रायपुर। अंध श्रद्धा निर्मूलन समिति के अध्यक्ष और नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश मिश्र ने गणेशोत्सव (Ganeshotsav) को डीजे और तेज शोर से मुक्त रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक परंपरा का पर्व है। इसका उद्देश्य लोगों को जोड़ना और आपसी भाईचारा बढ़ाना होना चाहिए। डॉ. मिश्र ने कहा कि महाराष्ट्र के सोलापुर में पिछले वर्ष डीजे मुक्त गणेशोत्सव की पहल हुई थी। इस वर्ष पुणे में भी ऐसी आवाज उठी है।
शोर से स्वास्थ्य पर असर
डॉ. मिश्र ने कहा कि तेज आवाज में डीजे बजने से बुजुर्गों, बच्चों, विद्यार्थियों और बीमार लोगों को परेशानी होती है। इससे नींद में बाधा, तनाव, चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक उत्सवों में स्वास्थ्य और नागरिक सुविधा का भी ध्यान रखना जरूरी है। उनका कहना है कि जिस उत्सव से खुशी और शांति मिलनी चाहिए, अगर वही आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बने तो उसके स्वरूप पर विचार किया जाना चाहिए।
नियमों का पालन जरूरी
डॉ. मिश्र के अनुसार धार्मिक आयोजन करने की स्वतंत्रता सभी को है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि दूसरे लोगों की शांति और सुविधा प्रभावित हो। उन्होंने ध्वनि प्रदूषण और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े न्यायालय के निर्देशों का पालन करने की जरूरत बताई। साथ ही गणेश पंडालों के कारण होने वाली यातायात समस्या पर भी ध्यान देने की बात कही। उन्होंने कहा कि पंडाल लगाने के दौरान सड़क, पैदल यात्रियों और एंबुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं के लिए पर्याप्त जगह छोड़ी जानी चाहिए।
संस्कृति और खेलों को मिले बढ़ावा
डॉ. मिश्र ने गणेशोत्सव में साहित्य, कला, खेल और लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम कराने की अपील की। उन्होंने निबंध, भाषण, कविता, चित्रकला और सामान्य ज्ञान प्रतियोगिताओं के साथ कबड्डी, खो-खो, शतरंज और अन्य खेल कराने का सुझाव दिया। उनका कहना है कि फिल्मी गानों और फूहड़ प्रस्तुतियों के बजाय भजन, लोकगीत, लोकनृत्य और नाटक को मंच दिया जाना चाहिए। उन्होंने छत्तीसगढ़ की नाचा और पंडवानी जैसी लोककलाओं को भी गणेशोत्सव का हिस्सा बनाने की बात कही।
उत्सव में सामाजिक संदेश भी हो
डॉ. मिश्र का कहना है कि गणेशोत्सव के माध्यम से नशामुक्ति, सड़क सुरक्षा, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण, रक्तदान, नेत्रदान, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लोगों को जागरूक किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि उत्सव की पहचान शोर और दिखावे से नहीं, बल्कि आस्था, संस्कार और सामाजिक सद्भाव से होनी चाहिए। उन्होंने लोगों से इस बार डीजे मुक्त और व्यवस्थित गणेशोत्सव मनाने की अपील की। उनका संदेश है कि शोर नहीं, संस्कार गूंजें और आस्था के साथ दूसरों की शांति का भी ध्यान रखा जाए।










