नई दिल्ली। हज 2027 (Haj 2027) के लिए भारतीय हज यात्रियों को सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली एकीकृत सेवा पैकेज (CSP) के टेंडर को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि टेंडर प्रक्रिया में कम बोली और बेहतर तकनीकी स्कोर वाली कंपनी के बजाय ज्यादा बोली लगाने वाली कंपनी को प्राथमिकता दी गई, जिससे करीब 1.22 लाख भारतीय हाजियों पर ₹300 से 350 करोड़ तक का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
हज-2027 के लिए भारतीय हज यात्रियों के पैकेज का टेंडर 11 अगस्त 2026 को भारतीय हज यात्रियों के कार्यालय, मक्का की ओर से जारी किया गया था।
आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट रिकॉर्ड के मुताबिक टेंडर की अनुमानित कीमत ₹200 करोड़ दर्ज है और इसमें भारतीय हज यात्रियों के लिए व्यापक सेवा पैकेज और उससे जुड़ी संचालन सेवाएं शामिल हैं।
L1 कंपनी और चुनी गई कंपनी की बोली में 27 हजार का अंतर
मिली जानकारी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में M/s Mashareq Al Mutamayza ने प्रति हाजी 8,717.01 सऊदी रियाल (करीब ₹2.14 लाख) की सबसे कम बोली लगाई और तकनीकी मूल्यांकन में 92.13 का सर्वोच्च स्कोर हासिल किया। इसके विपरीत M/s Ithra Al Khair की बोली प्रति हाजी 9,777 सऊदी रियाल (करीब ₹2.49 लाख) बताई गई है। दोनों दरों के बीच अंतर प्रति हाजी 1,059.99 सऊदी रियाल (करीब ₹ 27 हजार) है।
यदि करीब 1.22 लाख हाजियों पर यह अंतर लागू होता है तो अतिरिक्त राशि लगभग 12.93 करोड़ सऊदी रियाल बैठती है, जो भारतीय मुद्रा में ₹300 करोड़ से अधिक हो सकती है। हालांकि, यह गणना और इसका वास्तविक भार इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम अनुबंध, हाजियों की संख्या और सेवा पैकेज की शर्तें क्या रहती हैं।
चार बार एक ही कंपनी को टेंडर देने पर भी उठे सवाल
विवाद का एक बड़ा बिंदु यह भी है कि आरोप लगाने वालों के मुताबिक Ithra Al Khair को लगातार चौथी बार सर्विस मुहैया कराने का ठेका मिला है।
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने भी इस चयन पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि यदि दूसरी कंपनी को तकनीकी समिति की ओर से बेहतर माना गया था तो अंततः दूसरी कंपनी को ठेका क्यों दिया गया?
सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने भी मामले को गंभीर और सरकारी लूट बताते हुए जांच की मांग की है और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से व्यक्तिगत स्तर पर मामले को देखने की अपील की है।
मंत्रालय ने आरोपों को खारिज किया
विवाद बढ़ने के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 28 अगस्त को सफाई जारी की। मंत्रालय ने कहा कि हज-2027 के लिए सेवा प्रदाता कंपनी का चयन ‘निर्धारित और संरचित टेंडर प्रक्रिया’ के तहत किया गया है।
मंत्रालय के मुताबिक योग्य कंपनियों की बोलियों की निर्धारित मानकों पर जांच और मूल्यांकन किया गया और चयन स्वीकृत प्रक्रिया के आधार पर हुआ। मंत्रालय ने यह भी कहा कि गुणवत्ता, क्षमता, संचालन की तैयारी और वित्तीय पहलुओं को ध्यान में रखा गया है और प्रक्रिया पर किसी बाहरी या गैर-निर्धारित प्रभाव का आरोप सही नहीं है।
हालांकि, मंत्रालय की सफाई में उस खास सवाल का विस्तृत जवाब नहीं दिया गया कि Mashareq Al Mutamayza की कथित कम बोली और उच्च तकनीकी स्कोर के बावजूद Ithra Al Khair का चयन किस आधार पर किया गया। मंत्रालय ने भी किसी कंपनी का नाम लेकर इन आरोपों पर अलग-अलग जवाब नहीं दिया।
CBI जांच की मांग, संयुक्त सचिव से लेकर काउंसल जनरल की भूमिका
हज-2027 के CSP टेंडर में कथित अनियमितताओं को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज कर CBI जांच शुरू करने की मांग उठी है। आरोप लगाने वालों का कहना है कि हज कमेटी ऑफ इंडिया, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और विदेश मंत्रालय से जुड़े अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
जिन अधिकारियों/व्यक्तियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है, उनमें अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव मोहम्मद अफजल, हज कमेटी ऑफ इंडिया के सीईओ शहनवाज, कौसर जहां, जेद्दा में भारत की हज काउंसल सदफ चौधरी, जेद्दा में काउंसल जनरल फहद सूरी के नाम शामिल हैं।
इस पूरे मामले में शिकायतकर्ताओं ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और पूरी टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
साथ ही, केंद्रीय मंत्री के रिश्तेदार की कथित भूमिका की भी जांच किए जाने की मांग की गई है।
हज-2027 के CSP टेंडर की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की गई है। खास तौर पर तकनीकी मूल्यांकन, वित्तीय बोली, अंतिम चयन के आधार और टेंडर इवैल्यूएशन कमेटी की सिफारिशों को सामने लाने की मांग की जा रही है।











