रायपुर। छत्तीसगढ़ के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग (Durg University) के कुलसचिव भूपेंद्र कुमार कुलदीप एक बार फिर विवादों में घिर गए हैं। इस बार मामला विश्वविद्यालय की एक महिला दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी के शोषण और वित्तीय अनियमितता से जुड़ा है और मामला पुलिस के पास पहुंच गया है। दुर्ग आईजी अभिषेक शांडिल्य और एसएसपी दुर्ग विजय अग्रवाल से इसकी शिकायत की गई है।
खास बात यह है कि शिकायत किसी बाहरी व्यक्ति ने नहीं, बल्कि जांच पूरी होने के बाद फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट को विश्वविद्यालय ने पुलिस को भेजा है। फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विश्वविद्यालय ने पत्र लिखकर कुलसचिव के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की है।
विश्वविद्यालय की ओर से 31 जुलाई 2026 को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि महिला कर्मचारी द्वारा लगाए गए आरोपों की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने जांच की, जिसमें आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए। इसके बाद पूरे मामले में कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
महिला कर्मचारी ने लगाए थे ये गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता शुभांगी मराठे, जो विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, ने कुलपति को दिए आवेदन और शपथपत्र में आरोप लगाया था कि कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप ने उन्हें विश्वविद्यालय के प्रशासनिक कार्यों के बजाय अपने सरकारी बंगले पर घरेलू कामों जैसे खाना बनाना और अन्य निजी कार्यों के लिए लगा रखा था।
महिला का आरोप है कि विश्वविद्यालय से मिलने वाला उसका पूरा वेतन भी उसे नहीं दिया जाता था। हर महीने करीब 11 हजार रुपए वेतन खाते में आने के बाद लगभग 2,200 रुपए ही उसके पास रहने दिए जाते थे, जबकि शेष राशि नौकरी से हटाने के डर और दबाव में कुलसचिव के बेटे उदय प्रताप कुलदीप के खाते में फोन पे के माध्यम से ट्रांसफर कराई जाती थी। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि उसे दबाव डालकर रकम ट्रांसफर कराए जाते थे।
बता दें कि कुलसचिव का बेटा उदय प्रताप कुलदीप डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है।
जांच समिति ने क्या पाया?
शिकायत के बाद विश्वविद्यालय ने 29 जुलाई 2026 को तीन सदस्यीय फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की। समिति ने महिला कर्मचारी के आवेदन, शपथपत्र, बैंक स्टेटमेंट और फोन पे ट्रांजेक्शन का मिलान किया।
जांच रिपोर्ट के अनुसार फरवरी 2025 से जुलाई 2026 लगभग 17 महीने में विश्वविद्यालय ने शुभांगी मराठे को करीब 1 लाख 77 हजार रुपए का भुगतान किया। इसमें से करीब 1 लाख 49 हजार रुपए कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप के बेटे उदय प्रताप कुलदीप के खाते में ट्रांसफर की गई राशि। यानी कुल वेतन का लगभग 84.3 प्रतिशत दूसरे खाते में भेजा गया। महिला कर्मचारी के पास औसतन केवल 1,632 रुपए ही हर महीने बचते थे। सभी 17 में से 17 लेन-देन बैंक रिकॉर्ड और फोन पे ट्रांजेक्शन से सत्यापित पाए गए।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि वेतन खाते में आने के 1 से 3 दिनों के भीतर नियमित रूप से राशि ट्रांसफर की जाती थी, जिससे समिति ने इसे सुनियोजित और लगातार अपनाई गई प्रक्रिया माना।
कुलपति ने पुलिस को भेजा पूरा रिकॉर्ड
जांच रिपोर्ट मिलने के बाद कुलपति प्रो. संजय तिवारी ने पुलिस महानिरीक्षक, दुर्ग रेंज और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, दुर्ग को पत्र भेजकर कुलसचिव के खिलाफ उचित धाराओं में एफआईआर दर्ज करने का अनुरोध किया है।
पुलिस को भेजे गए दस्तावेजों में महिला कर्मचारी का आवेदन, शपथपत्र, फैक्ट फाइंडिंग कमेटी की रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट, फोन पे ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट और उदय प्रताप कुलदीप के खाते में हुए ट्रांसफर की डिटेल भेजी गई है।
अब यह मामला पुलिस के पास पहुंच चुका है। यदि शिकायत और विश्वविद्यालय की जांच रिपोर्ट के आधार पर एफआईआर दर्ज होती है तो कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यह मामला न केवल महिला कर्मचारी के कथित शोषण बल्कि सरकारी वेतन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितता से भी जुड़ा हुआ है।
जांच रिपोर्ट आने और पुलिस में शिकायत किए जाने के बाद इस मामले में कुलसचिव भूपेंद्र कुलदीप से उनका पक्ष लेने की कोशिश की गई। उन्हें कॉल भी किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल् रिसीव नहीं किया।
पहले भी लग चुके हैं वित्तीय अनियमितताओं के आरोप
इससे पहले भी डॉ. भूपेंद्र कुलदीप पर आरोप लग चुके हैं। हाल ही में उच्च शिक्षा संचालनालय ने सरकारी वाहन के कथित निजी उपयोग, दुर्घटनाग्रस्त वाहन की मरम्मत में नियमों की अनदेखी, बीमा दावा नहीं करने और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों पर कुलसचिव डॉ. भूपेंद्र कुलदीप को कारण बताओ नोटिस जारी कर सात दिन में जवाब मांगा है। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
इसके अलावा डॉ. भूपेंद्र कुलदीप की पीएचडी डिग्री को लेकर भी शिकायतें जांच के दायरे में हैं। करीब 21 महीने में पीएचडी पूरी होने, शोध अवधि और शोध निर्देशक (गाइड) की पात्रता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मामले की शिकायत यूजीसी तक भेजी गई है और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।









