दिवंगत मशहूर व्यंगकार शरद जोशी का एक चर्चित व्यंग्य है, जीप पर सवार इल्लियां। कथा कुछ यूं है कि खबर फैलती है कि चने के खेतों में इल्लियां लग गई हैं और सारा चना चट कर गई हैं। फरमान जारी होते हैं और फिर दिल्ली से अफसर जीप पर सवार होकर गांव की ओर जाते हैं। यह पूरा अभियान इल्ली उन्मूलन के नाम से चलाया जाता है। अफसर मुआयना करते हैं और फिर अपनी जीप में हरे चने का ढेर लेकर लौट जाते हैं।
दरअसल इन बरसों में कुछ भी नहीं बदला है। बदला सिर्फ यह है कि जो बात व्यंजना या व्यंग्य में शरद जोशी ने कही थी उसे छत्तीसगढ़ में हकीकत में देखा जा सकता है!
छत्तीसगढ़ के कवर्धा जिले के पंडरिया ब्लॉक में 26 हजार क्विंटल धान की गड़बड़ी पाई गई है और पता यह चला है कि संबंधित लोगों ने इसके लिए चूहों और दीमक को जिम्मेदार ठहराया है!
यह मामला 2024-25 का है, जहां संगृहीत धान की माप में कमी पाई गई थी। जिला विपणन अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि चूहे, दीमक, कीड़े और मौसम की खराबी के कारण धान खराब हो गया।
वास्तविकता यह है कि देश में धान का कटोरा कहलाने वाले छत्तीसगढ़ में सियासत से लेकर संस्कृति तक के केंद्र में धान है। यहां धान की सियासत में सरकारें तक बदल चुकी हैं।
छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह को तो दो रुपये किलो चावल वाली योजना के कारण ‘चाउर वाले बाबा’ तक कहा गया था। बेशक इस तरह की योजना की शुरुआत किसी समय एन टीआर ने की थी, लेकिन देश में आज व्यापक रूप से जिस सस्ते अनाज या मुफ्त राशन का सरकारी मॉडल चल रहा है, उसमें छत्तीसगढ़ के दो रुपये किलो चावल वाली शर्तिया चुनाव जीतने वाली योजना की भी भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता।
वास्तव में धान छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी है। इसके बावजूद किसानों को धान की खरीद के मौसम में अक्सर अधिकारियों और बड़े व्यापारियों की मनमानी का सामना करना पड़ता है।
हर साल सरकारी खरीद के बाद धान के रखरखाव की समस्या आम है। खुले में रखा धान खराब हो जाता है। और जाहिर है, इसकी आड़ में भ्रष्टाचार का खुला खेल चलता है।
ताजा मामला यह है कि छत्तीसगढ़ के कई केंद्रों में समय पर उठाव नहीं होने पर धान खराब हो रहा है। बात व्यंग्य की नहीं चिंता की है, क्योंकि धान की खरीद में बरती जाने वाली अनियमितता के कारण कोरबा जिले से खबर है कि एक किसान ने खुदकुशी की कोशिश की है।
क्या सरकार सुन रही है?










