तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा के पहले सत्र का औपचारिक संबोधन दिए बिना ही सदन छोड़ कर (Governor RN Ravi walked out) चले गए। एन रवि ने राज्य की द्रमुक सरकार द्वारा तैयार भाषण कथित गलतियों का हवाला देकर पढ़ने से भी इनकार कर दिया। राज्यपाल ने सदन में राष्ट्रगान का अपमान किए जाने का आरोप भी लगाया है।
राज्यपाल रवि और द्रमुक सरकार के बीच यह टकराव नया नहीं है। 2023 के बाद से लगातार यह चौथा साल है जब राज्यपाल रवि ने भाषण पूरा किए बिना ही सदन छोड़ दिया।
सदन का कामकाज शुरू होते ही राज्यपाल रवि ने विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावू, मुख्यमंत्री एम के स्टालिन और सदन में मौजूद सदस्यों का अभिवादन किया। उन्होंने तमिल में नए वर्ष और पोंगल की बधाई दी। इसके बाद सदन में तमिल राज्यगीत तमिल थाई वाजतू का गायन हुआ।
माइक बंद करने का आरोप
राज्यपाल ने आरोप लगाया कि उनके भाषण के दौरान माइक बार-बार बंद किया गया और उन्हें बोलने नहीं दिया गया। विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने उन्हें सदन की परंपरा के अनुसार संबोधन देने का अनुरोध किया और नियमों का पालन करने की सलाह दी लेकिन राज्यपाल ने कहा कि उनका माइक बंद करना उनके पद का अपमान है।
प्रेस रिलीज में 13 कारण बताए
बाद में राज्यपाल कार्यालय ने एक विस्तृत प्रेस रिलीज जारी की। इसमें उन्होंने सरकार द्वारा तैयार किए गए भाषण को पढ़ने से इनकार के 13 मुख्य कारण बताए। इनमें शामिल हैं: माइक बार-बार बंद करना, भाषण में भ्रामक दावे और असत्यापित बातें, निवेश के आंकड़े वास्तविकता से दूर, महिलाओं की सुरक्षा, युवाओं में ड्रग्स, दलितों पर अत्याचार, आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं, शिक्षा की गिरती गुणवत्ता आदि मुद्दों को नजरअंदाज करना, मंदिर प्रबंधन, MSME समस्याएं, ग्राम पंचायत चुनाव न होना जैसे कई गंभीर मुद्दों का जिक्र न होना। सबसे महत्वपूर्ण बात – राज्यपाल ने फिर से कहा कि राष्ट्रगान का अपमान हुआ, जो संवैधानिक कर्तव्य की अवहेलना है।
स्टालिन का पलटवार
दूसरी ओर मुख्यमंत्री स्टालिन ने राज्यपाल रवि पर आरोप लगाया कि उन्होंने परंपरा और कायदों का अपमान कर सदन का बहिष्कार किया है। स्टालिन ने यह भी कहा कि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि राज्यपाल औपचारिक भाषण में अपना नजरिया या अपने शब्द जोड़ें। उन्होंने रवि पर जानबूझकर सदन छोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि यह सदन का अपमान है।








