नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने आज संसद में होने वाले मतदान के दौरान सभी सांसदों से अपनी अंतरात्मा की आवाज पर मतदान देने को कहा है। उन्होंने कहा है कि मैं सभी सांसदों से कहूंगा आप अपने घर में मां-बहन-बेटी-पत्नी सबका स्मरण करते हुए अपनी अंतरात्मा को सुनिए। विधेयक पास करने के लिए जरूरी नंबर नहीं होने के बाद मोदी ने अंतरात्मका की आवाज पर वोट मांगा है।
भारतीय राजनीति में ‘अंतरात्मा की आवाज’ का सबसे चर्चित प्रयोग पहली बार 1969 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान हुआ था, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कांग्रेस सांसदों और विधायकों से पार्टी लाइन से अलग जाकर अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज’ के आधार पर मतदान करने की अपील की थी।
महत्वपूर्ण है कि संविधान संशोधन से जुड़े इन तीनों बिलों के पास होने के लिए सरकार के पास आवश्यक मत नहीं है।
X पर अपनी पोस्ट में उन्होंने कहा कि देश की नारीशक्ति की सेवा का, उनके वंदन का ये बहुत बड़ा अवसर है। उन्हें नए अवसरों से वंचित नहीं करिए।
पीएम मोदी का कहना था कि ये संशोधन सर्वसम्मति से पारित होगा, तो देश की नारीशक्ति और सशक्त होगी।देश का लोकतंत्र और सशक्त होगा। अंत में उन्होंने कहा ‘आइए, हम मिलकर आज इतिहास रचें। भारत की नारी क, देश की आधी आबादी को उसका हक दें।’
1969 के राष्ट्रपति चुनाव से निकली थी ‘अंतरात्मा की आवाज’
1969 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने कांग्रेस सांसदों और विधायकों से पार्टी लाइन से अलग जाकर अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज’ के आधार पर मतदान करने की अपील की थी।
1969 में राष्ट्रपति जाकिर हुसैन के निधन के बाद देश में नए राष्ट्रपति के चुनाव की घोषणा हुई। उस समय कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी, लेकिन पार्टी के भीतर दो बड़े गुट बन चुके थे। एक गुट प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का और दूसरा गुट पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का, जिन्हें ‘सिंडिकेट’ कहा जाता था। इस सिंडिकेट में के कामराज, एस निजलिंगप्पा, मोरार जी देसाई जैसे बड़े नेता शामिल थे।
कांग्रेस संगठन ने राष्ट्रपति पद के लिए नीलम संजीव रेड्डी को अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया। लेकिन, इंदिरा गांधी इससे सहमत नहीं थीं। उसी समय कार्यवाहक राष्ट्रपति वीवी गिरी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।
इंदिरा गांधी ने खुलकर वी.वी. गिरि का समर्थन तो नहीं किया, लेकिन कांग्रेस सांसदों और विधायकों से कहा कि वे पार्टी व्हिप को न मानते हुए ‘अंतरात्मा की आवाज’ के आधार पर मतदान करें।
इसका मतलब था कि वे कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी की बजाय वी.वी. गिरि को वोट दे सकते हैं।
इस रणनीति का असर हुआ और अंततः वीवी गिरी राष्ट्रपति चुनाव जीत गए, जबकि कांग्रेस के आधिकारिक उम्मीदवार नीलम संजीव रेड्डी हार गए।
यह घटना भारतीय राजनीति में एक बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई। कांग्रेस पार्टी दो हिस्सों में बंट गई। एक गुट बना कांग्रेस (O) और दूसरा गुट बना कांग्रेस (R), जिसका नेतृत्व इंदिरा गांधी ने किया। बाद में यही गुट मुख्य कांग्रेस बन गया।











