुआ, लेकिन यह प्रक्रिया तनावपूर्ण रही। दूसरी ओर कांग्रेस के कुछ नेताओं जैसे मणिक्कम टैगोर गिरीश चन्दरकर ने जीत के बाद कैबिनेट में हिस्सेदारी की बात की, जिसे DMK ने साजिश बताया।
DMK ने साफ कहा कि वो अकेले सरकार चलेगा। चुनाव प्रचार के दौरान दोनों नेता एक स्टेज पर नहीं आए। DMK ने इसे “शेड्यूल इश्यू” बताया, लेकिन कांग्रेस के कुछ नेता सीट बंटवारे और सम्मान की कमी से नाराज थे। मतलब साफ़ है कि TVK को समर्थन यकायक उपजी बात नहीं थी। आत्ममंथन की जरूरत दोनों ओर है।
TVK के समर्थन के बावजूद DMK ने नहीं तोड़ा एलायंस
डीएमके ने जो सबसे बड़ी बात कही वो यह थी कि सहयोगी दल TVK को समर्थन देकर भी DMK-नेतृत्व वाले एलायंस में बने रहेंगे। ऐसा करके स्टालिन ने यह साफ़ संकेत दे दिया कि वो किसी भी कीमत पर बीजेपी के साथ नहीं जाने वाले। स्टालिन की इस कवायद से सर्वाधिक नुकसान बीजेपी की सहयोगी पार्टी AIADMK को हुआ जिसके बारे में यह अफवाह फैलाई जा रही थी कि वो DMK के साथ सरकार बनाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता मणिकम टैगोर कहते हैं कि भले कांग्रेस ने tvk का सहयोग किया हो लेकिन डीएमके के साथ वह इंडिया गठबंधन में मौजूद है हम दोनों की लड़ाई एक ही पार्टी से है। कोई जय पराजय इस लड़ाई को कमजोर नहीं कर सकती। याद रखना चाहिए कि DMK की हार के बाद राहुल गांधी ने सबसे पहले स्टालिन से बात की थी।
इंडिया गठबंधन से दूरी बनाती रहीं ममता
ममता बनर्जी भले ही इंडिया गठबंधन का हिस्सा रही हों लेकिन गठबंधन क़ायम रहे इसके लिए वो कभी सक्रिय कोशिश करती नहीं दिखीं। यहाँ तक कि नीतीश कुमार द्वारा गठबंधन छोड़कर बीजेपी का हाथ पकड़ने के दौरान एक चर्चा जोरों पर थी कि ममता दीदी नीतीश से बातकर स्थिति को बदलने की कोशिश करेंगी लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया। अब जबकि बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम आ गए हैं उनके स्वर बदले हुए हैं वो बार बार साथ मिलकर बीजेपी की ज्यादतियों के ख़िलाफ़ लड़ने की बात कह रही है।
राहुल गांधी ने चुनाव परिणाम के बाद ममता बनर्जी और स्टालिन दोनों से बात की और बंगाल के चुनाव में वोट चोरी की बात कहकर ममता के दावों पर मोहर लगा दी। हालाकि यह भी सच है कि विधानसभा चुनावों से पहले ख़ुद तृणमूल कांग्रेस वोट चोरी के मुद्दे पर गंभीरता के साथ लड़ाई लड़ने के मुड में नजर नहीं आई थी। यहाँ तक कि पिछले संसद के शीतसत्र में वोट चोरी के मुद्दे पर कांग्रेस चर्चा कराना चाहती थी लेकिन टीएमसी और समाजवादी पार्टी ने इससे ख़ुद को अलग कर लिया।
गठबंधन से इंकार का फैसला
ममता ने पहले लोकसभा फिर विधानसभा में बंगाल में कांग्रेस के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि TMC अकेले चुनाव लड़ेगी। कांग्रेस पर ‘दखलंदाजी’ का आरोप लगाया और INDIA गठबंधन को बंगाल में नाम का बताया। ममता ने 2024 में लोकसभा चुनाव के दौरान एक रैली में कह दिया कि बंगाल में INDIA गठबंधन अस्तित्व में नहीं है। उन्होंने दावा किया कि INDIA का नाम उन्होंने ही दिया, लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर कांग्रेस-और वाम दल भाजपा की मदद कर रहे हैं। यह भी सच है कि ममता बनर्जी के ना चाहने की वजह से इस विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ उनका गठबंधन नहीं हो पाया।
चुनावों से पहले जागी ममता
इन तमाम तल्ख़ियों और कांग्रेस के साथ नाजुक संबंधों के बावजूद ममता बनर्जी महिला आरक्षण को लेकर संविधान संशोधन के लिए बुलाए गए सत्र में राहुल गांधी के कहने पर अपने सांसदों को लोकसभा में मौजूद रहने को कहा। इसका असर भी जोरदार रहा सरकार संविधान संशोधन नहीं कर पाई।
चुनाव में हार के बाद ममता बनर्जी ने कहा कि वो जल्द ही सभी विपक्षी दलों के साथ मिलकर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ मुहिम तैयार करेंगी। राहुल गांधी ने भी फ़ोन पर बात कर इस बात के संकेत दिए कि वो लड़ाई में साथ हैं। अभिषेक बैनर्जी ने भी बंगाल से दिल्ली तक लड़ने की बात कही।
सांसद और राजनीतिक विश्लेषक मनोज कुमार झा कहते हैं कि एक बात तो तय है कि इन चुनावों के बाद टीएमसी, डीएमके कांग्रेस,राजद समेत सभी दल एक ही लाइन पर है।मनोज साफ़ कहते हैं कि जब सब एक नाव पर सवार हैं तो लड़ाई आसान है बस जनता की भागीदारी होनी चाहिए।
सड़क पर नदारद कांग्रेस सपा गठजोड़
जहाँ तक अखिलेश यादव का सवाल है बंगाल चुनाव के दौरान और बाद में भी पश्चिम बंगाल गए ममता बनर्जी के पक्ष में भी प्रचार किया और टीएमसी हार के बाद उनसे मुलाक़ात की। 2024 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर शानदार प्रदर्शन करने के बावजूद आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ गठजोड़ को लेकर बही कोई स्पष्ठ स्थिति नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में लंबे अरसे से कांग्रेस और सपा का कोई आंदोलन या मुहिम सड़क पर नजर नहीं आई।
राहुल से ज्यादा अखिलेश गठबंधन के पक्ष में
दोनों ही पार्टियों के नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप करते रहे हैं लेकिन यह भी सच है कि अखिलेश यादव और राहुल गांधी एक दूसरे के साथ संसद के भीतर और बाहर ट्यूंड रहते हैं। तमाम मुद्दों पर लोकसभा में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एक ही लाइन पर नजर आए। हालाकि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव और दिल्ली विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस से अलग लाइन पकड़ ली थी। इन सबके बावेज़ुड राहुल से इतर अखिलेश यादव गठबंधन के लिए प्रतिबद्ध नजर आते हैं। अखिलेश यादव ने कई बार दोहराया है कि INDIA गठबंधन intact है और 2027 UP विधानसभा चुनाव में साथ लड़ेंगे। उन्होंने कहा “जो छोड़ना चाहे छोड़ सकता है, लेकिन हमारा गठबंधन जारी रहेगा।”
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने हाल में अखिलेश पर तीखे बयान दिए (ममता की हार का हवाला देकर BJP से सावधान रहने की सलाह), जिससे थोड़ी नाराजगी हुई। अखिलेश ने इसे खारिज करते हुए कहा कि कोई चिंता नहीं, गठबंधन पर असर नहीं पड़ेगा। UP कांग्रेस ने भी स्पष्ट किया कि 2027 में गठबंधन बना रहेगा।
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