रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2020 और 2021 की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने अपर कलेक्टर चेतन बोरघरिया को गिरफ्तार किया है। ईडी के मुताबिक, जांच के दौरान बोरघरिया के बैंक खाते में संबंधित अवधि में 170 अलग-अलग लेन-देन के जरिए कुल 66.64 लाख रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई है।

ईडी ने 14 सितंबर को जारी प्रेस रिलीज में बताया कि यह जांच EOW/ACB रायपुर में दर्ज FIR के आधार पर शुरू हुई थी। मामला CGPSC की राज्य सेवा परीक्षा 2020 और 2021 में कथित भ्रष्टाचार, हेरफेर और प्रश्नपत्रों से जुड़ी अनियमितताओं से संबंधित है।
ईडी के प्रेस नोट में बताया गया है कि जिस अवधि में कथित लेन-देन और प्रश्नपत्रों से जुड़ी गतिविधियां हुईं, उस दौरान चेतन बोरघरिया मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के रूप में पदस्थ थे।
उपलब्ध रिपोर्टों में उनकी पहचान तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के OSD के तौर पर की गई है।
ईडी के दस्तावेज में बोरघरिया के संबंध में कहा गया है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में OSD के रूप में उनकी तैनाती का इस्तेमाल कथित तौर पर कुछ आपराधिक गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया गया।
तीन लोगों पर 3 करोड़ से ज्यादा की वसूली का आरोप
ईडी के मुताबिक, उत्कर्ष चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और डॉ. विकास चंद्राकर ने CGPSC राज्य सेवा परीक्षा 2021 के उम्मीदवारों से 3 करोड़ रुपये से अधिक की कथित अवैध वसूली की।
जांच एजेंसी का आरोप है कि इन लोगों ने उम्मीदवारों को परीक्षा में प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने और चयन सुनिश्चित करने का भरोसा दिया था।
ईडी ने बताया कि कुछ उम्मीदवारों को कथित तौर पर प्रश्नपत्र पहले उपलब्ध कराए गए। इनमें सिद्धि विनायक मैरिज पैलेस, रायपुर में प्रारंभिक परीक्षा से पहले लीक प्रश्नपत्र कथित रूप से बांटे जाने का भी उल्लेख है।
इसके बाद उम्मीदवारों को बरनावापारा अभयारण्य स्थित एक रिसॉर्ट में ले जाने और मुख्य परीक्षा से संबंधित लीक प्रश्नपत्रों के आधार पर कोचिंग दिए जाने की बात जांच में सामने आई है।
ओएसडी के खाते में 170 लेन-देन
ईडी के अनुसार, वित्तीय जांच में चेतन बोरघरिया के बैंक खाते में 170 अलग-अलग ट्रांजेक्शन के जरिए 66.64 लाख रुपये जमा होने की जानकारी सामने आई।
एजेंसी इन लेन-देन के स्रोत और कथित अवैध गतिविधियों से इनके संबंध की जांच कर रही है।
ईडी ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान फिगर केव ई कॉम से जुड़े वित्तीय लेन-देन सामने आए हैं। एजेंसी के मुताबिक इस कंपनी का इस्तेमाल कथित तौर पर अपराध से हासिल रकम को वैध दिखाने के लिए किया गया हो सकता है।
ईडी ने बताया कि 1 सितंबर 2026 को चेतन बोरघरिया के परिसरों पर तलाशी ली गई थी। तलाशी के दौरान मोबाइल फोन सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए गए। फोरेंसिक जांच में जब्त डिजिटल डिवाइस से चेतन बोरघरिया और उत्कर्ष चंद्राकर के बीच बातचीत सामने आने की बात ईडी ने कही है।
जांच एजेंसी के मुताबिक इन बातचीत में कथित अवैध गतिविधियों, ब्याज समेत रकम की वापसी और भुगतान की मांग से संबंधित बातें मिली हैं।
CBI भी कर चुकी है जांच
CGPSC परीक्षा-2021 में कथित गड़बड़ी के मामले की जांच पहले CBI भी कर चुकी है। ईडी ने अपने प्रेस रिलीज में कहा है कि CBI ने तत्कालीन CGPSC अध्यक्ष टीएस सोनवानी सहित अन्य लोगों के खिलाफ जांच कर चार्जशीट दाखिल की थी।
ईडी ने इसी मामले से जुड़े EOW की FIR के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
ईडी ने बताया कि चेतन बोरघरिया को PMLA की धारा 19 के तहत 11 सितंबर 2026 को गिरफ्तार किया गया। उन्हें विशेष अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां अदालत ने आगे की पूछताछ के लिए ED की कस्टडी मंजूर की। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्हें सात दिन की कस्टोडियल रिमांड पर भेजा गया है।









