नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (CBSE) परीक्षाओं में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में हुई गड़बड़ी को लेकर कांग्रेस पार्टी ने पीएम मोदी से 10 सवाल पूछे हैं। इस बीच नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से सीबीएसई के छात्रों ने मुलाकात की है।
राहुल गांधी ने x पर छात्रों के साथ मुलाकात को लेकर लिखा है कि वेदांत और उसके दोस्त प्रतिभाशाली, साहसी युवा भारतीय हैं जिन्होंने सीबीएसई और मोदी सरकार से सरल प्रश्न पूछे – लेकिन उन्हें उत्तरों के बजाय अपमान मिला। वे एक उज्ज्वल और सुरक्षित भविष्य के हकदार हैं। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि उन्हें वह मिले।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा है कि CBSE कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत और अन्य जगहों पर प्रकाशित रिपोर्ट ने अब कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में On Screen Marking System (OSM) लागू करने को लेकर CBSE की मंशा और तैयारी पर और गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कांग्रेस के दस सवाल
जय राम रमेश ने कहा कि अब दस महत्वपूर्ण सवाल सामने आते हैं -जिनके जवाब लाखों बच्चों के माता-पिता और देश के युवा प्रधानमंत्री से मांग रहे हैं, जो कि सॉलिसिटर जनरल के अनुसार व्यक्तिगत रूप से इस पूरी गड़बड़ी की निगरानी कर रहे हैं।
1. CBSE कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं में OSM लागू करने को लेकर इतना अड़ा हुआ क्यों था कि उसने बोर्ड परीक्षाओं से केवल 74 दिन पहले पूरी प्रक्रिया को जल्दबाजी में आगे बढ़ाया?
2. दिल्ली के पांच स्कूलों में किए गए OSM ड्राई रन में CBSE ने कम से कम 36 तकनीकी, संचालन संबंधी और मूल्यांकन से जुड़ी चिंताओं को चिन्हित किया था। बोर्ड परीक्षाओं से पहले इन चिंताओं पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
3. OSM प्रणाली का कॉन्ट्रैक्ट देने के लिए CBSE ने तीन RFP जारी किए। तीसरे RFP में वह प्रावधान क्यों हटा दिया गया, जिसके तहत खराब प्रदर्शन का रिकॉर्ड रखने वाले बिडर्स (टेंडर में हिस्सा लेने वाली कंपनियों) को अयोग्य ठहराया जाना था? क्या यह COEMPT को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया, जिसे पहले तेलंगाना में ब्लैकलिस्ट किया जा चुका था?
4. वह प्रावधान क्यों कमजोर किया गया, जिसके तहत पहले ब्लैकलिस्ट किए जा चुके बिडर्स को बाहर रखा जाना था, और उसे बदलकर केवल वर्तमान में ब्लैकलिस्ट बिडर्स तक सीमित कर दिया गया?
5. क्या बिडर के लिए न्यूनतम कंपनी टर्नओवर 50 करोड़ रुपये इसलिए तय किया गया ताकि COEMPT (जिसका तीन वर्षों का औसत टर्नओवर 50.86 करोड़ रुपये था) इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए योग्य ठहर सके?
6. कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन लेवल को Level 5 से घटाकर Level 3 क्यों किया गया?
7. प्रोजेक्ट क्राइटेरिया में बदलाव कर ऐसे वेंडर्स को प्राथमिकता क्यों दी गई, जिनके पास छोटे और बिखरे हुए विश्वविद्यालय कॉन्ट्रैक्ट्स का अनुभव था, बजाय उन वेंडर्स के जिनके पास बड़ी संख्या में छात्रों से जुड़े काम का अनुभव था?
8. RFP के प्रावधानों को कॉन्ट्रैक्टर्स के अपने डेटा सेंटर्स रखने की शर्त से बदलकर MeitY एम्पैनल्ड डेटा सेंटर्स तक सीमित क्यों किया गया? क्या यह व्यवस्थित रूप से COEMPT को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया, जो AWS (MeitY empanelled) का उपयोग करता था, जबकि TCS के पास अपने डेटा सेंटर्स हैं?
9. अगर कॉन्ट्रैक्टर गलती करें, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के अपने अधिकार से CBSE ने पीछे हटने का फैसला क्यों किया?
10. स्कोर मैट्रिक्स की तकनीकी और संचालन क्षमता में बदलाव कर अलग-अलग वेंडर्स को फायदा पहुंचाने की कोशिश क्यों की गई?
अब यह लगातार स्पष्ट होता जा रहा है कि CBSE द्वारा कक्षा 12 बोर्ड परीक्षाओं की योजना और क्रियान्वयन में अक्षमता, भ्रष्टाचार और असंवेदनशीलता का चौंकाने वाला मिश्रण शामिल था। मंत्री प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए और इस उभरते हुए घोटाले की पूरी CBI जांच कराई जानी चाहिए।










