प्रगति-50 में रायपुर और बिलासपुर शामिल, नए नियमों से बदलेगी कचरा प्रबंधन की व्यवस्था, रायपुर 5 हजार बीट में बंटेगा

रायपुर। शहरों की सफाई व्यवस्था को और बेहतर बनाने तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को वैज्ञानिक और पारदर्शी तरीके से लागू करने के लिए भारत सरकार ने ‘प्रगति-50’ योजना (Pragati-50)शुरू की है। इस योजना के तहत देश के 50 शहरों का चयन किया गया है। छत्तीसगढ़ से रायपुर और बिलासपुर को इस योजना में शामिल किया गया है।

इस संबंध में रायपुर नगर निगम के आयुक्त संबित मिश्रा ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रगति-50 के तहत चयनित शहरों में सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाने के साथ-साथ ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की पूरी प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित किया जाएगा। योजना का उद्देश्य केवल सड़कों की सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि कचरे के संग्रहण से लेकर उसके पृथक्करण, परिवहन, प्रसंस्करण और अंतिम निपटान तक पूरी व्यवस्था को प्रभावी बनाना है।

आयुक्त संबित मिश्रा के अनुसार प्रगति-50 के तहत रायपुर शहर को चार क्लस्टर में विभाजित किया जाएगा। इसमें 5 हजार बीट होंगे जिनकी हर दिन निगरानी होगी। प्रत्येक क्लस्टर में सफाई और कचरा प्रबंधन की व्यवस्था को अलग-अलग स्तर पर संचालित और मॉनिटर किया जाएगा।

इस व्यवस्था की खास बात यह होगी कि संबंधित एजेंसी या व्यवस्था को किया जाने वाला भुगतान केवल काम पूरा करने के आधार पर नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस यानी वास्तविक प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा। इससे सफाई व्यवस्था की गुणवत्ता बनाए रखने और जवाबदेही तय करने पर जोर रहेगा।

रायपुर में सफाई और कचरा प्रबंधन की गतिविधियों की व्यापक मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके लिए सेंट्रल कंट्रोल सेंटर की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यहां से सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी की जाएगी।

ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 लागू

आयुक्त ने बताया कि भारत सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 को अधिसूचित किया है। नए नियमों के तहत देश में कचरे के प्रबंधन की व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं।

रायपुर में भी इन नए प्रावधानों को लागू करने के लिए आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं। नए नियमों का प्रमुख उद्देश्य कचरे को उसके स्रोत पर ही अलग करना और उसके बाद अलग-अलग श्रेणी के कचरे का उचित तरीके से प्रबंधन करना है।

रायपुर नगर निगम की ओर से नागरिकों को भी नए नियमों के तहत कचरे को अलग-अलग रखने के लिए जागरूक किया जा रहा है। नगर निगम की ओर से जारी जागरूकता अभियान में घरों से निकलने वाले सूखे और गीले कचरे के अलावा सैनिटरी तथा घरेलू हानिकारक कचरे को भी अलग रखने की अपील की गई है।

चार श्रेणियों में अलग होगा कचरा

नए नियमों के तहत कचरे के स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग किया जाएगा। इनमें गीला और सूखा कचरा के अलावा सैनिटरी वेस्ट और स्पेशल केयर/घरेलू हानिकारक कचरा शामिल हैं।

गीले कचरे में मुख्य रूप से भोजन, फल-सब्जियों के अवशेष और अन्य जैविक कचरा आएगा। सूखे कचरे में कागज, प्लास्टिक, धातु, कांच और अन्य रिसाइकिल योग्य सामग्री शामिल होगी। सैनिटरी और विशेष देखभाल वाले कचरे को अलग श्रेणी में रखकर उसके अनुरूप प्रबंधन किया जाएगा।

रायपुर नगर निगम पहले से ही नागरिकों को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग रखने के लिए जागरूक करता रहा है। अब नए नियमों के तहत पृथक्करण की व्यवस्था को और व्यापक बनाया जा रहा है।

बल्क वेस्ट जनरेटर की जिम्मेदारी बढ़ेगी

नए नियमों में बड़ी मात्रा में कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों और परिसरों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है।

ऐसे संस्थानों को अपने यहां उत्पन्न होने वाले कचरे के संग्रहण, पृथक्करण और प्रबंधन को लेकर निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि बड़े संस्थानों से निकलने वाला कचरा सीधे नगर निगम की सामान्य व्यवस्था पर निर्भर न रहे, बल्कि उसके प्रबंधन की जिम्मेदारी भी संबंधित संस्थान की हो।

इसमें बड़े आवासीय परिसर, होटल, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज, संस्थान, बाजार और अन्य बड़े प्रतिष्ठान शामिल हो सकते हैं।

ऑनलाइन होगी प्रक्रिया, बढ़ेगी पारदर्शिता

आयुक्त संबित मिश्रा ने बताया कि नए नियमों के तहत कचरा प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रिया में ऑनलाइन व्यवस्था को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाना और कचरा प्रबंधन से जुड़ी गतिविधियों की निगरानी को आसान बनाना है।

डिजिटल मॉनिटरिंग के माध्यम से यह देखा जा सकेगा कि कचरा संग्रहण, परिवहन और प्रबंधन की व्यवस्था निर्धारित मानकों के अनुसार चल रही है या नहीं।

रायपुर नगर निगम पहले से ही तकनीक आधारित निगरानी और स्वच्छता व्यवस्था पर काम कर रहा है। सितंबर 2026 में आयोजित IFAT इंडिया में भी निगम ने स्रोत स्तर पर कचरा पृथक्करण, डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण, आरआरआर सेंटर और डिजिटल मॉनिटरिंग से जुड़े अपने मॉडल प्रस्तुत किए थे।

सेंट्रल कंट्रोल सेंटर से होगी निगरानी

नए सिस्टम में सेंट्रल कंट्रोल सेंटर के माध्यम से सफाई और कचरा प्रबंधन की निगरानी की जाएगी। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में चल रहे सफाई कार्यों की स्थिति पर लगातार नजर रखना और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करना है।

इससे यह भी सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि सफाई वाहन नियमित रूप से निर्धारित क्षेत्रों में पहुंचें और कचरा संग्रहण की व्यवस्था में किसी तरह की लापरवाही न हो।

नगर निगम की ओर से नागरिकों से भी अपील की जा रही है कि वे कचरा सड़क, नाली, तालाब या सार्वजनिक स्थानों पर न फेंकें और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार सफाई मित्रों को अलग-अलग श्रेणी का कचरा सौंपें।

परफॉर्मेंस आधारित भुगतान से तय होगी जवाबदेही

प्रगति-50 के तहत रायपुर में चार क्लस्टर बनाए जाने और परफॉर्मेंस के आधार पर भुगतान की व्यवस्था को सफाई व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

इस मॉडल में केवल यह देखना पर्याप्त नहीं होगा कि सफाई का काम किया गया या नहीं, बल्कि काम की गुणवत्ता और निर्धारित मानकों के अनुसार प्रदर्शन को भी महत्व दिया जाएगा।

इस पूरी व्यवस्था की निगरानी नगर निगम के स्तर पर होने के साथ-साथ केंद्रीय स्तर पर भी की जाएगी।

रायपुर-बिलासपुर पर बढ़ी जिम्मेदारी

प्रगति-50 में छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर का चयन होने से दोनों शहरों के सामने स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के क्षेत्र में अपनी व्यवस्था को और मजबूत करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।

रायपुर में चार क्लस्टर, प्रदर्शन आधारित भुगतान, कचरे का चार श्रेणियों में पृथक्करण, बल्क वेस्ट जनरेटर की जिम्मेदारी, ऑनलाइन प्रक्रिया और सेंट्रल कंट्रोल सेंटर—इन सभी व्यवस्थाओं को एक साथ लागू करने का उद्देश्य शहर की सफाई व्यवस्था को अधिक जवाबदेह, पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाना है।

नगर निगम आयुक्त संबित मिश्रा ने कहा कि आने वाले समय में सफाई व्यवस्था की निगरानी केवल मैदानी निरीक्षण तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि तकनीक और डिजिटल मॉनिटरिंग के जरिए पूरे सिस्टम के प्रदर्शन पर नजर रखी जाएगी।

नए नियमों और प्रगति-50 के तहत होने वाले बदलावों का अंतिम असर इस बात पर निर्भर करेगा कि स्रोत पर कचरा पृथक्करण, नियमित संग्रहण, वैज्ञानिक प्रसंस्करण और निगरानी की व्यवस्था जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी तरीके से लागू होती है।

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