भारतीय जनता पार्टी ईद के मौके पर देश भर में 32 लाख मुस्लिमों को सौगात-ए-मोदी के नाम से तोहफे दे रही है, उसके इस कदम का यों तो स्वागत ही किया जाना चाहिए, लेकिन मुश्किल यह है कि पार्टी की कथनी और करनी में बड़ा फर्क है। भाजपा शासित उत्तर प्रदेश में मेरठ के एसपी ने ईद और अलविदा जुमे की नमाज को लेकर धमकाने वाले अंदाज में चेतावनी दी है कि सड़कों पर नमाज अता करने वालों पर मुकदमे दर्ज कर उनके पासपोर्ट रद्द कर दिए जाएंगे! इसी सूबे के संभल के एसएचओ अनुज चौधरी होली के दौरान जुमा पड़ने पर पहले ही मुस्लिमों पर एकतरफा कार्रवाई करने की धमकी के कारण चर्चा में आ चुके हैं। चौधरी ने अभी फिर हिदायत दी है कि लोग घरों पर नमाज पड़ें। खुद उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ईद, राम नवमी और चैत नवरात्र को लेकर प्रशासन को शांति कायम करने की हिदायत दी है, लेकिन उनके कार्यकाल में किस तरह से हिन्दुओं और मुस्लिमों के त्योहारों में फर्क किया जाता है, वह किसी से छिपा नहीं। मुख्यमंत्री होने के नाते उनके कई बयान संवैधानिक कसौटी में खरे नहीं उतरते, जैसे उन्होंने कहा था कि जुमा 52 दिन आता है और होली एक दिन। कवि अशोक वाजपेयी ने कई साल पहले देश में एक वर्ग को “दूसरा” बनाने की बढ़ती प्रवृत्ति की शिनाख्त की थी। दुखद यह है कि चुनी हुई सरकारें ऐसा कर रही हैं। इस समय यदि किसी भी सौगात की जरूरत है, तो वह अमन और सद्भाव की सौगात है।
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