एशियन गेम्स में चिकिथा-साहिल की जोड़ी ने जीता गोल्ड, अंतिम तीर तक चला रोमांच

लेंस डेस्क। भारतीय कंपाउंड मिश्रित तीरंदाजी जोड़ी चिकिथा तानीपार्थी और साहिल यादव ने बुधवार को एशियाई खेलों (Asian Games)में रोमांचक फाइनल में दक्षिण कोरिया को हराकर स्वर्ण पदक जीत लिया। इस जीत के साथ भारत को आठवां गोल्ड मेडल मिला और दोनों ने 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक का कोटा भी पक्का कर लिया।

चिकिथा और साहिल ने शूट-ऑफ में दक्षिण कोरिया की जोड़ी को 158-157 से हराया। सेमीफाइनल में उन्होंने थाईलैंड को 156-155 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी। भारतीय महिला टीम ने भी इसी स्पर्धा में शीर्ष स्थान हासिल किया।

चिकिथा तानीपार्थी – अखबार से मिली प्रेरणा

चिकिथा तानीपार्थी तेलंगाना की रहने वाली हैं और किसान परिवार से आती हैं। दूसरी कक्षा में अखबार में तीरंदाजी के बारे में पढ़ने के बाद उनके पिता ने उन्हें इस खेल में दिलचस्पी लेने के लिए प्रेरित किया। 2018 में उन्होंने औपचारिक ट्रेनिंग शुरू की।

2021 में पेशेवर करियर शुरू करने के बाद उन्होंने 2025 में बड़ी सफलता हासिल की। विन्निपेग में वर्ल्ड आर्चरी यूथ चैंपियनशिप में अंडर-21 महिला व्यक्तिगत स्पर्धा में गोल्ड जीतकर वह यह खिताब पाने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।

साहिल यादव – आर्थिक तंगी में भी नहीं हारे हौसले

साहिल राजेश यादव ने 2016 में पड़ोसी तीरंदाज को देखकर यह खेल अपनाया। दृष्टि तीरंदाजी अकादमी में ट्रेनिंग लेकर उन्होंने आगे बढ़ना शुरू किया। 2022 में आर्थिक समस्याओं के कारण उन्होंने तीरंदाजी छोड़ने तक का मन बना लिया था। लेकिन उनके पिता ने हिम्मत दी और परिवार ने पूरा साथ दिया। माता-पिता ने कहा कि वे आर्थिक चुनौतियां संभाल लेंगे, साहिल सिर्फ खेल पर ध्यान दें। दोनों की मेहनत और परिवार के समर्थन ने आज भारत को स्वर्ण पदक दिलाया है।

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