रायपुर। हसदेव अरण्य के तारा कोल ब्लॉक (Tara Coal Block) की नीलामी को लेकर छत्तीसगढ़ में सियासी विवाद और तेज हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भाजपा सरकार पर तारा कोल ब्लॉक को अडानी समूह से जुड़ी कंपनी को दिए जाने का रास्ता साफ करने का आरोप लगाते हुए पूछा है कि आखिर साय सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को केंद्र सरकार को तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के लिए पत्र क्यों लिखा?
दीपक बैज ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने 23 जून 2023 को तारा समेत हसदेव क्षेत्र के 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था। इसके विपरीत भाजपा सरकार के कार्यकाल में 11 दिसंबर 2025 को केंद्र को तारा कोल ब्लॉक को आगामी नीलामी में शामिल करने का अनुरोध किया गया।
केंद्र सरकार ने अपने 11 सितंबर 2026 के आधिकारिक स्पष्टीकरण में भी इस बात की पुष्टि की है कि उसे 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार का पत्र मिला था, जिसमें कहा गया था कि तारा कोल ब्लॉक लेमरू एलीफेंट कॉरिडोर से बाहर है और इसे आगामी नीलामी में शामिल किया जा सकता है। इसके बाद CMPDIL ने ब्लॉक की सीमा में संशोधन किया और तारा (रिवाइज्ड) को नीलामी में शामिल किया गया।
दीपक बैज ने कहा कि 26 जुलाई 2022 को छत्तीसगढ़ विधानसभा ने सर्वसम्मति से हसदेव अरण्य में आवंटित कोल ब्लॉकों को रद्द करने और नए कोल ब्लॉक आवंटन/नीलामी नहीं करने की मांग वाला प्रस्ताव पारित किया था।
इसके बाद 23 जून 2023 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर तारा समेत 9 कोल ब्लॉकों को नीलामी से अलग रखने की मांग की थी।
दीपक बैज ने भाजपा से पूछा कि ‘जब कांग्रेस सरकार ने तारा को नीलामी से बाहर रखने के लिए केंद्र को पत्र लिखा था, तो भाजपा सरकार ने 11 दिसंबर 2025 को तारा को नीलामी में शामिल करने की अनुशंसा क्यों की?’
कांग्रेस का आरोप – अडानी से जुड़ी कंपनी को मिला ब्लॉक
तारा (रिवाइज्ड) कोल ब्लॉक की नीलामी में सीजी सिन-गैस एंड कैमिकल्स सफल बोलीदाता रही। दीपक बैज ने मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से आरोप लगाया कि यह कंपनी अडानी समूह से जुड़ी है। सीजी सिन-गैस एंड कैमिकल्स कंपनी मुंद्रा सिनर्जी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है और मुंद्रा सिनर्जी का संबंध अडानी समूह से है।
दीपक बैज ने इसी कड़ी को उठाते हुए आरोप लगाया कि भाजपा की डबल इंजन सरकार छत्तीसगढ़ के जल, जंगल और जमीन को अडानी समूह के हवाले करने का रास्ता तैयार कर रही है।
उन्होंने कहा कि हसदेव अरण्य जैसे संवेदनशील वन क्षेत्र में कोयला खनन का असर केवल जमीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जंगल, हाथियों के आवागमन और स्थानीय पर्यावरण पर भी पड़ेगा।
10 लाख से ज्यादा पेड़ों की कटाई का बताया खतरा
पीसीसी चीफ ने दावा किया कि तारा कोल ब्लॉक लगभग 5 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला है और इसमें 4 हजार एकड़ से अधिक घना जंगल है। कांग्रेस का दावा है कि खनन के लिए 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का खतरा है।
उन्होंने कहा कि तारा क्षेत्र लेमरू एलीफेंट रिजर्व और हाथियों के आवागमन वाले इलाके के आसपास है। ऐसे में खनन से हाथियों के प्राकृतिक कॉरिडोर और अन्य वन्यजीवों पर गंभीर असर पड़ सकता है।
हालांकि, 10 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई का आंकड़ा कांग्रेस का दावा है, इसलिए इसे सरकारी रूप से प्रमाणित आंकड़े के रूप में नहीं बल्कि कांग्रेस के आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
तारा कोल ब्लॉक की नीलामी के बाद भाजपा और राज्य सरकार की ओर से यह कहा जा रहा है कि अभी केवल नीलामी हुई है। खनन शुरू करने के लिए पर्यावरण और वन स्वीकृति समेत कई वैधानिक प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।
दीपक बैज ने इस तर्क को खारिज करते हुए भाजपा सरकार से पूछा – क्या राज्य सरकार गारंटी देगी कि तारा कोल माइंस के लिए पर्यावरण स्वीकृति नहीं दी जाएगी? क्या सरकार यह गारंटी देगी कि तारा में कोयला उत्खनन नहीं होने दिया जाएगा?
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यदि सरकार को वास्तव में हसदेव के जंगल और पर्यावरण की चिंता है, तो उसे स्पष्ट करना चाहिए कि वह आगे की स्वीकृतियों में क्या रुख अपनाएगी।









