मद्रास हाईकोर्ट के सिटिंग जज के ख़िलाफ़ सौ से अधिक सांसदों का महाभियोग प्रस्ताव पेश

December 9, 2025 6:50 PM

नई दिल्ली। वेद उन लोगों की रक्षा करते हैं जो उनका पालन-पोषण करते हैं यह शब्द किसी नेता या धार्मिक विद्वान के नहीं हैं यह मद्रास हाईकोर्ट के वर्तमान जज जी आर स्वामीनाथन के हैं बतौर जज भारतीय जनता पार्टी के कार्यक्रमों में शामिल होने वाले स्वामीनाथन के खिलाफ सौ से ज़्यादा सांसदों ने महाभियोग (Impeachment) का प्रस्ताव लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने प्रस्तुत किया है।

यह एक अत्यंत दुर्लभ मामला है। गौरतलब है कि किसी जज के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। जस्टिस टी.एस. स्वामीनाथन के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की मुख्य वजह उनका वह हालिया आदेश है, जिसमें उन्होंने तिरुचेंदूर के प्रसिद्ध अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर के श्रद्धालुओं को कार्तिगई दीपम त्योहार के अवसर पर एक दरगाह के निकट दीप जलाने की अनुमति दी थी।

महाभियोग का प्रस्ताव प्रस्तुत करने वालों में प्रियंका गांधी, कनिमोझी, अखिलेश यादव, गौरव गोगोई, असदुद्दीन ओवैसी आदि शामिल हैं। 1 दिसंबर को  न्यायमूर्ति स्वामीनाथन ने कहा  कि दरगाह के निकट हिंदू धर्म स्थल पर प्रशासन को दीप जलाने के आदेश दिए जाते हैं एकल न्यायाधीश ने निष्कर्ष निकाला कि दीपदान स्थल पर दीपक जलाने से निकटवर्ती दरगाह या मुसलमानों के अधिकारों का   किसी भी तरह से उल्लंघन नहीं होगा।

बात यहीं नहीं रुकी जब बाद में न्यायाधीश ने पाया कि इस आदेश का पालन नहीं किया गया। इसलिए, 3 दिसंबर को उन्होंने एक और आदेश पारित करते हुए श्रद्धालुओं को स्वयं दीप जलाने की अनुमति दे दी। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि याचिकाकर्ताओं और अन्य श्रद्धालुओं को उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ से संबद्ध केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) द्वारा सुरक्षा प्रदान की जाए।

3 दिसंबर के इस फैसले को जिला कलेक्टर और शहर पुलिस आयुक्त ने पहले उच्च न्यायालय की खंडपीठ के समक्ष चुनौती दी, जिसने  जस्टिस स्वामीनाथन के निर्देशों को पलटने से इनकार कर दिया ।न्यायमूर्ति जी जयचंद्रन  और  न्यायमूर्ति केके रामकृष्णन की खंडपीठ ने   कहा कि सीआईएसएफ सुरक्षा का आदेश देने में कोई अवैधता नहीं है, जबकि जस्टिस स्वामीनाथन ने पाया कि राज्य मशीनरी ने जानबूझकर 1 दिसंबर के आदेश में निर्देशों को लागू नहीं करने का निर्णय लिया था।

इसके बाद जिला प्राधिकारियों ने इन आदेशों को चुनौती देते हुए सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।एकल न्यायाधीश के आदेश का पालन न करने पर श्रद्धालुओं द्वारा दायर अवमानना याचिका उच्च न्यायालय में लंबित है। न्यायमूर्ति स्वामीनाथन इस अवमानना मामले की अगली सुनवाई 17 दिसंबर को करेंगे। राज्य सरकार के विरोध के बावजूद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है।दीप प्रज्जलवन स्थल पहाड़ी पर सिकंदर बधुशा दरगाह, साथ ही अरुलमिगु सुब्रमण्यम स्वामी मंदिर भी है।

मंदिर के भक्तों ने मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में याचिका दायर कर यह निर्देश देने की मांग की थी कि   पहाड़ी की एक चोटी पर कार्तिगाई दीपम  जलाया जाए। इसके पहले जस्टिस स्वामीनाथन पर जातिगत पूर्वाग्रह के आरोप भी लगे थे। मद्रास उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीशों वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन और न्यायमूर्ति के. राजशेखर शामिल हैं, ने अधिवक्ता एस. वंचिनाथन को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के लिए बुलाया है, जिन्होंने न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन पर सांप्रदायिक और जातिगत पूर्वाग्रह का आरोप लगाया था।न्यायमूर्ति जी.आर. स्वामीनाथन के खिलाफ आरोप लगाने और मुख्य न्यायाधीश से उनकी जांच की मांग के लिए अधिवक्ता वंचिनाथन की याचिका के परिणामस्वरूप उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू कर दी गई । जिसका कई पूर्व जजों ने विरोध किया।

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