नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम (Umar Khalid and Sharjeel Imam)की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों ने ट्रायल कोर्ट के 4 जुलाई के फैसले के बाद हाई कोर्ट का रुख किया था।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को दिल्ली दंगा साजिश मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया। जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की डिवीजन बेंच ने यह आदेश दिया।
यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिका खारिज की है। कोर्ट ने इससे पहले अक्टूबर 2022 और सितंबर 2025 में भी उनकी जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। सुप्रीम कोर्ट ने दोनों फैसलों को बरकरार रखा था।
कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार किया था। उस समय सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि दोनों एक साल बाद या संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने के बाद फिर जमानत मांग सकते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि अभी इन दोनों में से कोई भी शर्त पूरी नहीं हुई है। ऐसे में खालिद और इमाम को जमानत देना सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव करने जैसा होगा जो हाईकोर्ट नहीं कर सकता।
कोर्ट ने कहा कि इन मामलों के तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट की ओर से लगाई गई शर्तों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट के फैसले में कोई गलती नहीं है। इसलिए दोनों की अपील खारिज की जाती है।
यह तीसरी बार है जब हाईकोर्ट ने उमर खालिद की जमानत खारिज की है। वहीं शरजील इमाम की जमानत याचिका दूसरी बार खारिज हुई है।
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पांच लोगों को जमानत दी थी। लेकिन खालिद और इमाम को राहत नहीं मिली थी। इसके बाद दोनों ने फिर जमानत के लिए याचिका दायर की। दोनों ने पहले ट्रायल कोर्ट का रुख किया था। ट्रायल कोर्ट ने 4 जुलाई को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट में अपील की।
खालिद और इमाम ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक अलग मामले, सैयद इफ्तिखार अंद्राबी केस, के फैसले का भी हवाला दिया था। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक अलग बेंच ने जनवरी 2026 में खालिद और इमाम को जमानत नहीं देने के फैसले पर सवाल उठाए थे। दोनों ने दलील दी कि इससे मामले की परिस्थितियों में बदलाव हुआ है।
पुलिस ने इसका विरोध करते हुए कहा कि किसी दूसरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की एक बेंच का फैसला खालिद और इमाम के मामले में सुप्रीम कोर्ट के पहले दिए गए खास निर्देशों को नहीं बदल सकता। उमर खालिद की ओर से वरिष्ठ वकील त्रिदीप पेस ने दलील दी कि ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना नहीं है। इसलिए लंबे समय से चल रहे ट्रायल को देखते हुए खालिद को जमानत मिलनी चाहिए।
शरजील इमाम की ओर से वकील तालिब मुस्तफा ने कहा कि जनवरी 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर ट्रायल में प्रगति नहीं होती है और दोनों जेल में रहते हैं तो वे दोबारा जमानत मांग सकते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रायल में कोई खास प्रगति नहीं हुई है। इसलिए इमाम को जमानत मिलनी चाहिए। वहीं अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा कि खालिद और इमाम की भूमिका उन लोगों जैसी नहीं है जिन्हें इस मामले में जमानत मिली है।
राजू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक खालिद और इमाम जनवरी 2027 के बाद या संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होने पर ही जमानत मांग सकते हैं।








