भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्वी अंचल में मानव और हाथी के बीच छिड़ा संघर्ष अब एक तरफा खूनी खेल में तब्दील हो चुका है। छत्तीसगढ़ की सीमाओं से सटे अनूपपुर और शहडोल जिलों में जंगली हाथियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि ग्रामीण सूरज ढलते ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।
सबसे चौंकाने वाला और विचलित करने वाला तथ्य यह है कि अनूपपुर जिला प्रदेश के वन मंत्री दिलीप अहिरवार के प्रभार वाला जिला है। विडंबना देखिए कि जिस जिले की कमान खुद उस विभाग के मुखिया के हाथों में है जिसे हाथियों के प्रबंधन और वन्यजीव सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी गई है, वहीं के ग्रामीण सबसे ज्यादा असुरक्षित हैं।
पिछले एक साल का आंकड़ों पर नजर डालें तो वन विभाग के सारे दावों की पोल खुल जाती है। मई 2025 से लेकर अप्रैल 2026 के बीच गजराज के गुस्से ने छह घरों के चिराग बुझा दिए, लेकिन करोड़ों के बजट पर कुंडली मारकर बैठे वन विभाग के पास आज भी ग्रामीणों को केवल अलर्ट करने के अलावा कोई ठोस रणनीति नहीं है। गुरुवार की सुबह भी अनूपपुर जिले के कुसुमहाई गांव में एक जंगली हाथी के हमले में 23 वर्षीय युवती जानकी कोल की मौत हो गई।
बदलते साल के साथ बढ़ता गया मौत का ग्राफ

जैसे-जैसे साल बदल रहा है हाथियों का तांडव और भी उग्र होता जा रहा है। 16 जनवरी 2026 को अनूपपुर के चोइला गांव के पास 80 वर्षीय बुजुर्ग हंसलाल राठौर, हाथियों के दल की चपेट में आ गए और अस्पताल में दम तोड़ दिया। विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे करारा तमाचा इसी महीने 26 अप्रैल 2026 को लगा, जब जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर दूर भोलगढ़ के जंगलों में 30 वर्षीय प्रेमवती पाव को एक जंगली हाथी ने मौत के घाट उतार दिया। जबकि उनके पति रामानुज पाव और 6 वर्षीय दीपक पाव को घायल कर दिया था।
गुरुवार की सुबह अनूपपुर जिले के कुसुमहाई गांव में एक जंगली हाथी ने सुबह 5 बजे एक युवती पर हमला कर दिया। इस हमले में 23 वर्षीय युवती जानकी कोल की मौत हो गई। वहीं बुधवार की रात एक नाबालिग पर भी हाथी ने हमला किया था इसमें वह घायल हो गया था। नाबालिग के अनुसार हाथी ने उसे कुचलने की कोशिश की लेकिन, झाड़ियों में छुपे होने के चलते उसकी जान बच गई। कई बार हाथियों का समूह जैतहरी शहर के बाजार तक पहुंच चुका है। जिससे शहर के लोगों में भी दहशत का माहौल है।
हाथी मानव–संघर्ष में मौत की टाइम लाइन

- 19 मई 2025: शहडोल के गोडावल वन क्षेत्र में सुबह-सुबह तेंदू पत्ता बीनने गए ग्रामीणों पर हाथियों ने हमला किया। एक ही दिन में 3 लोगों उमेश कोल, देवगनिया बैगा, और मोहनलाल पटेल को हाथियों ने कुचल दिया था।
- मई 2025: अनूपपुर जिले के जैतहरी वन परिक्षेत्र में छत्तीसगढ़ की सीमा से घुसे हाथियों ने 1 ग्रामीण को अपना शिकार बनाया था।
- 16 जनवरी 2026: अनूपपुर के चोइला गांव के पास 80 वर्षीय बुजुर्ग हंसलाल राठौर को हाथियों ने हमला कर दिया था। अस्पताल में इलाज के दौरान हंसलाल की जान चली गई।
- 26 अप्रैल 2026: अनूपपुर जिला मुख्यालय से महज 8 किमी दूर भोलगढ़ में खेत से घर लौट रही प्रेमवती पाव को हाथी ने पटक-पटक कर मार डाला। उनका बच्चा और पति को गंभीर चोटें आईं।
अन्नदाताओं को दोहरी मार
इन जंगली हाथियों ने सिर्फ जान की ही नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक कमर भी पूरी तरह तोड़ दी है। पिछले एक साल में करीब 700 एकड़ से अधिक की लहलहाती फसलें हाथियों के पैरों तले रौंद दी गईं हैं। लेकिन, विभाग का सुस्त अमला मुआवजे के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति करता है। करीब 55 से ज्यादा परिवारों के आशियाने हाथियों ने उजाड़ दिए हैं। विभाग का 47.11 करोड़ का भारी-भरकम एलिफेंट मैनेजमेंट प्लान कहां हवा हो गया। रेडियो कॉलरिंग और हाथी मित्रों की फौज सिर्फ कागजों तक सीमित नजर आती है।
सरकार हाथियों के लिए सेफ कॉरिडोर का निर्माण करे
वाइल्ड लाइफ एक्टिविस्ट अजय शंकर दुबे ने द लेंस से कहा कि जितना हक जंगलों पर ग्रामीणों का है उससे ज्यादा हक हाथियों का है। इसके लिए सरकार को तत्काल हाथियों के लिए बने कॉरिडोर को क्लियर करना चाहिए। 2018 से ही हाथियों ने मध्यप्रदेश के इन इलाकों में अपना घर बना लिया है। वन विभाग और सरकार द्वारा जो भू अधिकार पट्टा दिया जाता है उस पर रोक लगानी चाहिए। चूंकि जंगल काटे जा रहें हैं तो हाथी नई जगहों की तलाश में हैं और इस ओर आ रहें हैं। लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है। हाथी मानव संघर्ष में हाथियों को भी नुकसान होता है यदि घर टूट रहें हैं और जान जा रही है तो दूसरी ओर हाथियों को भी चोटें पहुंचती है जिससे हमला होने का चांस बढ़ जाता है।
करोड़ों का बजट और विभाग की संवेदनहीनता
वन विभाग ने हाथियों के प्रबंधन के लिए ₹47.11 करोड़ की योजना का ढिंढोरा पीटा था, लेकिन धरातल पर सच्चाई शून्य है। PIB की आधिकारिक रिपोर्टों के अनुसार, पिछले 5-6 वर्षों में मध्यप्रदेश में हाथियों के हमले से हुई मौतों का आंकड़ा 30 के पार पहुंच चुका है। यह आंकड़े इस बात की तस्दीक करते हैं कि वन विभाग अब तक हाथियों के लिए कोई स्थायी कॉरिडोर बनाने या उनके भोजन-पानी की व्यवस्था जंगलों के भीतर करने में पूरी तरह नाकाम रहा है। जब तक सही कदम नहीं उठाए जाएंगे अनूपपुर और शहडोल के जंगलों से होने वाले हाथी–मानव संघर्ष का सिलसिला थमने वाला नहीं है। शासन को अब मुआवजे से आगे बढ़कर ग्रामीणों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित करनी होगी।
मरहम या महज औपचारिकता?
सरकार ने शहडोल की मई 2025 की घटना के बाद मुआवजे की राशि को विशेष प्रकरण मानकर 25 लाख रुपये तक बढ़ाया था, लेकिन सामान्यतः यह राशि 8 लाख रुपये ही निर्धारित है। ऐसे में ग्रामीणों और मृतकों के परिवारों को यह राशि समय पर नहीं मिलती है। इससे पीड़ित दफ्तरों के चक्कर ही काटते रह जाते हैं।
वन विभाग अलर्ट पर
अनूपपुर जिले के वन मंडलाधिकारी डी वेंकटराव ने द लेंस से हुई बातचीत में बताया कि लगातार हाथियों के मूमेंट वाले इलाकों में गश्ति दल तैनात हैं। छत्तीसगढ़ से 5 हाथियों का समूह यहां मौजूद है। हमने अलग– अलग टीमें गठित की हैं जो गांवों में जाकर ग्रामीणों को जानकारी दे रहीं हैं। हाथियों के विचरण वाले क्षेत्रों में ग्रामीणों को जाने से रोका जा रहा है। अलार्म सिस्टम और अनाउंसमेंट के माध्यम से लोगों को जानकारी दी रही है।











