ब्रेकिंग: गुजरात हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के डिग्री के सवाल को बताया RTI प्रक्रिया का दुरुपयोग

नई दिल्ली | गुजरात (Gujrat) हाईकोर्ट ने मंगलवार को अरविंद केजरीवाल की उस अपील को खारिज कर दिया जिसमें उन्होंने 2023 के एकल न्यायाधीश के फैसले को चुनौती दी थी। उस फैसले में केंद्रीय सूचना आयोग के उस निर्देश को रद्द कर दिया गया था जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्रियों संबंधी जानकारी सार्वजनिक करने को कहा गया था।
मुख्य न्यायाधीश सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति डी.एन. रे की खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश के फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई और अपील खारिज कर दी। खंडपीठ ने एकल न्यायाधीश द्वारा केजरीवाल पर लगाए गए ₹25,000 के खर्च को भी नहीं छेड़ा।खंडपीठ ने कहा, “वर्तमान मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थितियों में, अपीलकर्ता की किसी भी दलील में आक्षेपित फैसले में कोई त्रुटि नहीं पाई जा सकती। तदनुसार अपील खारिज की जाती है और खर्च के संबंध में कोई और आदेश नहीं दिया जाता।”

यह विवाद 2016 के CIC आदेश से जुड़ा है, जिसमें गुजरात विश्वविद्यालय को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की डिग्रियों संबंधी जानकारी देने का निर्देश दिया गया था। विश्वविद्यालय ने इस निर्देश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।31 मार्च 2023 को न्यायमूर्ति बिरेन वैष्णव ने विश्वविद्यालय की चुनौती स्वीकार कर CIC का निर्देश रद्द कर दिया।

एकल न्यायाधीश ने केजरीवाल पर ₹25,000 का खर्च भी लगाया और कहा कि प्रधानमंत्री की योग्यता संबंधी सामग्री अदालत के सामने रखे जाने के बावजूद उन्होंने मामले को आगे बढ़ाया।अदालत ने विशेष रूप से विश्वविद्यालय के कार्यालय रजिस्टर का संज्ञान लिया, जिसमें डिग्री प्रदान किए जाने का रिकॉर्ड दर्ज था।

इसके बाद केजरीवाल ने फैसले की समीक्षा की मांग की। उनका तर्क था कि विश्वविद्यालय ने सिर्फ डिग्री प्रदान किए जाने वाला कार्यालय रजिस्टर पेश किया है, वास्तविक डिग्री नहीं।एकल न्यायाधीश ने कहा था कि कार्यालय रजिस्टर विश्वविद्यालय का समकालीन रिकॉर्ड है जो डिग्री प्रदान किए जाने को दर्शाता है और संबंधित उद्देश्य के लिए पर्याप्त है।अदालत ने केजरीवाल द्वारा मामले को लगातार आगे बढ़ाने की आलोचना भी की और कहा कि कार्यवाही को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की गई।

अदालत ने यह भी कहा कि RTI कार्यवाही जिस तरीके से चलाई गई, वह “RTI तंत्र की प्रक्रिया का दुरुपयोग” था, इसलिए लगाया गया खर्च उचित था।

केजरीवाल ने खर्च लगाने को चुनौती दी
खंडपीठ के सामने केजरीवाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने मुख्य रूप से ₹25,000 खर्च लगाने के आधार पर सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि एकल न्यायाधीश इस धारणा पर चले कि केजरीवाल प्रधानमंत्री की डिग्री का खुलासा कराने की कार्यवाही में ‘अड़े’ रहे, जबकि अपीलकर्ता के अनुसार उन्होंने जनहित के मद्देनजर किया।

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