नई दिल्ली। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स के वकील के तौर पर रजिस्ट्रेशन पर रोक लगाने के अपने आदेश को कुछ ही घंटों बाद वापस ले लिया। बीसीआई के पहले आदेश के बाद देशभर में इसे लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, बाद में काउंसिल ने स्पष्ट किया कि NALSAR के 2026 बैच के सभी छात्र अपनी पसंद की किसी भी स्टेट बार काउंसिल में नामांकन के लिए आवेदन कर सकेंगे।
मामला NALSAR के दीक्षांत समारोह से जुड़ा है, जिसमें भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्य कांत को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाए जाने का कथित तौर पर कुछ छात्रों ने विरोध किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, 450 से ज्यादा छात्रों ने कुलपति को पत्र लिखकर CJI की समारोह में भागीदारी पर आपत्ति जताई थी।
बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा की ओर से जारी शुरुआती सर्कुलर में सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया गया था कि NALSAR से 2026 में लॉ की डिग्री हासिल करने वाले किसी भी छात्र को अगले आदेश तक वकील के रूप में नामांकित न किया जाए।
बीसीआई ने विश्वविद्यालय से तीन दिन के भीतर विस्तृत और प्रमाणित रिपोर्ट भी मांगी थी। इसमें यह पता लगाने को कहा गया था कि कथित अभियान को किसने शुरू किया, उसका ड्राफ्ट तैयार किया, उसे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलाया, बैठकों का आयोजन किया या छात्रों को लामबंद किया।
काउंसिल ने यह भी पूछा था कि क्या किसी छात्र संगठन, छात्र बार काउंसिल, फैकल्टी सदस्य, रिसर्च स्कॉलर, पूर्व छात्र या किसी बाहरी व्यक्ति की इस अभियान में भूमिका थी।
सिर्फ मांग-पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों पर कार्रवाई नहीं
बीसीआई ने अपने शुरुआती निर्देश में यह भी स्पष्ट किया था कि केवल किसी मांग-पत्र पर हस्ताक्षर करना या उसका समर्थन करना अपने आप में रजिस्ट्रेशन रोकने का आधार नहीं होगा। काउंसिल ने उन छात्रों और लोगों के बीच अंतर करने की बात कही थी, जिन्होंने केवल अपनी राय रखी और जिन्होंने कथित तौर पर अभियान को संगठित या समन्वित किया।
बीसीआई की ओर से यह भी कहा गया था कि देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान का अभाव कानूनी पेशे में प्रवेश की उपयुक्तता से जुड़ा सवाल हो सकता है।
कुछ घंटों बाद बदला फैसला
हालांकि, शुरुआती आदेश जारी होने के कुछ ही घंटे बाद बीसीआई ने अपने सर्कुलर में संशोधन कर दिया। नए संदेश में कहा गया कि NALSAR के 2026 बैच के सभी स्नातक अपनी पसंद की किसी भी राज्य बार काउंसिल में नामांकन के हकदार होंगे।
बीसीआई ने विस्तृत चर्चा के बाद कहा कि उपलब्ध नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार NALSAR के अधिकांश 2026 बैच के छात्र इस कथित विरोध या असम्मानजनक कदम में शामिल नहीं थे और वे इसमें भाग लेने के इच्छुक भी नहीं थे।
इस तरह कुछ ही घंटों में बीसीआई के उस आदेश पर विराम लग गया, जिसने NALSAR के पूरे 2026 बैच के भविष्य को लेकर सवाल खड़े कर दिए थे।
पूर्व जस्टिस काटजू ने बताया असंवैधानिक
बीसीआई के शुरुआती आदेश की आलोचना भी सामने आई थी। पूर्व जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने द लेंस से बातचीत में इसे असंवैधानिक बताया था। आदेश वापस लिए जाने के बाद अब पूरा विवाद उन छात्रों की भूमिका की जांच और विरोध के अधिकार बनाम कानूनी पेशे की गरिमा के सवाल पर केंद्रित हो गया है।
अब बीसीआई की ओर से मांगी गई रिपोर्ट और 19 अगस्त को होने वाली अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल इतना साफ है कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को बार काउंसिल में नामांकन का रास्ता फिर से खोल दिया गया है।







