नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा हो चुके राज्यों में ECINET पोर्टल से Form-6 का अतिरिक्त घोषणा पत्र हटा दिया है। अब इन राज्यों में नया वोटर नाम जुड़वाने के लिए सामान्य फॉर्म का ही इस्तेमाल होगा। यह बदलाव 26 सितंबर को आयोग की घोषणा के चार दिन बाद बुधवार रात किया गया। आयोग ने तब कहा था कि SIR की अवधि खत्म होने के बाद Registration of Electors Rules, 1960 के तहत निर्धारित सामान्य फॉर्म ही लागू रहेगा।
क्या था विवाद?
इस साल जुलाई में ECINET पर ऑनलाइन Form-6 में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी। इसमें आवेदक से पूछा जाता था कि क्या उसका या माता-पिता/दादा-दादी का नाम पिछले SIR या 2003 की वोटर लिस्ट में था। ऑनलाइन फॉर्म में यह हिस्सा अनिवार्य जैसा था, जबकि डाउनलोड वाले संस्करण में नहीं था।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने इस पर आपत्ति जताई थी। उनका कहना था कि वैधानिक Form-6 में बदलाव के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन होना चाहिए। Representation of the People Act के तहत ऐसे फॉर्म में बदलाव का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
SIR की मौजूदा स्थिति
SIR के पहले और दूसरे चरण में 10 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश कवर हो चुके हैं। तीसरे चरण में दिल्ली, महाराष्ट्र समेत 16 राज्य और 3 केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं। यह प्रक्रिया 30 मई से 23 दिसंबर तक चलेगी, जिसमें 36.73 करोड़ वोटरों का सत्यापन हो रहा है।चुनाव आयोग का यह कदम नए और प्रभावित वोटरों के लिए फॉर्म-6 की प्रक्रिया को सरल बनाने वाला माना जा रहा है।
Form-6 नए मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट में जोड़ने का वैधानिक फॉर्म है। इसलिए इसमें किसी अतिरिक्त हिस्से को जोड़ना या हटाना महत्वपूर्ण माना जाता है। चुनाव आयोग का साफ कहना है कि गैर-SIR अवधि में सिर्फ निर्धारित सामान्य फॉर्म का इस्तेमाल होगा। इस बदलाव से नए वोटरों और जिनके नाम SIR में प्रभावित हुए थे, उनके लिए प्रक्रिया थोड़ी आसान हो गई है। मामला वैधानिक फॉर्म में बदलाव की प्रक्रिया और आयोग के अंदरूनी मतभेद दोनों को लेकर चर्चा में है।









